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बांग्लादेश ने तोड़ी 180 करोड़ की डील, भारत ने जमीनी रास्ते सामान की रोकी थी एंट्री

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार Muhammad Yunus ने चीन में जाकर एक बयान दिया था. उस बयान के बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ रहे हैं. अब बांग्लादेश ने भारत के साथ एक बड़ा सौदा रद्द कर दिया है.

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Bangladesh Cancels Defence Contract
बांग्लादेश ने GRSE के साथ कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया है. (तस्वीर: एजेंसी/इंडिया टुडे)
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रवि सुमन
23 मई 2025 (पब्लिश्ड: 02:07 PM IST)
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बांग्लादेश ने भारत की एक कंपनी के साथ 180.25 करोड़ रुपये का एक डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट रद्द (Bangladesh Cancels Defence Contract ) कर दिया है. कोलकाता स्थित ये कंपनी जहाज बनाती है और भारत के रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है. कंपनी का नाम है, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE). कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने की जानकारी GRSE की ओर से आई है. ये खबर ऐसे समय में आई है जब भारत-बांग्लादेश के रिश्ते लगातार बिगड़ रहे हैं.

GRSE ने 21 मई को जारी अपने बयान में कहा,

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इस कॉन्ट्रैक्ट में बांग्लादेश के लिए एडवांस समुद्री जहाज बनने थे. इन जहाजों का इस्तेमाल समुद्र में लंबी दूरी तक यात्रा करने और डिफेंस के काम के लिए होना था.

ये भी पढ़ें: मुहम्मद यूनुस पर चुनाव कराने का दबाव बढ़ा तो इस्तीफे की धमकी दे दी, बांग्लादेश में चल क्या रहा है?

बांग्लादेश ने ऐसा किया क्यों?

इस घटना को भारत के प्रति बदले की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है. क्योंकि पिछले महीने भारत ने बांग्लादेश के लिए अपनी ट्रांसशिपमेंट की सुविधा बंद कर दी थी. साल 2020 में भारत ने बांग्लादेश को ये सुविधा दी थी. इसके तहत वो भारत की जमीन से होकर किसी तीसरे देश तक अपना सामान भेज सकता था. इसके लिए वो भारत के हवाई अड्डों या बंदरगाहों का उपयोग कर सकता था. 

ट्रांसशिपमेंट की सुविधा खत्म करने के बाद इस महीने भी भारत ने बांग्लादेश के लिए कुछ प्रतिबंध लगाए हैं. कुछ बांग्लादेशी सामानों के लिए भारत ने अपना लैंड पोर्ट पूरी तरह बंद कर दिया है. हालांकि, इनके लिए कुछ सी-पोर्ट यानी समुद्र के रास्ते खुले हैं.

ये भी पढ़ें: बांग्लादेशी सामान की भारत में जमीन के रास्ते एंट्री बंद, लाना है तो पानी के रास्ते ही लेकर आओ

ये सब शुरू कैसे हुआ?

इस तनाव का कारण मोहम्मद यूनुस के एक बयान को माना जा रहा है. कुछ समय पहले वो चीन पहुंचे थे. वहां उन्होंने एक विवादित बयान दे दिया. 28 मार्च को बीजिंग में उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का हवाला देते हुए चीन से अपनी अर्थव्यवस्था को विस्तार देने की अपील की थी. उन्होंने कहा था, 'भारत के सात राज्य... भारत के पूर्वी हिस्से... जिन्हें सेवन सिस्टर्स कहा जाता है, ये भारत के लैंडलॉक्ड क्षेत्र हैं. समंदर तक उनकी पहुंच का कोई रास्ता नहीं है. इस पूरे क्षेत्र के लिए समंदर के अकेले संरक्षक हम हैं... इसलिए यह चीनी अर्थव्यवस्था के लिए विस्तार हो सकता है. ये विशाल संभावना के द्वार खोलता है. चीजें बनाएं, उत्पादन करें... चीजें बाजार में लाई जाएं... चीजें चीन में लाएं और बाकी दुनिया तक पहुंचाएं.' 

वीडियो: दुनियादारी: बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती, भारत के लिए क्यों है खतरा?

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