पुलिस ने आफ़ताब को फोन किया तो आफ़ताब ने सबसे पहले क्या काम किया?
आफ़ताब से पुलिस की पहली पूछताछ का राज खुला!
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श्रद्धा वॉल्कर मर्डर केस (Shraddha Walker Murder Case) के आरोपी आफताब पूनावाला से दिल्ली पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है. दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार आफताब ने श्रद्धा के मोबाइल फोन का सिम कार्ड मई में ही नष्ट कर दिया था. सिम को नष्ट करने के बाद आफताब वो फोन अपने पास ही रखता था.
समुद्र में फेंक दिया श्रद्धा का मोबाइलआज तक के अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि श्रद्धा के फोन को आफताब वाईफाई से कनेक्ट करके चलाता था. वो श्रद्धा के दोस्तों से चैट्स करता था. आफताब ये इसलिए भी करता था ताकि किसी को शक न हो. मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस मुंबई के वसई पहुंची है. पुलिस सूत्रों ने बताया कि 12 अक्टूबर को श्रद्धा के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने 20 अक्टूबर के दिन आफताब को कॉल किया था.
मानिकपुर पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर आफताब चौकन्ना हो गया था. पूछताछ पर जाने से पहले आफताब ने श्रद्धा को मोबाइल फोन को वसई स्थित क्रीक में फेंक दिया था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 20 से 23 अक्टूबर के बीच श्रद्धा का मोबाइल फोन एक्टिव था. लेकिन 26 अक्टूबर को मानिकपुर पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए जाने से पहले आफताब ने श्रद्धा के फोन को समुद्र में फेंक दिया था.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आफताब से पूछताछ के दौरान पहली बार में उसके मोबाइल फोन और अन्य गैजेट्स की जांच नहीं की गई थी. दिल्ली पुलिस सूत्रों ने ये भी बताया कि श्रद्धा की हत्या करने के बाद आफताब मुंबई में श्रद्धा के कुछ दोस्तों से भी मिला था. आफताब ने श्रद्धा के दोस्तों को रिलेशनशिप टूटने की कहानी भी बताई थी. जिससे किसी को शक न हो. मानिकपुर पुलिस से पूछताछ के बाद आफताब 4 नवंबर को दिल्ली वापस आ गया. दिल्ली आकर उसने बचे हुए सबूतों को भी नष्ट कर दिया था. सूत्रों के मुताबिक हत्या के लिए इस्तेमाल किए गए हथियार को भी आफताब ने मानिकपुर पुलिस से पूछताछ के बाद ही ठिकाने लगाया था.
फिर से हो सकता है पॉलीग्राफ टेस्टश्रद्धा वॉल्कर मर्डर केस (Shraddha Walker Murder Case) में आरोपी आफताब पूनावाला से दिल्ली पुलिस लगातार झूठ पकड़ने की मशीन के ज़रिए तमाम सवाल पूछ रही है. इससे कथित हत्या के छिपे हुए तथ्य सामने आ सकते हैं. झूठ पकड़ने वाली मशीन यानी पॉलीग्राफ टेस्ट से पता चल जाता है कि आदमी कब झूठ बोल रहा है और कब सच बयान कर रहा है. दिल्ली पुलिस अब तक तीन बार आफताब का पॉलीग्राफ टेस्ट कर चुकी है.
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