फ्लाईओवर के नीचे गरीब बच्चों के लिए चल रहा था स्कूल, पुलिस ने बुलडोजर चला दिया
स्कूल चलाने के लिए लोग अलग-अलग स्तर पर मदद कर रहे थे. करीब 200 बच्चे यहां पढ़ रहे थे.

कोई भी बड़ा शहर कई लेयर्स के साथ जीता है. अलग-अलग वर्गों और तबकों के लोग मिलकर शहर को बनाने में जुटे होते हैं. शहर की कथित खूबसूरती में समाज के उस वर्ग का बड़ा योगदान होता है, जो हाशिये पर रहता है. दिल्ली में आप कभी किसी फ्लाईओवर से गुजरेंगे तो वहां अक्सर एक साथ दो, तीन या कई जिंदगियां दिख जाएंगी. एक तरफ फ्लाईओवर से महंगी गाड़ियां गुजरती दिखेंगी, तो उसी फ्लाईओवर के नीचे न्यूनतम संसाधनों के बिना जिंदगी जी रहे लोग भी दिख जाएंगे.
शहरों में इन्हीं फ्लाईओवर्स के नीचे सपने भी सजते हैं. दिल्ली के मयूर विहार इलाके में ऐसे ही एक फ्लाईओवर के नीचे कुछ सपने सज रहे थे. शायद उस फ्लाईओवर के ऊपर महंगी गाड़ी लेकर जाने के या फिर समाज के लिए कुछ बेहतर कर दिखाने के. इस फ्लाईओवर के नीचे पढ़ाई करने वाले करीब 200 बच्चों के सपने फिलहाल बिखर गए हैं!
"स्कूल को बिना नोटिस गिरा दिया"तारीख 11 जनवरी 2023. यमुना नदी के किनारे बने वनफूल स्कूल को बुलडोजर से ढहा दिया गया. ये स्कूल कागज में दर्ज कोई सरकारी या प्राइवेट स्कूल नहीं था. बल्कि बांस और लकड़ियों से बने छोटे-छोटे क्लासरूम. कुछ लोग अपनी पहल से इसे चला रहे थे. मयूर विहार फेज-1 मेट्रो से सटे इस इलाके में ज्यादातर लोग मजदूरी करके अपना गुजारा चलाते हैं. इन्हीं परिवारों के करीब 200 बच्चे इस स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे. स्कूल चलाने वाले लोगों का आरोप है कि पुलिसवालों ने बिना नोटिस के सबकुछ बर्बाद कर दिया.
इस स्कूल के फाउंडर नरेश पाल का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें सामान हटाने का भी समय नहीं दिया. नरेश ने दी लल्लनटॉप को बताया कि कोविड के दौरान उन्होंने इस स्कूल को शुरू किया था. जिस जगह पर ये स्कूल था, वो फ्लाईओवर की कंस्ट्रक्शन साइट है. नरेश के मुताबिक, इसके लिए उन्होंने साइट इनचार्ज से अनुमति ली थी. जो लोग इस स्कूल को फंडिंग दे रहे थे, वो भी उनकी इस पहल से काफी खुश थे. हमारी कोशिश के कारण किसी ने सोलर पैनल डोनेट किया, किसी ने टेंट दिया, किसी ने इनवर्टर दे दिया, किसी ने वॉशरूम के लिए पैसे दिए. इसी तरीके से चीजें जुड़ती चली गईं.

नरेश पाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं के रहने वाले हैं. फिलहाल, राजस्थान की सिंघानिया यूनिवर्सिटी से सोशल वर्क में PhD भी कर रहे हैं. मयूर विहार इलाके में रहकर ही उन्होंने बीए और मास्टर्स की पढ़ाई की. वो बताते हैं,
"फ्लाईओवर के साइट इनचार्ज ने कभी नहीं कहा कि उन्हें हमारे स्कूल से दिक्कत है. 7 जनवरी को एलजी (विनय सक्सेना) ने इस इलाके का दौरा किया था. वो फ्लाईओवर के रुके काम को देखने आए थे. 10 जनवरी को पुलिसवालों ने आकर बोला कि वो कल (11 जनवरी) स्कूल गिरा देंगे. मैं यहां नहीं था. वापस आने के बाद पुलिसवाले से बात की तो उन्होंने कहा कि स्कूल को कुछ नहीं होगा. साइट इनचार्ज से भी बात की, तो उन्होंने आश्वासन दिया कि उन्हें अभी उस जमीन की जरूरत नहीं है."
नरेश बताते हैं कि इसके बावजूद अगले दिन यानी 11 जनवरी को पुलिसवाले बुलडोजर लेकर आ गए. उनका आरोप है कि पुलिस ने 5 मिनट का भी समय नहीं दिया और स्कूल को गिराना शुरू कर दिया. नरेश का कहना है कि उन्होंने पुलिसवालों से 2 घंटे का समय मांगा, लेकिन उनकी एक भी नहीं सुनी गई. पुलिसवालों ने सिर्फ इतना कहा कि इस जगह पर व्यवसायिक गतिविधि हो रही है.
नरेश ने बताया कि स्कूल में करीब 15 से 16 लाख रुपये के सामान थे. ये सामान अलग-अलग NGO और व्यक्तिगत फंडिंग से मिले थे. स्कूल में कोविड राहत से जुड़े कुछ सामान भी थे, जो उन्होंने महामारी के दौरान लोगों को बांटने के लिए जुटाए थे. व्यवसायिक गतिविधि के आरोप पर नरेश कहते हैं कि वो अपने लिए कुछ थोड़ी कर रहे थे, बल्कि लोगों की मदद के लिए कर रहे थे. नरेश के साथ कुछ दूसरे लड़के और लड़कियां भी पॉकेट खर्च पर वहां पढ़ाया करते थे.

ये स्कूल 1993 से चल रहा था. हालांकि, तब वो ठीक इसी फ्लाईओवर के नीचे और इस रूप में नहीं था. पहले ये स्कूल एक पेड़ के नीचे चल रहा था. नरेश के मुताबिक, कोविड के दौरान स्कूल को रीकंस्ट्रक्ट किया और फिर कई लोगों ने मदद की.
"PWD के आदेश पर कार्रवाई हुई"इस कार्रवाई को लीड करने वाले अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के आदेश पर स्कूल को तोड़ा गया. विनोद कुमार ने दी लल्लनटॉप को बताया,
"PWD को उस इलाके में जो जमीन खाली करानी थी, हमने करवा दी. हमारे पास कोई आदेश आएगा तो हमें वो करना है. दिसंबर में ही PWD का यह आदेश आया था. फिर 10 जनवरी को अधिकारियों की एक मीटिंग हुई थी. उसी दिन हमें जानकारी मिली कि जगह खाली करवानी है. तो हमने कार्रवाई की."
नोटिस नहीं देने के सवाल पर विनोद कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी जमीन को लेकर किसी को नोटिस देने की जरूरत नहीं होती है. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें लगता है कि कुछ गलत हुआ है, तो वो PWD पर केस कर दें. विनोद कुमार का दावा है कि पुलिस ने इस कार्रवाई में उनका सहयोग किया, कोई सामान नहीं तोड़ा गया है.
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