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मरीजों को फुसलाकर भारत लाया, बांग्लादेश किडनी रैकेट केस में जांच के साये में अस्पताल और डॉक्टर

Delhi के एक बड़े निजी अस्पताल की डॉक्टर को Kidney Racket मामले में गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि डॉक्टर कुछ बिचौलियों की मदद से मरीजों को फुसलाती थीं. और उन्हें Bangladesh से भारत बुलाती थीं.

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Kidney Racket
पुलिस मामले की जांच कर रही है. (सांकेतिक तस्वीर: AP)
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रवि सुमन
19 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 02:31 PM IST)
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दिल्ली पुलिस पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेश और भारत के किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट (Bangladesh Kidney Racket) की जांच कर रही है. इस महीने पुलिस ने दिल्ली के एक बड़े निजी अस्पताल की डॉक्टर विजया कुमारी को गिरफ्तार किया था. अब पुलिस की नजर इसी अस्पताल के एक और सर्जन पर है. इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े महेंद्र सिंह मनराल और कौनैन शेरिफ एम ने इस मामले को रिपोर्ट किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर विजया पर आरोप है कि वो एक ऐसे नेटवर्क से जुड़ी थीं, जिसमें बांग्लादेश से मेडिकल टूरिज्म चैनलों के माध्यम से लोगों को भारत लाया जाता था. फिर इन्हें किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से जोड़ा जाता था.

पुलिस इस मामले में, दो एंगल से जांच कर रही है. विजया कुमारी दिल्ली के जिस अस्पताल में डॉक्टर थीं, उसके नोएडा स्थित ब्रांच की भी जांच की जा रही है. वहीं दूसरी ओर विजया नोएडा के एक और अस्पताल में कंसल्टेंट के तौर पर काम कर रही थीं. पुलिस इस अस्पताल की भी जांच कर रही है. पुलिस ने इन सभी अस्पतालों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इन अस्पतालों से बांग्लादेशी नागरिकों के किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ी सभी जानकारियां मांगी गई हैं.

जांच अधिकारियों ने सरकार द्वारा किडनी ट्रांसप्लांट को मंजूरी देने वाली संस्था से भी संपर्क किया है. ताकि पता चल सके कि उन्होंने किसी गड़बड़ी को उजागर किया है या नहीं. इस बात की भी जांच की जा रही है कि कहीं सरकारी संस्था का भी कोई सदस्य तो इसमें शामिल नहीं है. और मंजूरी देने के लिए जो जरूरी प्रक्रिया है, उसका पालन किया गया है या नहीं.

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कैसे काम करता था रैकेट?

आरोप के अनुसार, बांग्लादेश उच्चायोग से संबंधित जाली दस्तावेज बनाए जाते थे. ताकि किडनी दान देने वाले और किडनी लेने वाले के बीच संबंध साबित किया जा सके. क्योंकि भारत के कानून के अनुसार, केवल परिवार का करीबी सदस्य या दूर का रिश्तेदार या कोई दोस्तों ही किडनी दान दे सकता है. साथ ही इसमें किसी तरह से पैसों का कोई लेन-देन नहीं होना चाहिए. पुलिस ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर विजया, कुछ बिचौलियें और इस रैकेट से जुड़े कई और लोग भी बांग्लादेश के मरीजों को फुसलाते थे. अब तक गिरफ्तार किए गए सात लोगों में से एक- 2021 में दिल्ली के इस अस्पताल में जाने से पहले फरीदाबाद के एक अन्य निजी अस्पताल में काम कर चुका था.

बांग्लादेश के कई लोग शामिल हैं

उसने खुलासा किया है कि उसे तासीन नाम के एक बांग्लादेशी नागरिक ने दिल्ली के बड़े अस्पताल में बुलाया था. तासिन ने उसे अच्छी सैलरी देने का वादा किया था. तासीन उस समय मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में काम कर रहा था. और बांग्लादेशी मरीजों को इलाज के लिए भारत लाता था. उसने दावा किया कि दो और बांग्लादेश नागरिक, रसेल और रोकोन भी इसमें शामिल थे. ये सब नियमित रूप से बांग्लादेश के मरीजों और डोनर्स से मिलते थे. और भारत में किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था करते थे. रसेल और रोकोन को गिरफ्तार कर लिया गया है.

आरोप के अनुसार, तासीन के मरीज ज्यादातर वो होते थे जिन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत होती थी. इसमें से अधिकतर मरीजों का इलाज डॉक्टर विजया ने किया था. और कभी-कभी तासीन के लाए मरीज को कथित तौरपर डॉक्टर विजया के एक सीनियर सर्जन के पास भी ले जाया जाता था. 

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पुलिस ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस के उपायुक्त (क्राइम) अमित गोयल ने कहा है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कबूल किया है कि वो बांग्लादेश के डायलिसिस केंद्रों पर जाकर किडनी की बीमारी से पीड़ित बांग्लादेशी मरीजों को निशाना बनाते थे. वो बांग्लादेश से डोनर की व्यवस्था करते थे, उनकी खराब आर्थिक स्थिति का फायदा उठाते थे और उन्हें भारत में नौकरी दिलाने के बहाने उनका शोषण करते थे.

तासीन ने कथित तौर पर ऐसा दावा किया है कि कुछ मामलों में डॉक्टर विजया ने उसे फर्जी दस्तावेज बनाने को कहा था. और एक विशेष मामले में तो ये काम मात्र 30 मिनट में पूरा कर लिया गया था. डॉक्टर विजया को फिलहाल दिल्ली के बड़े निजी अस्पताल ने निलंबित कर दिया है.

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