11 शतक मारने वाले एरॉन फिंच से ज्यादा बदनसीब खिलाड़ी और कोई नहीं
ऑस्ट्रेलिया के लिए और क्या जान दे दे?
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2013 से ऑस्ट्रेलिया की वनडे और टी20 टीम का हिस्सा हैं एरॉन फिंच.
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क्रिकेट का खेल भी अनोखा ही है. एक क्रिकेटर लगातार रन बना रहा है. शतक मार रहा है. फिर भी एक ऐसे रिकॉर्ड के आगे उसका नाम लिखा गया है जिसे वो कभी नहीं बनता देखना चाहता था. इस खिलाड़ी का नाम है एरॉन फिंच. ऑस्ट्रेलिया के इस ओपनर ने पांच साल पहले यानी 2013 में वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया था. तब से अब तक 92 वनडे मैच खेल लिए हैं और 11 शतक मारे हैं. इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के चौथे मैच में एरॉन फिंच ने 100 रनों की पारी खेली है.
अब 31 साल के एरॉन फिंच इकलौते ऐसे प्लेयर हैं जिन्हें इतने वनडे खेलने और इतने शतक मारने के बाद भी टेस्ट में डेब्यू करने का मौका नहीं मिला है. ये एक रिकॉर्ड है. 11 वनडे शतक मारने के बावजूद फिंच को ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम में खेलने का मौका नहीं मिला है.

2013 में टी-20 में इंग्लैंड के खिलाफ 156 रनों की पारी खेलकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. इसी के चलते फिंच को अगले ही साल टीम का टी-20 कप्तान बनाया गया था. इस दौरान वो टी-20 रैंकिंग में नंबर 1 थे. यही नहीं, क्रिकेट वर्ल्ड कप 2015 में ऑस्ट्रेलिया के लिए जीत की शुरुआत फिंच की इंग्लैंड के खिलाफ 135 रनों की पारी से ही हुई थी. वो वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया जीता था.

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में फिंच लगातार अच्छा परफॉर्म करते रहे हैं.
वैसे ऑस्ट्रेलियाई टीम में और भी कई ऐसे नाम हैं जिन्हें टेस्ट कैप पहनने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. इनमें एंड्रयू साइमंड्स का नाम भी शामिल है. 1998 में वनडे डेब्यू करने का बाद 2004 में पहला टेस्ट खेलने का मौका मिला था. इसी तरह माइक हसी को भी लंबे इंतजार के बाद टेस्ट टीम में खेलने का मौका मिला था. 2005 में 30 साल की उम्र में हसी को डेब्यू करने का मौका मिला था और फिर ये खिलाड़ी अपनी टीम की रीढ़ बन गया.
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अब 31 साल के एरॉन फिंच इकलौते ऐसे प्लेयर हैं जिन्हें इतने वनडे खेलने और इतने शतक मारने के बाद भी टेस्ट में डेब्यू करने का मौका नहीं मिला है. ये एक रिकॉर्ड है. 11 वनडे शतक मारने के बावजूद फिंच को ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम में खेलने का मौका नहीं मिला है.

2013 में टी-20 में इंग्लैंड के खिलाफ 156 रनों की पारी खेलकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. इसी के चलते फिंच को अगले ही साल टीम का टी-20 कप्तान बनाया गया था. इस दौरान वो टी-20 रैंकिंग में नंबर 1 थे. यही नहीं, क्रिकेट वर्ल्ड कप 2015 में ऑस्ट्रेलिया के लिए जीत की शुरुआत फिंच की इंग्लैंड के खिलाफ 135 रनों की पारी से ही हुई थी. वो वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया जीता था.

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वैसे ऑस्ट्रेलियाई टीम में और भी कई ऐसे नाम हैं जिन्हें टेस्ट कैप पहनने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. इनमें एंड्रयू साइमंड्स का नाम भी शामिल है. 1998 में वनडे डेब्यू करने का बाद 2004 में पहला टेस्ट खेलने का मौका मिला था. इसी तरह माइक हसी को भी लंबे इंतजार के बाद टेस्ट टीम में खेलने का मौका मिला था. 2005 में 30 साल की उम्र में हसी को डेब्यू करने का मौका मिला था और फिर ये खिलाड़ी अपनी टीम की रीढ़ बन गया.
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