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मोदी सरकार 31 अगस्त को बताएगी जम्मू कश्मीर UT से पूर्ण राज्य कैसे बनेगा

SC ने ये भी पूछा, ‘’क्या असम का भी एक हिस्सा अलग कर उसे भी UT घोषित किया जा सकता है?''

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29 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 29 अगस्त 2023, 10:57 PM IST)
center tells supreme court when elections will be held in jammu and kashmir
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जम्मू कश्मीर के राज्य दर्जे और चुनावों पर कोर्ट में 31 अगस्त को बयान दिया जाएगा. (फोटो- आजतक)
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जम्मू कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 12वें दिन सुनवाई हुई. इस दौरान पांच जजों की संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) ने सरकार से पूछा कि जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य कब बनाया जाएगा और वहां चुनाव कब कराए जाएंगे. जवाब में केंद्र की ओर से कहा गया कि Jammu & Kashmir Statehood ज़रूर बहाल किया जाएगा और इस बारे में सरकार 31 अगस्त को कोर्ट में बयान भी देगी.

संविधान पीठ का सवाल - कोई टाइमफ्रेम है?

अनुच्छेद 370 पर लगी याचिकाओं पर केंद्र का पक्ष रखने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए थे. उनसे बेंच ने कई सवाल किए. मसलन -

किस तरह आर्टिकल 367 में संशोधन कर जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा हटाया जा सकता है? 

जब जम्मू कश्मीर की विधानसभा मौजूद नहीं थी, तो सहमति कैसे मिली? 

क्या संसद किसी राज्य को संघ शासित प्रदेश बना सकती है?

सीजेआई ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की. कहा,

‘’हम चाहते हैं कि सरकार इसपर अपना रुख साफ करे. क्या (पुनः राज्य बनाने हेतु) कोई टाइमफ्रेम है? लोकतंत्र की बहाली बेहद अहम है. आप ये बताएं कि इसका रोडमैप क्या होगा?''

सरकार का जवाब - हां, नीयत है 

कोर्ट के इन सवालों पर केंद्र सरकार ने बताया कि लद्दाख तो केंद्र शासित प्रदेश ही बना रहेगा. लेकिन जम्मू कश्मीर के मामले में ऐसा नहीं है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस बाबत सरकार संसद को भी भरोसा दिला चुकी है. मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वो ये स्थापित कर देंगे कि सरकार न सिर्फ पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करेगी, बल्कि चुनाव भी कराए जाएंगे. जम्मू कश्मीर में स्थानीय चुनाव पहले से ही हो रहे हैं. सितंबर में लद्दाख और कारगिल में भी स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं.

दलीलों के बीच जस्टिस कौल ने एक दिलचस्प सवाल किया. उन्होंने एक हाइपोथीसिस सरकार के सामने रखते हुए सवाल किया, 

‘’क्या असम का भी एक हिस्सा अलग कर उसे भी UT घोषित किया जा सकता है?''

जवाब में मेहता ने कहा कि ये उदाहरण ठीक नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत सूबों को UT नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि इसके लिए सीमाओं में परिवर्तन करना होता है.

370 हटने से मनोवैज्ञानिक असमानता दूर हुई

जम्मू कश्मीर की विधानसभा न होने पर तुषार मेहता ने कहा, क्योंकि विधानसभा नहीं थी तो राज्यपाल से सहमति ली गई. जम्मू कश्मीर के लोग अब देश के किसी भी अन्य नागरिक की तरह ही अधिकारों का लाभ ले रहे हें. आर्टिकल 370 का प्रावधान जम्मू कश्मीर को भारत के साथ ‘उचित एकीकरण’ की अनुमति नहीं देता था.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आगे बताया कि आर्टिकल 370 का प्रावधान हटने से मनोवैज्ञानिक असमानता दूर हो गई है. एकता लाने के लिए किसी भी कदम का स्वागत किया जाना चाहिए. ये संशोधन संसद के माध्यम से व्यक्त की गई लोगों की इच्छा है. ये भी एक संकेत है कि संविधान निर्माता इसे स्थायी बनाने का इरादा नहीं रखते थे.

‘’सीमावर्ती राज्य है, ये तर्क सब जगह नहीं चलेगा''

कोर्ट ने सवाल किया कि आखिर संसद को राज्य के हिस्से करने और अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने का अधिकार किस कानूनी स्त्रोत से मिला? आप सिर्फ इस तर्क के आधार पर ये सब नहीं कर सकते कि जम्मू कश्मीर एक बॉर्डर राज्य है. 

इस पर मेहता ने आर्टिकल 3 के हवाले से बताया कि संसद को किसी राज्य की सीमा तय करने और केंद्र शासित प्रदेश बनाने का अधिकार है. जिस पर CJI ने सवाल किया कि आपने एक ही केंद्र शासित प्रदेश क्यों नहीं बनाया? जम्मू कश्मीर और लद्दाख - दो UT क्यों बनाए?

इस पर तुषार मेहता ने बताया कि पहले (इलाका) अलग करना अनिवार्य और आवश्यक है. त्रिपुरा को भी पहले असम से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश नहीं घोषित किया जा सकता.

(ये भी पढ़ें: 'जम्मू कश्मीर में 35A ने छीने भारतीयों के 3 बड़े अधिकार', धारा 370 पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बात बोल दी

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