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खामेनेई बंकर में क्यों नहीं छिपे? ईरान के सुप्रीम लीडर के करीबी ने सब बताया

Iran के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei के करीबी ने बताया कि खामेनेई ने तेहरान में अपना घर छोड़ने या बंकर में जाने से इनकार कर दिया था. उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई है.

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15 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 08:50 AM IST)
Ayatollah Ali Khamenei didn't go into bunker explain iran Supreme Leader's aide
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए खामेनेई के करीबी अब्दुल माजिद हकीम इलाही. (दाएं)
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‘ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने तेहरान में अपना घर छोड़कर किसी सुरक्षित जगह या बंकर में जाने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि जब तक ईरान के सभी 9 करोड़ लोगों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होगी, तब तक वह अपनी सुरक्षा की तलाश नहीं करेंगे.’ यह बात अली खामेनेई के करीबी रहे अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने कही है.

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों में खामेनेई की मौत हो गई थी. 14 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए इलाही ने कहा कि खामेनेई ने ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद अपने घर पर ही रहने का फैसला किया था. भारत में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने कहा, 

मैंने उनकी सिक्योरिटी टीम से पूछा कि वे उन्हें किसी सुरक्षित जगह या दूसरे शहर में क्यों नहीं ले जा रहे हैं, क्योंकि उनका ऑफिस और घर अच्छी तरह से जाना-पहचाना था. टीम ने कहा कि उन्होंने मना कर दिया और कभी ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हुए. उन्होंने कहा कि अगर 'आप तेहरान के 9 करोड़ नागरिकों को सुरक्षित शेल्टर दे सकते हैं, तो मैं अपना घर छोड़कर दूसरी जगह जाने को तैयार हूं'.

ईरानी अधिकारियों ने आगे बताया कि यही सवाल अली खामेनेई के परिवार से भी पूछा गया था, जिन्होंने सुप्रीम लीडर के हवाले से कहा, “मैं देश का लीडर हूं और एक लीडर को पिछड़े और गरीबों के बराबर होना चाहिए. अगर मैं अपने लिए खास जिंदगी जीता हूं, तो मैं इस देश का लीडर नहीं रह सकता."

ये भी पढ़ें: नेहरू की ये किताब सबको 'जरूर पढ़ने' को कहते थे खामेनेई, कई भाषणों में किया जिक्र

'खामेनेई शहीद होना चाहते थे'

इस्लाम में शहादत का क्या महत्व है? इस सवाल का जवाब देते हुए इलाही ने कहा कि शहादत को इस्लाम में सबसे बड़ी अच्छाइयों में से एक माना जाता है. उन्होंने कहा कि खामेनेई लंबे समय से शहादत पाने की ख्वाहिश रखते थे. इलाही ने कहा,

"मुझे याद है कि कुछ महीने पहले उन्होंने बार-बार कहा था, ‘अब मैं बूढ़ा हो गया हूं, मैं 86 साल का हूं, और मुझे डर है कि कहीं मेरी मौत किसी अस्पताल में, या किसी दुर्घटना या बुखार की वजह से न हो जाए. यह मेरे लिए अच्छा नहीं होगा. मैं तो शहादत पाना ज्यादा पसंद करूंगा’." 

बताते चलें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने तेहरान में खामेनई के ऑफिशियल कंपाउंड पर एयरस्ट्राइक की थी और बंकर-बस्टर बमों से निशाना बनाया था. इस हमले में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी.

वीडियो: दुनियादारी: खामेनेई की हत्या के बाद ईरान ने अमेरिका को कैसे फंसा दिया?

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