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बागी विधायकों ने एकता दिखाई तो शिंदे बोले- देश के ताकतवर राष्ट्रीय दल ने मेरा फैसला सराहा

एकनाथ शिंदे ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर ये दल उनका साथ भी देगा.

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23 जून 2022 (अपडेटेड: 23 जून 2022, 11:30 PM IST)
Eknath Shinde addressing the rebel MLAs at a hotel in Guwahati (Photo-India Today)
गुवाहाटी के होटल में बागी विधायकों को संबोधित करते एकनाथ शिंदे (फोटो-इंडिया टुडे)
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शिवसेना के ज्यादातर विधायकों के साथ गुवाहाटी के होटल में डेरा डाले एकनाथ शिंदे का एक वीडियो सामने आया है. वीडियो देखकर लगता है कि एकनाथ शिंदे ने अपने कैंप की एकता का सबूत देने के लिए इसे बनाया है. साथ ही वो अपने साथी विधायकों को कुछ संदेश देते दिख रहे हैं. कह रहे हैं कि एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी ने महा विकास अघाडी (एमवीए) सरकार के खिलाफ बगावत करने के उनके फैसले की सराहना की है.

इंडिया टुडे की ख़बर के मुताबिक शिवसेना के बागी विधायकों को संबोधित करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि देश की एक ताकतवर राष्ट्रीय पार्टी ने "ऐतिहासिक निर्णय" लेने के लिए उनकी सराहना की और आवश्यकता पड़ने पर समर्थन सुनिश्चित करने को भी कहा है. हालांकि शिंदे ने बीजेपी का नाम नहीं लिया, लेकिन कोई आश्चर्य नहीं उनकी बात को बीजेपी से ही जोड़कर देखा जा रहा है. शिंदे ने मराठी में कहा, 

“एक राष्ट्रीय पार्टी जो एक महाशक्ति है, उसने मुझसे कहा कि आपने जो भी निर्णय लिया है वो ऐतिहासिक है और हमें (विद्रोही विधायकों) सुनिश्चित किया है कि जो भी मदद की जरूरत होगी, दी जाएगी.”

शिंदे ने सीएम उद्धव ठाकरे के कल रात के संबोधन के जवाब में तीन पन्नों का एक पत्र भी ट्वीट किया है. इसमें शिवसेना के विधायकों की परेशानियों का जिक्र किया गया है. 

शिंदे कैंप की तरफ से मराठी में लिखे गए इस पत्र में कहा गया है-

“राज्य में शिवसेना का सीएम होने के बावजूद पार्टी के विधायकों को ‘वर्षा’ बंगले (सीएम के आवास) जाने का मौका नहीं मिला. सीएम के आसपास के लोग आमतौर पर तय करते हैं कि हम उनसे मिल सकते हैं या नहीं. हमें इस बात से बहुत अपमानित महसूस हुआ.” 

पत्र में आगे लिखा गया है पिछले 2.5 साल से सीएम आवास के दरवाजे विधायकों के  लिए बंद थे. सीएम कभी सचिवालय में नहीं हुआ करते थे, बल्कि मातोश्री (ठाकरे के आवास) में रहते थे. हम सीएम के आसपास के लोगों को कॉल करते थे, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता था. विधायक इन सब बातों से तंग आ चुके थे, इसलिए एकनाथ शिंदे को ये कदम उठाने के लिए राजी किया गया.

 

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