चम्पाई सोरेन ने JMM से इस्तीफा दिया, शिबू सोरेन से क्या शिकायत की?
चम्पाई ने बताया कि झामुमो उनके लिए एक परिवार जैसा रहा और उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें इसे छोड़ना पड़ेगा.

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन (Champai Soren) ने आधिकारिक तौर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से इस्तीफा दे दिया है. सोरेन ने अपने इस्तीफे में बताया कि उन्होंने झामुमो की वर्तमान कार्यशैली और नीतियों से परेशान होकर ये फैसला लिया है. इससे पहले, 27 अगस्त को चम्पाई ने भाजपा से जुड़ने का एलान किया था.
28 अगस्त को चम्पाई सोरेन ने अपना इस्तीफा सोशल मीडिया पर जारी किया. उन्होंने JMM अध्यक्ष शिबू सोरेन को संबोधित करते हुए लिखा है,
“मैं JMM की वर्तमान कार्यशैली और नीतियों से विक्षुब्ध होकर पार्टी छोड़ने को विवश हूं. पार्टी में जिस मार्गदर्शन का सपना हम जैसे कार्यकर्ताओं ने देखा था, जिसके लिए हम लोगों ने जंगलों, पहाड़ों और गांवों की खाक छानी थी, आज पार्टी अपनी उस दिशा से भटक चुकी है.”
चम्पाई ने आगे लिखा,
“झामुमो मेरे लिए एक परिवार जैसा रहा और मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे इसे छोड़ना पड़ेगा. लेकिन पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम की वजह से मुझे बहुत पीड़ा के साथ ये कठिन निर्णय लेना पड़ा रहा है.”
पार्टी अध्यक्ष शिबू सोरेन के बारे में उन्होंने लिखा है,
“आपके वर्तमान स्वास्थ्य की वजह से आप सक्रिय राजनीति से दूर हैं. आपके अलावा पार्टी में ऐसा कोई फोरम नहीं है, जहां हम अपने मन की पीड़ा को बता सकें. इस वजह से मैं झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं.”
चम्पाई ने आगे ये भी लिखा,
भाजपा जाने का फैसला किया“आपके मार्गदर्शन में झारखंड आंदोलन के दौरान तथा उसके बाद भी मुझे जीवन में बहुत कुछ सीखने का अवसर प्राप्त हुआ है. आप सदा मेरे मार्गदर्शक बने रहेंगे.”
इससे पहले, 27 अगस्त को चम्पाई सोरेन ने बताया था कि वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले हैं. उन्होंने एक X पोस्ट में झारखंड में हो रहे कथित घुसपैठ का जिक्र किया था. लिखा कि पाकुड़, राजमहल समेत कई अन्य क्षेत्रों में उनकी संख्या आदिवासियों से ज्यादा हो गई है. उन्होंने लिखा था,
“इस मुद्दे पर सिर्फ भाजपा ही गंभीर दिखती है और बाकी पार्टियां वोटों की खातिर इसे नजरअंदाज कर रही है. इसलिए आदिवासी अस्मिता एवं अस्तित्व को बचाने के इस संघर्ष में, मैने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में आस्था जताते हुए भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने का फैसला लिया है.”
चम्पाई ने कहा था कि राजनीति से इतर, इस मुद्दे को एक सामाजिक आंदोलन बनाना होगा, तभी आदिवासियों का अस्तित्व बच पाएगा.
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