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दिल्ली के LG ने नोटबंदी के टाइम 14 अरब का घोटाला कर दिया?

AAP वालों ने कहा कि LG के यहां छापा मारे ED और CBI करे जांच. जानिए, क्या आरोप लगे हैं और मामला क्या है?

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AAP Protests against Delhi LG
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और एलजी वीके सक्सेना (फोटो- PTI/LG Delhi)
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साकेत आनंद
30 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 30 अगस्त 2022, 04:16 PM IST)
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चार साल पहले दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रियों ने पूर्व LG अनिल बैजल के खिलाफ धरना दिया था. AAP के नेता रातभर LG आवास पर सोफे में जमे रहे थे. पार्टी का आरोप था कि दिल्ली के IAS अधिकारी सरकार के काम में सहयोग नहीं कर रहे हैं. अब एक बार फिर से AAP नेता दिल्ली के LG वीके सक्सेना के खिलाफ धरने पर हैं. इस बार उनका आरोप सीधे-सीधे उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर ही है. एक दिन पहले 29 अगस्त की पूरी रात दिल्ली विधानसभा में AAP के विधायकों ने LG के खिलाफ धरना दिया और उनके खिलाफ CBI जांच की मांग की.

LG वीके सक्सेना पर AAP का आरोप

आम आदमी पार्टी LG वीके सक्सेना पर सीधे-सीधे 1400 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा रही है. दरअसल, नवंबर 2016 में केंद्र सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट को बैन कर दिया था. नोटबंदी के दौरान वीके सक्सेना खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अध्यक्ष थे. AAP का आरोप है कि उन्होंने 1,400 करोड़ रुपये के बैन किए गए नोटों को बदलने के लिए अपने दो कर्मचारियों पर दबाव बनाया. आम आदमी पार्टी वाले LG पर काले धन को सफेद करने का आरोप लगा रहे हैं.

29 अगस्त को AAP विधायक दुर्गेश पाठक ने दिल्ली विधानसभा में एक बड़ा दावा किया. दुर्गेश पाठक ने कहा, 

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दुर्गेश पाठक ने कहा कि ये पूरी तरह से मनी लॉन्ड्रिंग है, एलजी के खिलाफ ईडी की छापेमारी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ जांच होनी चाहिए और जब तक जांच हो, उन्हें एलजी पद पर नहीं रहना चाहिए. दुर्गेश पाठक ने खादी ग्रामोद्योग के दो कैशियर प्रदीप कुमार यादव और संजीव कुमार का नाम लिया और कहा कि अगर ये दोनों सामने नहीं आते, तो इस 'घोटाले' का पता नहीं चलता. उन्होंने कहा कि इन दोनों पर पुराने नोट बदलने के लिए वीके सक्सेना ने दबाव बनाया था.

दुर्गेश पाठक ने दावा किया कि इन दोनों कैशियर ने देश के हर फोरम में शिकायत की. पाठक ने आगे कहा, 

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दोनों कैशियर के स्टेटमेंट

आम आदमी पार्टी ने मामले की जांच के दौरान दोनों कैशियर की तरफ से दिए गए स्टेटमेंट को भी शेयर किया है. संजीव कुमार खादी ग्रामोद्योग की बिक्री केंद्र के हेड कैशियर थे. उनका काम बैंक में पैसों को जमा करना था. संजीव कुमार ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने प्रबंधक को पुराने नोट लेने से मना किया लेकिन प्रबंधक (एके गर्ग) ने बताया कि चेयरमैन (वीके सक्सेना) का दबाव है. संजीव कुमार के मुताबिक, उन्हें हर दिन 500 और 1000 के नोट बदलने के लिए दिए जाते थे. उन्होंने ये काम मजबूरी में किया, जिसकी जानकारी अधिकतर स्टाफ को पहले से है. संजीव कुमार ने फिर छुट्टी ले ली. उन्होंने ये भी बताया कि उनके नहीं रहने पर ये काम प्रदीप यादव ने किया.

वहीं प्रदीप यादव ने अपने बयान में बताया कि नोटबंदी (9-11-2016) के बाद उन्होंने कस्टमर से पुराने नोट स्वीकार नहीं किए. जो भी नोट जमा हुए हैं वो काउंटर कैशियर के द्वारा जमा किए गए, नए नोट (500 और 2000) हेड कैशियर के पास जाते थे. उन्होंने बताया, 

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1400 करोड़ की रकम का मामला

दरअसल, नोटबंदी के बाद सरकार ने 500 और 1000 के पुराने नोटों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था. वो नोट सिर्फ बैंक में जाकर बदले जा सकते थे. AAP विधायक दुर्गेश पाठक ने दोनों कैशियर के हवाले से विधानसभा में बताया कि नोटबंदी के बाद उनकी ब्रांच से 22 लाख रुपये के नोट बदले गए. ये दोनों एक ब्रांच के कैशियर हैं. दुर्गेश पाठक ने कहा कि इस तरह देश भर में खादी ग्रामोद्योग की करीब 7 हजार ब्रांच हैं, अगर आप इसको गिनेंगे, तो ये 1400 करोड़ रुपये से ज्यादा का भ्रष्टाचार है.

इधर AAP विधायक अतिशी ने एक मीडिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया. अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक्स टॉइम्स ने 10 अप्रैल 2018 की अपनी रिपोर्ट में नोटबंदी के दौरान पुराने नोट बदले जाने की बात छापी थी. उस रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान KVIC के अधिकारियों ने कहा था कि कई VIP अपने पुराने नोट बदलने के लिए खादी ग्रामोद्योग भवन (KGB) नियमित रूप से आते थे. जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि दिल्ली और नोएडा के चार खादी ग्रामोद्योग भवन ने 500 और 1000 रुपये के 22 लाख 82 हजार रुपये स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच में जमा किए गए थे.

इकनॉमिक्स टॉइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संजीव कुमार और प्रदीप यादव दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थिति खादी ग्रामोद्योग भवन के मेन शोरूम में कैशियर थे. उन दोनों ने स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर और जयपुर में 500 और 1000 रुपये के नोट जमा कराए थे. इस रिपोर्ट में भी दोनों कैशियर के उन बयानों को छापा गया था, जिसमें चेयरमैन (वीके सक्सेना) के नाम पर दबाव बनाने की बात कही गई थी. एके गर्ग उस शोरूम के मैनेजर थे और अजय गुप्ता फ्लोर इंचार्ज थे. ये जांच रिपोर्ट सेंट्रल विजिलांस ऑफिसर मोहित जैन ने 5 मई 2017 को पेश की थी.

उस वक्त वीके सक्सेना ने जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया था. उन्होंने अखबार को बताया था कि ये भी गलत है कि VIP खादी ग्रामोद्योग के कर्मचारियों को नोट बदलने के लिए कहते थे. वीके सक्सेना ने उसके बाद KVIC को एक शिकायत दर्ज करने को कहा था और साथ ही इंटरनल जांच का भी आदेश दिया था.

बीजेपी विधायकों का भी धरना

उधर, AAP विधायकों के प्रदर्शन के काउंटर में BJP विधायकों ने भी विधानसभा में धरना दिया. बीजेपी विधायक विजेंदर गुप्ता ने कहा कि जब से एलजी वीके सक्सेना ने कार्यभार संभाला है, वो दिल्ली सरकार के स्कूलों में क्लासरूम और एक्साइज पॉलिसी जैसे मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं. गुप्ता ने कहा कि AAP वाले ये सब बदला लेने के लिए और अपने गलत कामों से ध्यान भटकाने के लिए कर रहे हैं.

फिलहाल उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने AAP के आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया है. ना ही LG ऑफिस से कोई बयान जारी किया गया है. आम आदमी पार्टी मंगलवार 30 अगस्त को भी वीके सक्सेना की गिरफ्तारी और उन्हें पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है. हाल में LG ने दिल्ली सरकार की 47 फाइलों को बिना मंजूरी के वापस भेज दिया था. इसके अलावा एक्साइज पॉलिसी को लागू करने में हुए कथित घोटाले की जांच का आदेश भी एलजी ने दिया था, जिससे आम आदमी पार्टी पूरी तरह से पल्ला झाड़ रही है.

वीडियो: दिल्ली आबकारी ‘घोटाला’ के बाद BJP ने अरविंद केजरीवाल पर अब किस घोटाले का आरोप लगाया?

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