बिहार : पुलिस अधिकारी ने कहा कि शराब की अवैध बिक्री हो रही, फिर अधिकारी के साथ ही खेल हो गया
लेटर गया ठंडे बस्ते में, फिर आया 'आलोचना रोकने' वाला फ़रमान
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नीतीश कुमार की सरकार पर इल्ज़ाम गहरे हैं. क्या सरकार आलोचना रोकने के प्रयास करने के साथ ही भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले अधिकारियों को सुनने को तैयार नहीं है?
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2020 में बिहार में नई सरकार आई. 2021 में एक नया आदेश आ गया. आदेश आया है आर्थिक अपराध ईकाई के अपर पुलिस महानिदेशक नैयर हसनैन खान की तरफ़ से. आदेश में कहा गया कि सरकारी पदाधिकारियों के संबंध में अगर सोशल मीडिया या इंटरनेट पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, तो इसे साइबर अपराध की श्रेणी में गिना जा सकता है. लेकिन इसी बिहार में एक नए पुलिस अधीक्षक का ट्रान्स्फ़र भी कर दिया जाता है. इस पुलिस अधीक्षक ने कुछ अधिकारियों को शिकायती चिट्ठी लिखी थी और ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से शराब की बिक्री की बात की थी. चिट्ठी लिखने के 13 दिनों बाद ट्रान्स्फ़र तो हुआ ही, साथ ही शिकायती चिट्ठी भी वापिस ले ली गई.
पहले सरकारी आदेश की बात. सभी प्रधान सचिवों और सचिवों को प्रेषित ये आदेश 21 जनवरी 2021 को लिखा गया. इस आदेश में लिखा गया है,
सभी पुलिस अधीक्षकों को ये पत्र लिखा था बिहार पुलिस के मद्यनिषेध विभाग के पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा ने. इस पत्र में उन्होंने कहा कि इसमें (शराब की अवैध बिक्री में) स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं. इसके बाद पत्र में लिखा गया कि विगत वर्षों से बिहार प्रदेश के उत्पाद विभाग में कार्यरत निरीक्षक, अवर निरीक्षक और आरक्षियों के रिश्तेदारों के चल-अचल सम्पत्तियों की जांच कराई जाए तो इन लोगों द्वारा कितनी गुमनाम सम्पत्ति अर्जित की गई है, उसके पता चलने से सरकारी महकमे में हड़कंप मच जाएगा.
पुलिस अधीक्षक मद्य निदेशक द्वारा लिखा गया लेटर
लेटर के साथ कुछ ब्यौरा भी नत्थी किया गया था और जांच की सिफ़ारिश की गई थी.
6 जनवरी 2021 को लिखा गया ये पत्र बिहार की राजनीति के लिए अहम था. इस पत्र में किए गए दावे उन कई सारे लोगों की बातों से मेल खाते थे, जो बिहार चुनाव के दौरान दी लल्लनटॉप की अलग अलग टीम को मिले थे. हमारी प्लेलिस्ट में ऐसे कई सारे वीडियो हैं, जहां लोग शराब के उत्पादन और उसकी ग़ैरक़ानूनी बिक्री के आरोप सरकारी महकमे में लगा रहे हैं.
लेकिन 6 जनवरी को मिले इस लेटर पर क्या हुआ? कुछ नहीं. अलबत्ता 19 जनवरी को राकेश कुमार सिन्हा का 6 आईपीएस अधिकारियों के साथ स्पेशल ब्रांच में तबादला कर दिया गया. 19 तारीख़ को ही उनकी जगह आए संजय कुमार सिंह. और संजय कुमार सिंह ने आते ही जांच की सिफ़ारिश करते इस लेटर को वापिस ले लिया. मतलब अभी इस बारे में कोई बात नहीं होगी.
नए पुलिस अधीक्षक ने जारी किया पत्र वापसी का फ़रमान
प्रशासनिक हलके का क्या कहना है? बिहार के डीजीपी एके सिंघल की ओर से कोई बयान या सफ़ाई अभी तक नहीं आई है. आती है तो हम ज़रूर बतायेंगे. लेकिन जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा है कि उन्हें इस लेटर के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन राज्य सरकार शराब माफ़ियाओं के खिलाफ़ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है.
तेजस्वी यादव ने यहां पर भी सीधे नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. 20 जनवरी को लिखे अपने ट्वीट में कहा है कि शराब माफ़ियाओं की पहुंच मुख्यमंत्री तक है. तभी तो तबादला कर दिया है.
प्रश्न थे गंभीर, शायद ख़तरनाक भी, इसीलिए बाहर के गुंजान जंगलों से आती हुई हवा ने फ़ूंक मार एकाएक मशाल ही बुझा दी
पहले सरकारी आदेश की बात. सभी प्रधान सचिवों और सचिवों को प्रेषित ये आदेश 21 जनवरी 2021 को लिखा गया. इस आदेश में लिखा गया है,
“ऐसी सूचनाएं लगातार प्रकाश में आ रही हैं कि कतिपय व्यक्ति/संगठनों द्वारा सोशल मीडिया/ इंटरनेट के माध्यम से सरकार, माननीय मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं सरकारी पदाधिकारियों के संबंध में आपत्तिजनक/अभद्र एवं भ्रांतिपूर्ण टिप्पणियां की जाती हैं. ये विधि विरुद्ध एवं क़ानून के प्रतिकूल है तथा साइबर अपराध की श्रेणी में आता है.”आदेश पढ़ें तो ये समझ में आता है कि प्रशासन साइबर क्राइम के तहत इन आपत्तिजनक टिप्पणियों के आधार पर केस दर्ज कर सकता है. लेकिन इसमे ये समझ नहीं आता है कि सरकार किन टिप्पणियों को आपत्तिजनक मान रही है. क्या ये सरकार की आलोचना से रोकने की तरफ एक क़दम है? सोशल मीडिया पर कहा तो यही जा रहा है. विपक्ष भी कह रहा है. राज्यसभा सदस्य और राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज कुमार झा ने ट्वीट करके कहा,
“हे बिहार सरकार! कहां ले जा रहे हैं बिहार को. आलोचना से इतना डर!जनादेश को शासनादेश से बदलने का नतीजा कुछ यूं होता है क्या? बकौल फ़ैज़: निसार मैं तेरी गलियों के ए वतन कि जहां चली है रस्म की कोई ना सर उठा के चले…”
तेजस्वी यादव ने भी निशाना साधा है. कहा है कि मुख्यमंत्री हिटलर के नक़्शे-क़दम पर चल रहे हैं. और कहा है, ‘नीतीश जी, मानते हैं कि आप पूर्णत: थक गए हैं लेकिन कुछ तो शर्म कीजिए.’हे बिहार सरकार! कहां ले जा रहे हैं बिहार को।आलोचना से इतना डर!जनादेश को शासनादेश से बदलने का नतीजा कुछ यूं होता है क्या? बकौल फ़ैज़: निसार मैं तेरी गलियों के ए वतन कि जहां चली है रस्म की कोई ना सर उठा के चले... pic.twitter.com/vkp5GEaSad
— Manoj Kumar Jha (@manojkjhadu) January 22, 2021
इसके अलावा इंडिया टुडे के साथ ख़ास बातचीत में भी तेजस्वी यादव ने कहा है,हिटलर के पदचिन्हों पर चल रहे मुख्यमंत्री की कारस्तानियां
*प्रदर्शनकारी चिह्नित धरना स्थल पर भी धरना-प्रदर्शन नहीं कर सकते
*सरकार के ख़िलाफ लिखने पर जेल
*आम आदमी अपनी समस्याओं को लेकर विपक्ष के नेता से नहीं मिल सकते
नीतीश जी, मानते है आप पूर्णत थक गए है लेकिन कुछ तो शर्म किजीए pic.twitter.com/k6rtriCJ3x
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) January 22, 2021
"लोकतंत्र की जननी बिहार में नीतीश कुमार लोकतंत्र की आवाज़ दबाना चाहते हैं. नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह हैं, हर जगह RCP टैक्स लिया जा रहा है. उनके शासनकाल में अपराध बढ़ गए हैं, मुझे गिरफ़्तार करना है तो कर लें. सोशल मीडिया पर लिखने वाले लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है."आदेश तो आदेश है, लेकिन क्या सरकार की मंशा क़ानून को लेकर इतनी ही मुस्तैदी बरतने की है? ये सवाल हम इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि इस आदेश के दो दिनों पहले उस पुलिस अधिकारी को हटा दिया जाता है, जिसने एक पत्र में लिखा था कि बिहार सरकार ने अध्यादेश लाकर भले ही बिहार में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है, लेकिन कई पुलिस अधिकारियों की मिली भगत के कारण बिहार के कई जिलों में शराब का उत्पादन किया जा रहा है और साथ ही उसकी बिक्री भी की जा रही है.
सभी पुलिस अधीक्षकों को ये पत्र लिखा था बिहार पुलिस के मद्यनिषेध विभाग के पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा ने. इस पत्र में उन्होंने कहा कि इसमें (शराब की अवैध बिक्री में) स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं. इसके बाद पत्र में लिखा गया कि विगत वर्षों से बिहार प्रदेश के उत्पाद विभाग में कार्यरत निरीक्षक, अवर निरीक्षक और आरक्षियों के रिश्तेदारों के चल-अचल सम्पत्तियों की जांच कराई जाए तो इन लोगों द्वारा कितनी गुमनाम सम्पत्ति अर्जित की गई है, उसके पता चलने से सरकारी महकमे में हड़कंप मच जाएगा.
पुलिस अधीक्षक मद्य निदेशक द्वारा लिखा गया लेटरलेटर के साथ कुछ ब्यौरा भी नत्थी किया गया था और जांच की सिफ़ारिश की गई थी.
6 जनवरी 2021 को लिखा गया ये पत्र बिहार की राजनीति के लिए अहम था. इस पत्र में किए गए दावे उन कई सारे लोगों की बातों से मेल खाते थे, जो बिहार चुनाव के दौरान दी लल्लनटॉप की अलग अलग टीम को मिले थे. हमारी प्लेलिस्ट में ऐसे कई सारे वीडियो हैं, जहां लोग शराब के उत्पादन और उसकी ग़ैरक़ानूनी बिक्री के आरोप सरकारी महकमे में लगा रहे हैं.
लेकिन 6 जनवरी को मिले इस लेटर पर क्या हुआ? कुछ नहीं. अलबत्ता 19 जनवरी को राकेश कुमार सिन्हा का 6 आईपीएस अधिकारियों के साथ स्पेशल ब्रांच में तबादला कर दिया गया. 19 तारीख़ को ही उनकी जगह आए संजय कुमार सिंह. और संजय कुमार सिंह ने आते ही जांच की सिफ़ारिश करते इस लेटर को वापिस ले लिया. मतलब अभी इस बारे में कोई बात नहीं होगी.
नए पुलिस अधीक्षक ने जारी किया पत्र वापसी का फ़रमानप्रशासनिक हलके का क्या कहना है? बिहार के डीजीपी एके सिंघल की ओर से कोई बयान या सफ़ाई अभी तक नहीं आई है. आती है तो हम ज़रूर बतायेंगे. लेकिन जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा है कि उन्हें इस लेटर के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन राज्य सरकार शराब माफ़ियाओं के खिलाफ़ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है.
तेजस्वी यादव ने यहां पर भी सीधे नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. 20 जनवरी को लिखे अपने ट्वीट में कहा है कि शराब माफ़ियाओं की पहुंच मुख्यमंत्री तक है. तभी तो तबादला कर दिया है.
ये तो नहीं पता कि सरकार या सरकार चलाने वाली पार्टी को इस घटनाक्रम की जानकारी थी या नहीं, लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल हैं. क्या क़ानून व्यवस्था को लागू करने का दावा करती सरकार एक लेटर लिखने वाले पुलिस अधिकारी का ट्रान्स्फ़र कर देती है? और क्या सरकार आलोचना के शमन का रास्ता क़ानून में ढूंढती है? और सरकार के जवाब का इंतज़ार करते हुए मुक्तिबोध की कविता ‘अंधेरे में’ की चंद पंक्तियां पढ़ी जा सकती हैं -पटना के एसपी मद्यनिषेध ने सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को पत्र लिखा कि उत्पाद और पुलिस विभाग के अधिकारी सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर शराब बिक्री करवा रहे है। CM आवास में पहुँच रखने वाले शराब माफ़िया ने CM से अब उस SP का तबादला करवा दिया। यही है नीतीश कुमार का असली चेहरा। pic.twitter.com/25ojeZFOrd
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) January 20, 2021
प्रश्न थे गंभीर, शायद ख़तरनाक भी, इसीलिए बाहर के गुंजान जंगलों से आती हुई हवा ने फ़ूंक मार एकाएक मशाल ही बुझा दी

