17 साल पहले जिस बच्चे को अगवा किया था, उसने वकील बनकर 8 किडनैपर्स को उम्रकैद करा दी
हर्ष बताते हैं कि मुकदमे में उन्हें नियमित रूप से उपस्थित रहना होता था. अदालत में बार-बार पेश होने के दौरान उन्हें वकील बनने की प्रेरणा मिली. 2022 में उन्होंने आगरा स्थित एक लॉ कॉलेज से डिग्री ली. फिर अपने केस की अंतिम सुनवाई का जिम्मा खुद ही संभाल लिया.
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उत्तर प्रदेश के आगरा में डेढ़ दशक पहले एक बच्चे का अपहरण हुआ था. तब किडनैपर्स ने कल्पना तक नहीं की होगी कि ये बच्चा वकील बन कर उन्हें इस अपराध की सजा दिलवाएगा. हर्ष गर्ग तब केवल सात साल के थे. अब 24 के हो गए हैं. 17 साल पहले हुए अपहरण का बदला उन्होंने कानूनी तरीके से लिया. अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई में ऐसी दलीलें दीं कि 14 अपराधियों में से आठ को ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.
दुकान से अपहरण, 55 लाख की फिरौती10 फरवरी, 2007 का दिन. आगरा से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित खैरागढ़ का इलाका. यहां के रहने वाले हर्ष गर्ग अपने पिता और चाचा के साथ उनकी मेडिकल शॉप पर बैठे थे. शाम करीब सात बजे डकैतों का एक गिरोह दुकान में घुसा और हर्ष को पकड़ लिया. बच्चे के पिता ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन डकैतों ने उनके कंधे पर गोली मार दी. हर्ष को कार में बिठाने से पहले डकैतों ने पीड़ित पिता और चाचा से कहा कि उसकी रिहाई के लिए पैसा इकट्ठा कर लें.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक किडनैपिंग के अगले दिन आरोपियों ने उनके परिवार को 55 लाख रुपये की फिरौती के लिए कॉल किया था. हर्ष ने अखबार को बताया कि किडनैपर्स उन्हें चंबल के बीहड़ों में ले गए थे. उन्होंने कहा,
हर्ष को छोड़कर भागे आरोपी"डकैत मुझे मध्यप्रदेश ले जाने से पहले सीमाई इलाकों में ले गए. वे रात में निकलते थे और दिन में किसी घर के अंदर रहते थे. कुछ की पत्नियां भी हमारे साथ यात्रा करती थीं. नए ठिकाने तक पहुंचने के लिए रोजाना लगभग 5 किलोमीटर पैदल चलते थे. तीन हफ्तों के दौरान मैंने गिरोह के हर सदस्य के नाम और उनके दूसरे नाम (कोडनेम) जान लिए थे. उन्होंने मुझे सिर्फ एक बार थप्पड़ मारा था, वो भी तब जब मैंने उनसे घर भेजे जाने की बात कही थी.”
गोली लगने के बाद हर्ष के पिता को अस्पताल ले जाया गया. इस दौरान उनके चाचा ने मामले की डिटेल्स पुलिस से साझा कीं. सूचना मिलते ही पुलिस ने किडनैपर्स को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया. इस बीच उसे एक खुफिया सूचना मिली. पता चला कि डकैत मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में छिपे हुए हैं. पुलिस ने अपना तलाशी अभियान तेज कर दिया.
उधर डकैत बच्चे को शिवपुरी से कहीं और ले जाने की कोशिश में थे. 6 मार्च, 2007 को वे मोटरसाइकिल से बच्चे को लेकर निकले. उनका ये कदम बच्चे के लिए फायदेमंद साबित हुआ. रास्ते में आरोपियों ने चेक पोस्ट पर पुलिस टीम को देखा. गिरफ्तारी के डर से उन्होंने हर्ष को सड़क पर छोड़ दिया और भाग निकले. पुलिस ने हर्ष को रेस्क्यू कर लिया. 7 मार्च, 2007 को वो अपने परिवार के पास पहुंच गए.
बाद में अपरहरण का मामला कोर्ट में चलता रहा. 2008 तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. मामले को लेकर हर्ष ने बताया,
2022 में लॉ की पढ़ाई पूरी की"मेरे रेस्क्यू के बाद मैंने पुलिस को जो भी जानकारी दी थी उसके आधार पर कुछ डकैत पकड़े गए थे. डकैतों में से एक की पत्नी प्रेग्नेंट थी, तो पुलिस ने अस्पताल में जाल बिछाया. जब वो अपनी पत्नी को प्रसव के लिए अस्पताल लाया तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया."
हर्ष बताते हैं कि मुकदमे में उन्हें नियमित रूप से उपस्थित रहना होता था. अदालत में बार-बार पेश होने के दौरान उन्हें वकील बनने की प्रेरणा मिली. 2022 में उन्होंने आगरा स्थित एक लॉ कॉलेज से डिग्री ली. फिर अपने केस की अंतिम सुनवाई का जिम्मा खुद ही संभाल लिया. बीती 17 सितंबर को हर्ष ने अपने अपहरण मामले में करीब एक घंटे तक अंतिम दलीलें पेश कीं. हर्ष कहते हैं,
"कोर्ट की अनुमति से मैंने मामले के अंतिम चरण में 55 मिनट तक बहस की और बचाव पक्ष के वकील की आपत्तियों का जवाब भी दिया."
हर्ष कहते हैं कि 2022 में लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने अपने अपहरण मामले पर बारीकी से नज़र रखना शुरू कर दिया था. उन्होंने कहा,
"मैं हर सुनवाई में मौजूद रहा. मामले में सरकारी वकील की सहायता करना भी शुरू कर दिया. कुछ गवाहों का पता लगाने के लिए दूसरे राज्यों की यात्रा भी की. मैंने सुनिश्चित किया कि सभी गवाह अपनी निर्धारित तिथियों पर उपस्थित हों. मैंने रिटायर्ड पुलिस कर्मियों का भी पता लगाया और सुनिश्चित किया कि वो अपना बयान देने के लिए कोर्ट में उपस्थित हों."
हर्ष कहते हैं कि अंतिम सुनवाई के दौरान जब उन्होंने अपनी दलील पेश की तो स्पष्ट कर दिया कि ये मामला फिरौती के लिए अपहरण का सीधा मामला है. उन्होंने कहा,
दो आरोपियों की मौत“मैंने अपहरण की फर्स्ड हैंड डिटेल्स दीं जिनमें हर डकैत की विस्तृत भूमिकाओं का जिक्र था."
मामले की बात करें तो अदालत ने आठ डकैतों को IPC की धारा 364 A (फिरौती के लिए अपहरण), 307 (हत्या का प्रयास) और 368 (गलत तरीके से बंधक बनाना) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. आठों दोषियों में से ज्यादातर राजस्थान के हैं. अदालत ने कहा कि चार अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया. जबकि दो अन्य आरोपियों की सुनवाई की अवधि के दौरान मौत हो गई.
वहीं मामले को लेकर बचाव पक्ष के वकील तेजेंद्र राजपूत ने कहा है कि वो कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर करेंगे.
वीडियो: कोटा पढ़ने गई लड़की ने खुद का अपहरण क्यों करवा लिया?

