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केंद्र के अध्यादेश से केजरीवाल की 'शक्तियां छिनीं'? एक क्लिक में जानिए दिल्ली का 'बिग बॉस' कौन

क्या केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर दी?

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AAP slams Centre's ordinance on services
दिल्ली के LG वीके सक्सेना और CM अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो: PTI)
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सुरभि गुप्ता
20 मई 2023 (Updated: 20 मई 2023, 05:06 PM IST)
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दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग कोे लेकर केंद्र ने 19 मई को एक अध्यादेश जारी किया है. इस अध्यादेश को आम आदमी पार्टी (AAP) सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बता रही है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि अधिकारियों की तैनाती और तबादले का अधिकार दिल्ली सरकार के पास होगा. केंद्र की ओर से लाए गए अध्यादेश में इसके लिए नेशनल कैपिटल सिविल सर्विसेज अथॉरिटी (NCCSA) बनाने की बात कही गई है. 

अथॉरिटी होगी, लेकिन अंतिम फैसला LG का होगा

अध्यादेश के मुताबिक ये अथॉरिटी दिल्ली में अधिकारियों की तैनाती, तबादले और उनके खिलाफ मिली शिकायतों पर कार्रवाई करेगी. इस अथॉरिटी में दिल्ली के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) होंगे. दिल्ली के मुख्यमंत्री NCCSA के अध्यक्ष, प्रधान सचिव (गृह) इस अथॉरिटी के सचिव और मुख्य सचिव सदस्य होंगे. ये अथॉरिटी बहुमत के आधार पर अधिकारियों की तैनाती-तबादले की सिफारिश करेगी, पर अंतिम फैसला दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) का होगा. LG चाहें तो फाइल को वापस लौटा सकते हैं या उसे मंजूरी दे सकते हैं. वहीं अगर किसी मुद्दे पर तीनों की राय अलग-अलग होगी, तब भी फाइनल फैसला LG का होगा.

इससे पहले 11 मई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के पक्ष में अहम फैसला सुनाया था. CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा था,

"LG के पास दिल्ली से जुड़े सभी मुद्दों पर व्यापक प्रशासनिक अधिकार नहीं हो सकते. LG की शक्तियां उन्हें दिल्ली विधानसभा और निर्वाचित सरकार की विधायी शक्तियों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं देती. अधिकारियों की तैनाती और तबादले का अधिकार दिल्ली सरकार के पास होगा. चुनी हुई सरकार के पास प्रशासनिक सेवा का अधिकार होना चाहिए. उपराज्यपाल को सरकार की सलाह माननी होगी. पुलिस, पब्लिक ऑर्डर और लैंड का अधिकार केंद्र के पास रहेगा."

कोर्ट के इस फैसले के लगभग 1 हफ्ते बाद ही केंद्र की ओर से अधिकारियों की तैनाती और तबादले से जुड़ा अध्यादेश आया है. इस अध्यादेश को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 में संशोधन के तौर पर लाया गया है. आजतक के संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने अपने अध्यादेश का आधार संविधान पीठ के एक वाक्य को बनाया है, जिसमें किसी भी केंद्रीय कानून के अभाव में ये अधिकार दिल्ली सरकार को देने की बात कही गई.

दिल्ली सरकार बोली- ‘ये अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट की अवमानना’

वहीं AAP की दिल्ली सरकार ने कहा है कि केंद्र ये अध्यादेश केजरीवाल सरकार की पावर को कम करने के लिए लाई है. दिल्ली सरकार ने कहा,

"केंद्र सरकार का अध्यादेश सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में बेहद स्पष्ट तौर पर कहा था कि चुनी हुई सरकार सुप्रीम है. चुनी हुई सरकार के पास सारी शक्तियां हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से डरकर केंद्र सरकार यह अध्यादेश लेकर आई है. केजरीवाल सरकार की पावर को कम करने के लिए यह अध्यादेश लाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर जनता ने केजरीवाल को वोट दिया है, तो केजरीवाल के पास सभी निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए. लेकिन केंद्र सरकार इस अध्यादेश के जरिए कह रही है कि दिल्ली के लोगों ने जिसे चुना है, उसे दिल्ली की जनता के हक में फैसले लेने का अधिकार नहीं होना चाहिए. यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना के साथ दिल्ली की जनता के जनादेश का भी अपमान है."

सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार के वकील रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने केंद्र के अध्यादेश पर ट्वीट किया,

"कानून से अनभिज्ञ लोगों द्वारा तैयार किया गया अध्यादेश. सिविल सेवा पर दिल्ली सरकार को अधिकार संविधान पीठ ने दिया था जिसे अध्यादेश के जरिए पलट दिया गया. संघीय व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के हिस्से को खत्म किया गया. लोगों के लिए सिविल सेवा की जवाबदेही को बिल्कुल उलट दिया गया है. मुख्यमंत्री उसकी अध्यक्षता करेंगे जहां उनके पास खुद बहुमत नहीं है."

सिंघवी के ट्वीट्स को अरविंद केजरीवाल ने भी रीट्वीट किया है. 

दिल्ली सरकार की शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा, 

“इस अध्यादेश ने साबित कर दिया कि भाजपा और केंद्र सरकार को सिर्फ और सिर्फ अरविंद केजरीवाल से डर लगता है. भाजपा को डर है कि अगर सारी पावर केजरीवाल के पास आ गई, तो केजरीवाल मॉडल को पूरे देश में फैलने से रोकना नामुमकिन होगा.”

दरअसल, दिल्ली के मुख्य सचिव और गृह सचिव केंद्र सरकार द्वारा ही नियुक्त किए जाते हैं. AAP का कहना है कि इस तरह NCCSA में मुख्यमंत्री अल्पमत में होगा और उपराज्यपाल के पास ही अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के अधिकार रहेंगे.

वीडियो: केजरीवाल के सारे मंत्री LG के घर के बाहर धरने पर किस वजह से बैठ गए?

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