24 मई मई 1819 को ब्रिटेन की महारानी का जन्म हुआ था. शर्बानी बसु की किताब आई थीलगभग 6-7 साल पहले. नाम था ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल: द ट्रू स्टोरी ऑफ क्वीन्सक्लोजेस्ट कांफिडेन्ट’. इस पर फिल्म बनने की खबर भी आपने सुनी ही होगी. 22 सितंबर2017 इस फिल्म की रिलीज डेट है. फिल्म में जेम्स बांड वाली 'एम' माने जूडी डेंचइसमें महारानी विक्टोरिया हुईं और अपना लड़का अली फज़ल, जो फास्ट एंड फ्यूरियस में भीआया था. वो अब्दुल बनेगा. स्टीफन फ्रेयर्स निर्देशन करेंगे ली हाल के पास पटकथा काझोला है.Source-amazonपर ये अब्दुल उर्फ मुंशी है कौन? और काहे इस पर पिच्चर बन रही है, काहे ये इत्ताफेमस है?दरअसल मुंशी का असली नाम हाफिज मोहम्मद अब्दुल करीम था. वो झांसी पास ललितपुर मेंपैदा हुआ था. तब इंडिया में अंग्रेज थे. साल 1863 था. जब अब्दुल 24 का हुआ तो उसकीकिस्मत खुल गई. इंडिया की तरफ से दो नौकरों को महारानी को गिफ्ट में दिया गया.उनमें से एक अब्दुल था. 1887 का साल था. मौक़ा था विक्टोरिया के ब्याह के 50 सालहोने का. आगरा के कलेक्टर ने खुद इंटरव्यू लेने के बाद उसे विदेश भेजा था.बाद में वहां जाकर अब्दुल विक्टोरिया का चहेता बन गया. नाम मिला मुंशी. एक साल केअंदर ही वो महारानी को उर्दू और हिन्दी सिखाने लगा. इंडिया वाले मसलों में राय देनेलगा. महारानी ने उसको इंडिया सेक्रेटरी बना दिया. इंडिया में जगह-जमीन दी. जहांजातीं उसको साथ में ले जातीं.heritage-explorerकुछ लोग उससे चिढ़ते भी थे. कहते हैं महारानी उसको चिट्ठी लिखती तो लास्ट में चुम्मीभी बनाती थी. हालांकि कुछ चिट्ठियों में महारानी ने 'तुम्हारी मां' और 'तुम्हारीसबसे खास दोस्त' भी लिखा है, लेकिन उसको लोग हलके में बताते हैं. उसमें इतना रसनहीं आता न. फिर इसका दूसरा वर्जन भी है, प्रिंस अल्बर्ट, रानी के पति जब मरे तबरानी ने उनको अपना पति, करीबी दोस्त मां और पिता बताया था. कहने वाले कहते हैं, ऐसाही गहरा रिश्ता उनका मुंशी के साथ भी था.अल्बर्ट, महारानी और नौ बच्चे source- marefaकुछ उसको महारानी का लास्ट लव कहते हैं. विक्टोरिया तो उसको नाइट की उपाधि भी देनेवालीं थीं. पर बीच में कोई पेंच अड़ा दिया. दे नहीं पाई. जॉन ब्राउन करके एक बंदाथा. स्कॉटिश था. 1861 में प्रिंस अल्बर्ट जब मरे तब से खूब खास था विक्टोरिया का.लेकिन मुंशी उससे भी खास निकल गया. महलों में जैसे चोंचले होते हैं, दरबार औरराजपरिवार वाले मुंशी से खूब किलसते थे. लेकिन रानी के डर से कुछ कबार नहीं सकते थेउसका.जब 1901 में महारानी की मौत हुई तब मुंशी के बुरे दिन शुरू हुए. एडवर्ड सप्तम नेनौकरी से निकाल दिया. उनके सारे कागज और चिट्ठियां जो महारानी के साथ संदेश वगैरहथे, सब नष्ट करा दिए. वो वापस आगरा लौट आए. आगरा आने के बाद अब्दुल करीम, बागफरजाना में उनको मिली जमीन पर लॉज बनाकर रहने लगे. 20 अप्रैल 1909 को वहीं चल बसे.46 बरस की उम्र थी तब सिर्फ. पचकुइया कब्रिस्तान में दफना दिए गए.मरने के बाद ब्रिटिश सरकार ने पचकुइंयां कब्रिस्तान में उनका मकबरा बना दिया गया.यहां उनकी कब्र पर ब्रिटिश सरकार ने षटकोणीय छतरी भी बनवा दी थी. अब भी वहां सालानाउर्स लगता है. आसपास के लोग आया करते हैं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें कैसे मरे दुनिया के महान लोगचोरी हुई साइकल ने बना दिया अली को सदी का सबसे महान बॉक्सर