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कांग्रेस ने सालों सरकारी बसों का करोड़ों का बिल नहीं भरा, कोर्ट ने अब हिसाब बराबर कर दिया

कोर्ट ने पाया कि 1981-89 के बीच कांग्रेस ने राजनैतिक उद्देश्यों के लिए यूपी परिवहन निगम की बसें इस्तेमाल कीं, लेकिन बिल नहीं चुकाया.

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10 अक्तूबर 2023 (अपडेटेड: 10 अक्तूबर 2023, 01:09 AM IST)
allahabad high court uttar pradesh congress committee
उत्तर प्रदेश कांग्रेस को सूबे की सरकारी बसों और टैक्सियों के इस्तेमाल के लिए पूरे 2 करोड़ 66 लाख रुपए का बिल भरने का हुक्म दिया गया है. (फ़ोटो-सांकेतिक/आजतक)
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नेताओं की रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए सरकारी बसों का इस्तेमाल आम यात्रियों को कितना महंगा पड़ता है, ये आप जानते ही हैं. लेकिन नेताओं या पार्टियों का तो कुछ नहीं जाता. 5 अक्टूबर 2023 को ये बात बदल गई. क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस को सूबे की सरकारी बसों और टैक्सियों के इस्तेमाल के लिए पूरे 2 करोड़ 66 लाख रुपए का बिल भरने का हुक्म दिया है. वो भी 5 फीसदी ब्याज मिलाकर.

इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए बसें लगी थीं

लाइव लॉ पर छपी स्पर्श उपाध्याय की रिपोर्ट के मुताबिक ये बसें और टैक्सियां 1981-89 के बीच इस्तेमाल हुईं जब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी. इस रिपोर्ट में एक दिलचस्प किस्सा भी दर्ज है. जो बिल कांग्रेस को थमाए गए, उनमें से एक 1984 का था. इसी साल प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी. उनकी अस्थियों को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे. इन लोगों को लाने-ले जाने के लिए यूपी कांग्रेस को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम  UPSRTC की बसें/टैक्सियां मिली थीं. ऐसे ही कई कार्यक्रमों में बसें इस्तेमाल हुईं लेकिन बिल नहीं भरे गए. सरकारें बदलती रहीं.

सितंबर 1997 में मायावती की सरकार गिर गई और कल्याण सिंह सीएम बने. लॉ बीट पर छपी खबर के मुताबिक, यूपी परिवहन निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर की सिफारिश पर 10 नवंबर 1998 को लखनऊ (सदर) के तहसीलदार ने बकाया रकम की वसूली के लिए यूपी कांग्रेस को रिकवरी नोटिस जारी कर दिया. इसके बाद यूपी कांग्रेस ने U.P. Public Moneys (Recovery of Dues) Act, 1972 के तहत जारी इस नोटिस को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दे दी. 1998 में ही रिकवरी पर स्टे मिल गया, और तब से मामला लंबित था.

कांग्रेस ने क्या दलील दी?

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने शुरुआत में सुलह की कुछ कोशिश की. लेकिन फिर पार्टी का स्टैंड बदला और पार्टी ने दलील दी कि U.P. Public Moneys (Recovery of Dues) Act, 1972 की धारा 3 के तहत उससे वसूली नहीं की जा सकती.
- कांग्रेस की दूसरी मुख्य दलील थी कि चूंकि बसें मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्री/सचिव के निर्देश पर मुहैया कराई गईं, इसीलिए निगम द्वारा जारी बिलों की भरपाई उत्तर प्रदेश शासन को करनी चाहिए.
- कांग्रेस की तीसरी दलील थी कि चूंकि सूबे में सरकार बदल गई, तो अब उसके खिलाफ रिकवरी की कार्रवाई बदले की भावना (पॉलिटिकल वेंडेटा) से की जा रही है.

परिवहन निगम ने क्या दलील दी?

UPSRTC ने अदालत में दलील दी थी कि बसें/टैक्सियां तब के मुख्यमंत्रियों और संबंधित मंत्रियों के कहने पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुहैया कराई गईं. सीएम और मंत्री कांग्रेस के ही थे और पार्टी को बार-बार बिल दिए गए, जिन्हें चुकाना पार्टी की ज़िम्मेदारी थी.

कोर्ट ने क्या कहा?

5 अक्टूबर के रोज़ जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनीष कुमार की बेंच ने इस मामले में अपना फैसला सुना दिया. कहा कि UPCC ने अपने प्रभाव का इस्तोमाल करते हुए पब्लिक प्रॉपर्टी को राजनैतिक मकसद के लिए इस्तेमाल किया. UPSRTC ने विधिवत बिल दिए लेकिन यूपी कांग्रेस कमेटी ने इनका भुगतान नहीं किया. बेंच ने कांग्रेस के इस तर्क को भी ख़ारिज कर दिया कि रिकवरी का नोटिस राजनीति से प्रेरित है. कोर्ट ने कहा,

“ UPSRTC पब्लिक के पैसे पर चल रही है और बड़े पैमाने पर पब्लिक को सर्विस देती है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह एक सरकारी निगम है और पूरी तरह से राज्य सरकार के कंट्रोल में है. यह मुख्यमंत्री या संबंधित मंत्री के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है. इसलिए  UPSRTC बस या टैक्सी देने से इनकार नहीं कर सकता था. भले ही राशि 1972 के एक्ट के प्रावधानों के तहत रिकवरी योग्य नहीं है, लेकिन 25 सालों से  भुगतान नहीं किया गया है, इसलिए पार्टी को पूरी बकाया रकम का भुगतान करना होगा.”

न्यायालय के आदेश के बाद यूपी कांग्रेस को  2 करोड़ 68 लाख 29 हज़ार 879. रुपये 78 पैसे 5 फीसदी ब्याज के साथ UPSRTC को चुकाने है. इसके लिए पार्टी के पास 3 महीने हैं.

इस स्टोरी को कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया आने पर अपडेट किया जाएगा.

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