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तिरुपति लड्डू विवाद के बहाने असदुद्दीन ओवैसी वक्फ और हिंदू धर्म पर क्या बोल गए?

AIMIM नेता Asaduddin Owaisi ने सवाल किया कि तिरुपति मंदिर के लड्डुओं में जानवर की चर्बी का इस्तेमाल गलत है, लेकिन उनकी धार्मिक संस्थानों और आस्था का क्या.

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25 सितंबर 2024 (पब्लिश्ड: 08:01 PM IST)
Asaduddin Owaisi on Tirupati Laddu Controversy blames BJP for waqf bill
AIMIM चीफ ने आगे बताया कि केंद्र सरकार बोल रही है कि ये कलेक्टर तय करेगा कि वक्फ की जमीन है या नहीं. (फोटो- )
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तिरुपति मंदिर के प्रसाद में कथित तौर पर जानवरों की चर्बी पाए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. मामले में अब AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी का बयान सामने आया है (Asaduddin Owaisi on Tirupati Laddu Controversy). उन्होंने कहा है कि जो हुआ बिल्कुल गलत हुआ, ऐसा नहीं होना चाहिए. AIMIM नेता ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि उनके धार्मिक संस्थानों और आस्था का क्या.

बुधवार, 25 दिसंबर को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने कहा,

“तिरुपति के प्रसाद में जानवरों की चर्बी के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है, ऐसा हुआ है तो गलत है. हम भी इसे गलत मानते हैं और ये नहीं होना चाहिए था.”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ओवैसी ने वक्फ संशोधन बिल पर सवाल खड़े करते हुए कहा,

“वक्फ का सदस्य गैर-हिंदू कैसे हो सकता है? वक्फ की प्रॉपर्टी एक प्राइवेट प्रॉपर्टी है. बीजेपी अफवाह फैला रही है कि वक्फ एक सरकारी प्रॉपर्टी है. ये झूठा प्रोपेगैंडा है कि वक्फ बोर्ड के पास 10 लाख एकड़ जमीन है.''

उन्होंने आगे कहा कि जैसे हिंदू धर्म में प्रॉपर्टी दान दी जाती है, वैसे ही वक्फ में भी जमीन दान दी जाती है. ओवैसी बोले,

“ये बिल मोदी सरकार इसलिए लाना चाहती है ताकि वक्फ बिल खत्म हो जाए. हिंदू धर्म में भी तो होता है आप किसी को भी दान दे सकते हैं, तो ऐसा क्यों है?”

AIMIM चीफ ने आगे बताया कि केंद्र सरकार बोल रही है कि ये कलेक्टर तय करेगा कि वक्फ की जमीन है या नहीं. उन्होंने कहा कि कलेक्टर तो सरकार का ही आदमी होता है, तो कैसे न्याय होगा? लोकसभा सांसद ने आगे कहा कि ये बिल वक्फ के पक्ष में नहीं है, बल्कि वक्फ को खत्म करने के लिए बनाया गया है.

मामला क्या है?

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने 18 सितंबर को आरोप लगाया था कि पिछली YSRCP सरकार के दौरान तिरुपति लड्डू प्रसादम बनाने में ‘जानवरों की चर्बी’ का इस्तेमाल किया जाता था. YSRCP ने इस आरोप को “दुर्भावनापूर्ण” बताते हुए खारिज कर दिया और नायडू को सबूत पेश करने की चुनौती दी. 19 सितंबर को उस लैब की रिपोर्ट सामने आई जिसने तिरुपति लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी की जांच की थी.

गुजरात के राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के पशुधन और खाद्य विश्लेषण और अध्ययन केंद्र (CALF) प्रयोगशाला में घी की जांच की गई थी. रिपोर्ट में कहा गया कि तिरुपति लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए घी में एनिमल फैट मौजूद था. खबरों के मुताबिक रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि घी में गोमांस और मछली के तेल के अंश थे. साथ ही एक सेमी सॉलिड सफेद फैट मिला है जो सूअर की चर्बी को पिघला कर बनता है.

इसके बाद ये विवाद और बढ़ गया. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पर रिपोर्ट मांगी है.

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