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AMUL Vs नंदिनी, कर्नाटक में दूध पर इतना हंगामा क्यों? एक क्लिक में समझिए पूरा मामला

अमूल और नंदिनी ब्रांड के बीच का पूरा मसला क्या है?

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Amul vs Nandini in Karnataka
कर्नाटक में अमूल पर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी हो गई है (फोटो- पीटीआई)
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साकेत आनंद
9 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 10 अप्रैल 2023, 10:45 AM IST)
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कुछ दिन पहले कर्नाटक और तमिलनाडु में दही को लेकर विवाद छिड़ा था. मामला दही के पैकेट पर हिंदी में 'दही' लिखे जाने का था. दोनों राज्यों में भारी विरोध के बाद फैसला वापस ले लिया गया. अब कर्नाटक में अमूल को लेकर पिछले चार दिनों से घमासान मचा है. दरअसल, अूमल ने कुछ दिन पहले कर्नाटक में एंट्री की घोषणा की थी. इसके बाद से ही कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियां सरकार पर आरोप लगा रही हैं कि यह राज्य के नंदिनी ब्रांड को खत्म करने की कोशिश है. सिर्फ विपक्षी पार्टी ही नहीं, कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने भी इसका विरोध किया है. आपको एक-एक कर पूरा मामला समझाते हैं.

कहां से शुरू हुआ विवाद?

अमूल ने 5 अप्रैल को ट्वीट कर कर्नाटक में अपने प्लान की घोषणा की थी. ट्वीट में लिखा था कि अमूल परिवार बेंगलुरु शहर में कुछ ताजा ला रहा है. एक और ट्वीट में अमूल ने लिखा था, 

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अमूल की इस घोषणा के बाद ही ट्विटर पर कर्नाटक के लोगों ने बहिष्कार करना शुरू कर दिया. सोशल मीडिया पर कई लोग ये भी कह रहे हैं कि अमूल के आने से दूध का दाम बढ़ जाएगा. कर्नाटक में नंदिनी के एक लीटर टोन्ड दूध का दाम 39 रुपये है. वहीं, अमूल का टोन्ड दूध 54 रुपये प्रति लीटर बिकता है.

अमूल गुजरात की मिल्क कोऑपरेटिव है. इसके प्रोडक्ट गुजरात के बाहर कई राज्यों में बिकते हैं. अमूल की तरह ही नंदिनी कर्नाटक में सबसे बड़ी मिल्क कोऑपरेटिव है. कर्नाटक में जो विवाद शुरू हुआ है इसको समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा.

30 दिसंबर 2022 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर्नाटक के मंड्या में थे. शाह देश के पहले सहकारिता मंत्री भी हैं. तब मंड्या में उन्होंने 260 करोड़ रुपये की लागत से बनी एक मेगा डेयरी का उद्घाटन किया था. इसी दिन अमित शाह ने कहा था कि अमूल और नंदिनी मिलकर कर्नाटक के हर गांव में प्राइमरी डेयरी स्थापित करने के लिए काम करेंगे. इससे 3 साल में कर्नाटक में एक भी ऐसा गांव नहीं होगा जहां प्राइमरी डेयरी नहीं होगी.

शाह के इस बयान का उस वक्त भी विरोध हुआ था. ट्विटर पर कई लोगों ने लिखा था कि वे नंदिनी से ही खुश हैं. तब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्दारमैया ने आरोप लगाया था कि अमित शाह ने साफ-साफ दिखा दिया है कि गुजरात के कॉरपोरेट्स की नजर कर्नाटक के डेयरी सेक्टर पर है. पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी कहा था कि यह कन्नड़ लोगों को गुजरात का गुलाम बनाने की कोशिश है. इसके अलावा किसान संगठनों ने भी शाह के बयान का विरोध किया था.

अब सरकार पर क्या आरोप लग रहा?

अब अमूल ने राज्य में एंट्री की घोषणा की तो विपक्षी दल सरकार पर लगातार हमलावर है. जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने 8 अप्रैल को इस मुद्दे पर एक लंबा ट्विटर थ्रेड लिखा. ये ट्वीट कन्नड़ भाषा में है. इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि यह नंदिनी ब्रांड को खत्म करने की तीसरी साजिश है. उन्होंने ट्वीट में लिखा, 

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कुमारस्वामी ने कहा कि कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने गुजरात में कभी दूध नहीं बेचा और सहकारिता के सिद्धांत का सम्मान किया. लेकिन अमूल इसके उलट काम कर रही है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, यह साफ है कि अमूल कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के साथ अनावश्यक तरीके से कॉम्पिटिशन कर रही है और हर दिन नंदिनी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है.

वहीं कांग्रेस नेता सिद्दारमैया ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग कर लिखा कि वे नंदिनी को कर्नाटक के लोगों से छीनने की कोशिश कर रहे हैं. नरेंद्र मोदी फिलहाल कर्नाटक दौर पर ही हैं. सिद्दारमैया ने ट्वीट किया, 

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सिद्दारमैया ने आगे लिखा कि हमारे विजया बैंक को गुजरात के बड़ौदा बैंक (बैंक ऑफ बड़ौदा) के साथ मिला दिया गया. पोर्ट और एयरपोर्ट को गुजरात के अडानी (गौतम अडानी) को सौंप दिया. अब, गुजरात का अमूल हमारे कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (नंदिनी) को खत्म करने की योजना बना रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री को टैग करते हुए पूछा कि क्या वे (कर्नाटकवासी) गुजरातियों के दुश्मन हैं.

होटल एसोसिएशन ने भी बहिष्कार किया

इस विवाद के बीच बेंगलुरु के होटल एसोसिएशन ने भी अमूल के बहिष्कार की घोषणा कर दी. एसोसिएशन ने बेंगलुरु के होटलों से कहा है कि वे सिर्फ स्थानीय नंदिनी ब्रांड के दूध और दही को खरीदें. साथ ही होटलों से अपील की गई है कि वे अमूल के किसी भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दें. होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष पीसी राव ने सभी होटलों को निर्देश दिया है कि वे राज्य के डेयरी किसानों और नंदिनी के समर्थन के लिए कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें.

सरकार ने क्या सफाई दी?

विपक्ष के आरोपों पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने भी जवाब दिया है. बोम्मई ने विपक्षी पार्टियों पर आरोप लगाया कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है. सीएम बोम्मई 8 अप्रैल को दिल्ली में थे. उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा, 

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विवाद के बीच कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने भी 8 अप्रैल को एक बयान जारी किया. KMF ने नंदिनी का किसी दूसरे कोऑपरेटिव सोसायटी के साथ मर्जर के अफवाहों को खारिज कर दिया. KMF के मुताबिक, नंदिनी ब्रांड लगातार अपना विस्तार कर रहा है. हाल के सालों में नंदिनी के प्रोडक्ट्स मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, केरल और गोवा तक पहुंचे हैं. इस बयान में बेंगलुरु में अमूल के दूध और दही बेचे जाने के फैसले को लेकर कुछ नहीं कहा गया.

हालांकि फेडरेशन के अधिकारी अमूल के इस फैसले से नाराज हैं. वे इसके खिलाफ राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) को लिखने वाले हैं. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, फेडरेशन के एक अधिकारी ने बताया कि KMF जल्द ही NDDB को पत्र लिखकर अनुरोध करेगा कि अमूल को बेंगलुरु मार्केट में ना आने दिया जाए. उनके मुताबिक, कर्नाटक में नंदिनी मार्केट डिमांड को पूरा कर रही है.

कर्नाटक मिल्क फेडरेशन की स्थापना 1974 में हुई थी. साल 1975 में इसका सालाना टर्नओवर 4 करोड़ रुपये था. सरकार के मुताबिक, फेडरेशन का टर्नओवर अभी करीब 25 हजार करोड़ का है. अमूल के बाद यह देश की दूसरी सबसे बड़ी मिल्क कोऑपरेटिव है. नंदिनी का मैनेजमेंट भी फेडरेशन ही करता है.

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