लोकसभा में अमित शाह- 'अविश्वास प्रस्ताव भ्रांति के लिए, PM मोदी के फैसले युगों तक याद रहेंगे'
भाषण के दौरान अमित शाह ने अतीत में लाए गए 3 अविश्वास प्रस्तावों का जिक्र कर क्या कहा?

संसद में 9 अगस्त के दिन भी अविश्वास प्रस्ताव पर बहस जारी रही. इस दौरान राहुल गांधी ने मणिपुर के मुद्दे पर पीएम मोदी पर निशाना साधा. राहुल बोले, “पीएम मणिपुर नहीं गए. क्योंकि उनके लिए मणिपुर भारत में नहीं है.” बाद में गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि जनता को पीएम मोदी और सरकार पर अविश्वास नहीं है. ये जनता की इच्छाओं का प्रतिबिंब है.
अमित शाह ने कहा,
"अब तक कुल 27 अविश्वास प्रस्ताव सदन में पेश किए गए हैं. जनता को सरकार और पीएम पर भरोसा है. ये सिर्फ भ्रांति खड़ी करने के लिए लाया गया है… विपक्ष इस प्रस्ताव से सिर्फ भ्रम फैलाना चाहती है. दो तिहाई बहुमत से दो बार NDA को चुना गया. सरकार अल्पमत में होने का मतलब ही नहीं है."
शाह ने ये भी कहा,
राजनीति के ‘तीन नासूर’“30 साल में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनी. आजादी के बाद देश में सबसे लोकप्रिय पीएम नरेंद्र मोदी हैं. पीएम मोदी ने बिना छुट्टी लिए काम किया. 24 घंटों में से 17-17 घंटे काम किया. पिछले 9 साल में पीएम ने 50 से ज्यादा फैसले लिए जो युगों तक याद रखे जाएंगे.”
गृह मंत्री ने विपक्ष पर हमला जारी रखते हुए आगे कहा कि भारतीय राजनीति को तीन नासूर- भ्रष्टाचार, परिवारवाद, तुष्टिकरण ने घेर लिया था. पीएम मोदी ने इसे दूर किया. उन्होंने नारा दिया ‘भ्रष्टाचार क्विट इंडिया’. परिवारवाद क्विट इंडिया. तुष्टिकरण क्विट इंडिया.
अविश्वास प्रस्तावों का ज़िक्र कियाशाह ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव से गठबंधन के चेहरे उजागर होते हैं. वो बोले,
"तीन का ज़िक्र करूंगा. दो यूपीए सरकार के खिलाफ थे. एक NDA की सरकार के खिलाफ. उन्होंने बताया 1993 में नरसिम्हा सरकार थी. उसके खिलाफ प्रस्ताव आया. सरकार को किसी भी तरह सत्ता में बने रहना था. सरकार की अविश्वास प्रस्ताव पर जीत हुई. बाद में कई लोगों को जेल की सजा भी हुई. इसमें पीएम नरसिम्हा राव भी शामिल थे. क्योंकि झारखंड मुक्ति मोर्चा को घूस देकर प्रस्ताव पर विजय प्राप्त की गई थी. आज कांग्रेस और मुक्ति मोर्चा भी वहीं है…
साल 2008 में मनमोहन सरकार प्रस्ताव लेकर आई. ऐसा वातावरण था कि इनके पास बहुमत नहीं है. बहुमत था भी नहीं. उस वक्त सबसे कलंकित घटना देखी गई. सांसदों को करोड़ों रुपये की घूस दी गई. कुछ सांसद सदन के सामने आए और संरक्षण मांगा. हालांकि, तब सरकार को बचा लिया गया था."
तीसरे उदाहरण का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा,
नीतीश कुमार पर हमला"1999 में अटल जी की सरकार थी. अविश्वास प्रस्ताव आया. कांग्रेस ने जो किया वो हम भी कर सकते थे. घूस देकर सरकार बचा सकते थे. लेकिन हमने ऐसा नहीं किया… अटल जी ने अपनी बात रखी और कहा कि संसद का जो फैसला था वो माना जाएगा. सिर्फ एक वोट से सरकार गिर गई. UPA की तरह हम सरकार नहीं बचा सकते थे क्या? बचा सकते थे, लेकिन कई बार प्रस्ताव के वक्त चरित्र उजागर होता है. कांग्रेस का चरित्र भ्रष्टाचार का है. वहीं बीजेपी का चरित्र सिद्धांत के लिए राजनीति करने वाला है."
अमित शाह ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर भी हमला बोला. कहा,
"जब केंद्र सरकार जन धन योजना के तहत बैंक अकाउंट खोलने की योजना लेकर आई तो नीतीश कुमार ने इसका मजाक उड़ाया. कहा कि अकाउंट तो खोल दिया, अंदर क्या डालेंगे? बोहनी तो कराओ… हमने 49 करोड़ बैंक खाते खोले जिनमें 2 लाख करोड़ गरीबों के पैसे जमा हैं. केंद्र-राज्य सरकार की 300 से ज्यादा योजनाओं का पैसा सीधे इन खातों में जाता है."
इसके अलावा अमित शाह ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों का जिक्र किया. उन्होंने रोड से लेकर रेल. स्वास्थ्य से लेकर रोजगार. कोरोना काल में किए गए कार्य और गरीबों की मदद करने वाली योजनाओं के बारे में भी बताया.
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