'मोदी लोगों को नैपकिन पेपर की तरह यूज कर फेंक देते हैं' - अरुण शौरी
मशहूर पत्रकार और अटल सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी ने नरेंद्र मोदी को कहा ऐसा व्यक्ति जिसने जग में हमारी खिल्ली कराई.

मोदी सरकार बिना शक 'एक आदमी की सरकार' की तरह चल रही है. जैसे राष्ट्रपति शासन हो, यह सरकार बिना किसी चैक एंड बैलेंस वाली सरकार की तरह चल रही है. मोदी की सरपरस्ती में शासन जिस दिशा में जा रहा है वो भारत के लिए अच्छा नहीं.
अटल सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे अरुण शौरी ने इंडिया टुडे टेलिविजन पर करण थापर को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खूब खरी-खोटी सुनाई. मोदी सरकार के शासन की दूसरी वर्षगांठ आ रही है अौर इसी सिलसिले में शौरी ने सरकार की दिशा अौर दशा की खबर लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि मोदी चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. घर-वापसी, लव जिहाद, गौ-मांस, 'भारत माता की जय' जैसे मुद्दे उनके खुद के खड़े किए हुए हैं. "जैसे ही इलेक्शन खत्म होते हैं, 'घर वापसी' अभियान खत्म हो जाता है. जैसे ही पिछले चुनाव खत्म हुए, 'लव जिहाद' खत्म हो गया.. अौर इसे दूसरे लोगों द्वारा जिन्दा रखा जाता है अौर फिर हम बोलते हैं कि प्रधानमंत्री क्यों नहीं बोल रहे?"

शौरी ने 'बीफ़ बैन' जैसे अभियानों को भी घेरे में लिया. उन्होंने कहा कि इनका एक ही लक्ष्य दिखाई पड़ता है अौर वो है लोगों का धर्म के नाम पर धुवीकरण करना. "ये दिखाता है कि इलेक्शन जीतना ही जैसे एकमात्र लक्ष्य है. चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़े." शौरी ने कहा कि 'डिवाइड, विन इलेक्शन, एंड रूल' मोदी सरकार का मोट्टो बन गया है.
प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व को समझाने के लिए शौरी ने बाकायदे राजनीति विज्ञान से एक पारिभाषिक शब्द का इस्तेमाल किया dark triad. ऐसे नेताअों के बारे में बात करते हुए उन्होंने इस पदबंध के गुण गिनाए. तिहरे गुणों को बतानेवाला यह पदबंध तीन विशेषताअों से मिलकर बनता है. इसमें नार्सिसिज्म शामिल है जिसमें इंसान इतना आत्ममोह से ग्रस्त होता है. इतना घनघोर आत्ममोह कि व्यक्ति असुरक्षा में घिर जाता है. जैसे कोई कैसेनोवा, जिसे रोज खुद को स्वयं के विजेता होने का विश्वास दिलाना होता है. यही असुरक्षा इंसान को अपने चारों अोर खुद से कमतर लोगों का घेरा बनाने की वजह बनती है, जिससे उसका आत्ममोह टूटे नहीं. उन्होंने इस विशेषता को मोदी से जोड़कर बताते हुए कहा कि मोदी का लोगों को लेकर एप्रोच 'यूज एंड थ्रो' वाला है. वो उन्हें पेपर नैपकिन्स की तरह इस्तेमाल करते हैं.

दूसरी विशेषता मैकियावेलिज्म है, जिसमें इंसान हर घटना, विचार, परिस्थिति को सामने देखकर यही सोचता है कि इसका मैं क्या इस्तेमाल कर सकता हूं. उत्तराखंड अौर जम्मू अौर कश्मीर में आई बाढ़ की दुर्घटनाअों का उदाहरण देते हुए शौरी ने कहा कि मोदी दुर्घटनाअों का भी अपने प्रोजेक्शन के लिए इस्तेमाल करते हैं.
तीसरा गुण है खुद के किए कामों के परिणाम बुरे निकलने पर भी कभी अफसोस ना करना. नीरज को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तियों को 'सिर्फ अपने गुलदस्ते की रौनक से ही मतलब होता है'.
पाकिस्तान के प्रति मोदी सरकार की विदेश नीति का हवाला देते हुए शौरी ने कहा कि पाकिस्तान के संदर्भ में दरअसल हम खुद को ही बेवकूफ बना रहे हैं. "बांग्लादेश के संदर्भ में हमने ज़रूर कुछ अच्छा काम किया है. लेकिन नेपाल को हमने खुद से दूर कर चीन के नजदीक कर दिया है अौर पाकिस्तान के संदर्भ में तो वी अॉर मेड फूल्स अॉफ अॉरसेल्वस", उनके शब्द थे. सरकार के पाकिस्तान की टीम को भारत बुलाकर जांच करने की इजाज़त देने की उन्होंने कड़ी आलोचना की. "जुल्म करता है दुश्मन अौर हम शर्माए जाते हैं' शौरी ने उस परिस्थिति को समझाने के लिए इस शेर का भी इस्तेमाल किया.
चाइना पॉलिसी को लेकर भी अरुण शौरी ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया. चीन के संदर्भ में पंडित नेहरू द्वारा की गई भूल से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी जी को लगता है कि वो अपने चार्म से चाइनीज सरकार का मन मोह लेंगे, लेकिन ऐसा होगा नहीं. आज चीन कश्मीर में घुस आया है अौर वो दिन दूर नहीं जब वो कश्मीर के मुद्दे को द्विपक्षीय नहीं बल्कि त्रिपक्षीय मुद्दा बताने लगेगा.
आर्थिक प्रगति के बड़े दावों को अौर सरकार की अोर से दिए गए निवेश के सकारात्मक आंकड़ों को भी चुनौती देते हुए अरुण शौरी ने कहा कि हमें यह याद रखना चाहिए कि 'वाइब्रेंट गुजरात' के समय भी निवेश के जितने वादे किए गए थे, असल में उसके सिर्फ आठ प्रतिशत ही पूरे हुए.

बीते दो सालों में सरकार के कामकाज के बारे में पूछे जाने पर शौरी ने कहा कि मोदी सरकार के दो साल ऐसे रहे जिसमें वे हर किसी से बॉक्सिंग मैच खेल रहे थे. उन्होंने बड़ा मौका मिस कर दिया.
अगस्ता वेस्टलैंड पर रक्षामंत्री पर्रिकर के राज्यसभा में दिए 'इनविजिबल हैंड' वाले बयान पर टिप्पणी करते हुए शौरी ने इसे 'खोदा पहाड़ निकला चूहा' वाली कहावत से जोड़ते हुए कहा कि यहां तो जो चूहा निकला वो भी 'इनविजिबल' था. सरकार को पिछले दो साल में जांच का पर्याप्त समय मिला था अौर वर्तमान रक्षामंत्री एक भी नया तथ्य सदन के सामने नहीं रख पाए, उन्होंने कहा.
सरकार के भविष्य पर सवाल के जवाब में शौरी ने कहा कि आगे तीन सालों में मोदी सरकार के राज में नागरिक आज़ादी के अौर व्यवस्थित तरीके से कुचले जाने की आशंका है. असहज करने वाली आवाजों को दबा दिया जाएगा. मैं चिंतित हूं. उन्होंने फ़ैज़ का मशहूर नज़्म कोट की, 'निसार मैं तेरी गलियों के ऐ वतन..'

