बिहार के समस्तीपुर जिले में कोरोना जांच के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है.यह फर्जीवाड़ा जिले के कल्याणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर हुआ है.अधिकारियों के मुताबिक कल्याणपुर पीएचसी की कोरोना लैब में टारगेट पूरा करने के लिए241 लोगों की फर्जी सूची बनाई गई और फिर इनके आरटी-पीसीआर सैंपल जांच के लिए भेजदिए गए. कैसे हुआ खुलासा? आजतक से जुड़े जहांगीर आलम के मुताबिक कल्याणपुर पीएचसीमें काम करने वाले कर्मचारियों को लगा कि वो जो कर रहे हैं, उसका खुलासा कभी नहींहो सकता. लेकिन बीते हफ्ते उन्होंने 241 फर्जी नाम जो टेस्ट के लिए पटना भेजे, इनसभी की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई. इतनी बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव मामले सामनेआने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया. सिविल सर्जन ने जब इसकी जांच करवाई तोकोरोना जांच में फर्जीवाड़ा करने की बात सामने आ गई. इस मामले में एक लैब टेक्नीशियनको निलंबित कर दिया गया है, जबकि दो लैब टेक्नीशियन के विरुद्ध FIR दर्ज कराई गईहै. क्या है पूरा मामला? जहांगीर आलम के मुताबिक बीते दिसंबर में कोरोना के बढ़तेमामलों को देखते हुए जिले के कल्याणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को कोरोना जांचकी रफ्तार तेज करने का आदेश दिया गया था. इसके बाद अलग-अलग गांव के लिए टीमें बनाईगई थीं. स्वास्थ्य कर्मियों को जांच करने के लिए 5 और 6 जनवरी का टारगेट दिया गयाथा. लेकिन दो लैब टेक्नीशियंस ने टारगेट दिए जाने से पहले लिए गए कुछ सैंपल को हीफर्जी नामों से जोड़कर आरटी-पीसीआर जांच के लिए पटना भेज दिया.फोटो: आजतकनतीजा ये हुआ कि एक ही दिन में यानी 5 जनवरी को भेजे गए 115 लोगों की जांच रिपोर्टपॉजिटिव आ गई, जिनमें 101 नाम फर्जी थे. 6 जनवरी को पॉजिटिव आए 140 लोगों के नामपते भी गलत पाए गए. डीएम योगेंद्र सिंह के निर्देश पर पूरे मामले की जांच शुरू कीगई तो जांच में एक लैब टेक्नीशियन दिनेश झा और राजेश शरण दास को दोषी पाया गया.सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता ने तत्काल प्रभाव से दिनेश को निलंबित करदिया है. इस पूरे मामले में अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जारही है. पुलिस ने क्या बताया? समस्तीपुर पुलिस के मुताबिक कोरोना जांच में इतने बड़ेफर्जीवाड़े के बाद डीएम के निर्देश पर लैब टेक्नीशियन दिनेश कुमार झा और राजेश शरणदास के विरुद्ध कल्याणपुर थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई है. FIR में पीएचसीकल्याणपुर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ बीके ठाकुर ने कहा है, "5 और 6 जनवरी कोकोरोना जांच के लिए लैब टेक्नीशियन दिनेश कुमार झा और राजेश शरण दास ने सैंपल लिएथे. पांच जनवरी को 115 लोगों के लिए गए सैंपल में 101 को जांच में फर्जी पाया गया.वहीं, 6 जनवरी को लिए गए सैंपल में 140 लोगों के नाम और पता गलत पाए गए." पुलिस केएफआईआर दर्ज करते ही लैब टेक्नीशियन फरार हो गए हैं. पुलिस ने मामले की जांच शुरूकर दी है. इस बड़े फर्जीवाड़े में अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के भी नाम सामने आ सकतेहैं.