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पतंजलि की 5 दवाओं पर बैन लगाकर वापिस ले लिया, कहा - "गलती हो गई थी"

एक डॉक्टर की शिकायत पर बैन हुई थी पतंजलि की पांच दवाएं.

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16 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 16 नवंबर 2022, 01:24 PM IST)
patanjali drugs ban
योगगुरू रामदेव (फोटो- ANI)
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उत्तराखंड सरकार ने पतंजलि (Patanjali) की 5 दवाओं पर लगे बैन को वापस ले लिया है. उत्तराखंड आयुर्वेद और यूनानी लाइसेंस प्राधिकरण ने 9 नवंबर को दिव्य फार्मेसी की दवाओं पर बैन लगाया था. साथ ही इन दवाओं के विज्ञापनों को बंद करने का निर्देश दिया था. दिव्य फार्मेसी पतंजलि के मालिकाना वाली कंपनी है. तीन दिन बाद 12 नवंबर को प्राधिकरण ने कहा कि दवाओं के निर्माण कार्य में 'गलती' से रोक लगाई गई थी. नए आदेश में कहा गया दिव्य फार्मेसी पहले की तरह दवा निर्माण जारी रख सकती है.  

पतंजलि ने क्या कहा?

दवाओं पर रोक हटने पर पतंजलि ने कहा कि उसे बदनाम करने की कोशिश की गई. पतंजलि ने बैन आदेश जारी करने वाले लाइसेंसिंग अधिकारी को 'अज्ञानी' तक कह दिया. पतंजलि ने बयान में कहा, 

"उत्तराखंड के आयुर्वेद लाइसेंसिंग अधिकारी अज्ञानी, असंवेदनशील, अयोग्य अधिकारी पूरी आयुर्वेद की ऋषि परंपरा को कलंकित कर रहे हैं. एक अधिकारी के अविवेकपूर्ण काम और गलती से आयुर्वेद की परंपरा और रिसर्च पर ही सवाल खड़ा करने का, उसे कलंकित करने का घोर निंदनीय काम किया गया और पतंजलि को दुर्भावनापूर्वक बदनाम किया."

पतंजलि ने आगे कहा कि ऐसे षडयंत्र योग-आर्युवेद और भारतीय परंपरा के विरोधी लोग करते हैं. कंपनी के मुताबिक अगर आयुर्वेद की स्थापना में किसी भी तरह से कोई षडयंत्र करेगा तो उसके खिलाफ पतंजलि कानूनी लड़ाई लड़ेगा.

किन दवाओं पर लगी थी रोक?

पतंजलि की जिन दवाओं पर रोक लगाई थी उनमें दिव्य मधुग्रित, दिव्य आईग्रिट गोल्ड, दिव्य थायरोग्रिट, दिव्य BPग्रिट और दिव्य लिपिडोम शामिल हैं. पतंजलि के मुताबिक, इन दवाओं का इस्तेमाल डायबिटीज, आंखों के इन्फेक्शन, थायरॉइड, ब्लड प्रेशर और हाई कॉलेस्ट्रॉल की समस्या से निपटने के लिए किया जाता है.

अधिकारियों ने दवाओं के खिलाफ शिकायत के बाद ये एक्शन लिया था. केरल के एक डॉक्टर केवी बाबू ने दिव्य फार्मेसी के खिलाफ शिकायत में कहा था, 

"दवा के विज्ञापन में कहा गया है कि उससे मोतियाबिंद जैसी दिक्कतों में आराम मिलेगा. लेकिन अगर ये समस्याएं बनी रहीं तो लोग अंधे हो सकते हैं. ऐसे विज्ञापन मानव जीवन के लिए खतरा हैं."

दवा बैन के आदेश के बाद पतंजलि ने इसे 'साजिश' बताया था. कंपनी का कहना था कि दिव्य फार्मेसी की दवाएं सभी निर्धारित मानकों के अनुसार बनाई गई हैं.

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