दिल्ली के बीचोंबीच खुदाई होगी, महाभारत का ये राज़ खुलने वाला है!
पिछली खुदाई में क्या मिला था?

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) विभाग पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ के बारे में और जानकारी जुटाने के लिए दिल्ली के पुराने किले में फिर से खुदाई शुरू करने जा रहा है. ये खुदाई 600-1000 ईसा पूर्व के बीच के समय की जानकारी जुटाने के लिए की जाएगी. इस वक्त को भारत के इतिहास में महाभारत काल के नाम से भी जाना जाता है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक पुराने किले की खुदाई ASI के डायरेक्टर वसंत स्वर्णकार की निगरानी में की जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक आजादी के बाद ये पांचवां ऐसा मौका होगा जब इस जगह की खुदाई की जाएगी. इससे पहले साल 2013-14 और 2017-18 में भी पुराने किले की खुदाई की गई थी. वहीं साल 1969-73 में पद्म विभूषण बीबी लाल की अगुवाई में पुराने किले में खुदाई की गई थी. इस बार होने वाली खुदाई का मुख्य उद्देश्य पिछली बार मिले अवशेषों को बचाने का होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक इस बार होने वाली खुदाई से ASI पुराने किले में मिलने वाले अवशेषों की स्ट्रेटीग्राफी को समझेगी. स्ट्रेटीग्राफी से पुरातात्विक परतों के क्रम और उनकी स्थिति का विश्लेषण किया जाता है. इससे इस यक़ीन को और पुख्ता करने में सहायता मिलेगी कि उस काल में इंद्रप्रस्थ ही पांडवों की राजधानी थी. इस बार ये देखना होगा कि खुदाई में कौन-सी नई चीजें निकल कर सामने आती हैं?
इससे पहले मौर्य काल के सबूत मिले थेरिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले जब इस इलाके में खुदाई की गई थी तो यहां मौर्य काल के कुछ सबूत पाए गए थे. मौर्य काल से पहले भारत 16 महाजनपदों में विभाजित था. इन महाजनपदों में कुरु, पंचाल और अंग जैसे साम्राज्य शामिल थे. ये तीनों साम्राज्य पांडव, द्रौपदी और कर्ण से क्रमश: जुड़े हुए हैं.
हालांकि अभी इसकी जांच होनी बाकी है. लेकिन खुदाई के बाद मिली वस्तुओं को देखने के बाद ये बात कही जाने लगी थी कि यहां हजारों साल पहले भी लोग आधुनिक सुविधाओं के साथ रहते थे.
ASI के सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि पुराना किला पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ से प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है. यहां तक इसका जिक्र प्राचीन काल की कई पुस्तकों और पुराणों में भी मिलता है. पुराना किला 16 वीं शताब्दी में शेर शाह सूरी और मुगल शासक हुमायूं द्वारा बनवाया गया था. इस किले का इतिहास हजारों साल पुराना है.
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