मुंबई का बंदा ऑनलाइन टाइम पास कर रहा था, खुश होकर गूगल ने सवा करोड़ की नौकरी दे दी
अब आप भी गाइए - समय बिताने के लिए, करना है कुछ 'कमाई'.
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गूगल का ऑफिस (सांकेतिक तस्वीर - रॉयटर्स)
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इंडिया टाइम्स की एक खबर
के अनुसार मुंबई के एक इंजीनियर को गूगल के लंडन ऑफिस की ओर से एक करोड़ बीस लाख रुपए का जॉब ऑफर आया है. और इसके लिए उसने कितने पापड़ बेले? उसने क्या-क्या किया?
कुछ नहीं. इल्ले. नथिंग. लेकिन इस कुछ नहीं को उसने बड़े जी-जान और दिमाग और इंटलेक्ट से किया.
हम पूरी खबर बताएं उससे पहले ज़रा भोकाल टाईट कर लिया जाए - गूगल के ऑफिस में काम करना किसी सपने के सच हो जाने सरीखा है. और ये बात ज़्यादातर लोग जानते हैं. दुनियाभर में 'ऑफिस में काम काज के माहौल' को लेकर जितनी भी काउंट-डाउन लिस्ट्स बनती हैं उनमें ज़्यादातर में ये टॉप पर होता है और बाकियों में टॉप फाइव में. और अगर इत्ता अच्छा हिसाब-किताब है तो फिर कंप्टीशन भी वैसा ही तगड़ा होता होगा.
गूगल ऑफिस की मौज़ तुम क्या जानो रमेश बाबू (सांकेतिक इमेज - रॉयटर्स)
ये पिछला पैरा 'भोकाल' वाला था. तो स्टोरी ये है कि मुंबई के मीरा रोड में रहने वाला एक लड़का है. स्टूडेंट है. इंजीनियरिंग कर रहा है. नाम है अब्दुल्ला खान. इस स्टूडेंट का टाइम काटे नहीं कट रहा था. तो इसने समय बिताने के किये अंताक्षरी खेले के बजाय ऑनलाइन कॉन्टेस्ट में भाग लेना उचित समझा. वो ऑनलाइन कॉन्टेस्ट गूगल वालों का था. लड़का उसमें पास हो गया. इसके बाद कुछ इंटरव्यू वगैरह हुए, फाइनल वाला गूगल के लंडन ऑफिस में ही हुआ. सारे क्लियर करता चला गया, और अंत में जॉब मिल गई.
बस! खेल ख़तम, पैसा हज़म!! बजाओ ताली!!!
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के अनुसार मुंबई के एक इंजीनियर को गूगल के लंडन ऑफिस की ओर से एक करोड़ बीस लाख रुपए का जॉब ऑफर आया है. और इसके लिए उसने कितने पापड़ बेले? उसने क्या-क्या किया?
कुछ नहीं. इल्ले. नथिंग. लेकिन इस कुछ नहीं को उसने बड़े जी-जान और दिमाग और इंटलेक्ट से किया.
हम पूरी खबर बताएं उससे पहले ज़रा भोकाल टाईट कर लिया जाए - गूगल के ऑफिस में काम करना किसी सपने के सच हो जाने सरीखा है. और ये बात ज़्यादातर लोग जानते हैं. दुनियाभर में 'ऑफिस में काम काज के माहौल' को लेकर जितनी भी काउंट-डाउन लिस्ट्स बनती हैं उनमें ज़्यादातर में ये टॉप पर होता है और बाकियों में टॉप फाइव में. और अगर इत्ता अच्छा हिसाब-किताब है तो फिर कंप्टीशन भी वैसा ही तगड़ा होता होगा.
गूगल ऑफिस की मौज़ तुम क्या जानो रमेश बाबू (सांकेतिक इमेज - रॉयटर्स)ये पिछला पैरा 'भोकाल' वाला था. तो स्टोरी ये है कि मुंबई के मीरा रोड में रहने वाला एक लड़का है. स्टूडेंट है. इंजीनियरिंग कर रहा है. नाम है अब्दुल्ला खान. इस स्टूडेंट का टाइम काटे नहीं कट रहा था. तो इसने समय बिताने के किये अंताक्षरी खेले के बजाय ऑनलाइन कॉन्टेस्ट में भाग लेना उचित समझा. वो ऑनलाइन कॉन्टेस्ट गूगल वालों का था. लड़का उसमें पास हो गया. इसके बाद कुछ इंटरव्यू वगैरह हुए, फाइनल वाला गूगल के लंडन ऑफिस में ही हुआ. सारे क्लियर करता चला गया, और अंत में जॉब मिल गई.
बस! खेल ख़तम, पैसा हज़म!! बजाओ ताली!!!
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