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जुबैर को अरेस्ट करने वाली दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने पहले क्या कारनामा किया है?

दिशा रवि टूलकिट केस से लेकर बुल्ली बाई ऐप तक कई बड़े केस दिल्ली पुलिस की इस स्पेशल यूनिट ने हैंडल किए हैं

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28 जून 2022 (अपडेटेड: 29 जून 2022, 02:08 PM IST)
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मोहम्मद जुबैर (बाएं) और दाएं दिल्ली पुलिस का प्रतीकात्मक फोटो | सोर्स: आजतक
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दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की IFSO यूनिट ने सोमवार, 27 जून को मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) को धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया. जुबैर को सेक्शन 153 ए और 295 ए के तहत अरेस्ट किया गया है. पुलिस ने बताया कि Alt News के पत्रकार की गिरफ्तारी जून 2022 में दर्ज किए गए एक केस में हुई है. हालांकि, यह केस 2018 में किए गए एक ट्वीट से जुड़ा है. पुलिस के मुताबिक एक ट्विटर यूजर ने जुबैर के इस ट्वीट को लेकर शिकायत भेजी थी. सोमवार को गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही मोहम्मद जुबैर को कोर्ट में पेश किया गया. जहां से उन्हें एक दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया.

IFSO का क्या काम है?

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशन (IFSO) यूनिट स्पेशल सेल के अंतर्गत काम करती है. यह एक विशेष यूनिट है जो सभी चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील साइबर अपराधों से जुड़े मामलों को देखती है. यह यूनिट इससे पहले भी कई बड़े मामलों में कार्रवाई करती दिखी है. जून 2022 में ही IFSO ने कई पार्टियों के नेताओं द्वारा की गई कथित अभद्र टिप्पणियों के संबंध में दो अलग-अलग FIR दर्ज की थीं. इनमें भाजपा के पूर्व नेता नवीन कुमार जिंदल, नूपुर शर्मा, असदुद्दीन ओवैसी, शादाब चौहान, सबा नकवी, मौलाना मुफ्ती नदीम और यति नरसिंहानंद सहित कुल 31 लोगों के नाम शामिल हैं.

पैगंबर मुहम्मद पर नूपुर शर्मा की विवादित टिप्पणी के बाद देश के कई हिस्सों में व्यापक प्रदर्शन हुए थे. इसके बाद IFSO ने ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया साइटों को पत्र लिखकर उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाली आपत्तिजनक सामग्री के बारे में जानकारी मांगी थी. आइये जानते हैं कि IFSO ने अब तक कौन-कौन से बड़े केस हैंडल किए हैं?

चीनी ऐप की लोन धोखाधड़ी

अप्रैल 2022 में दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने लोन देने के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले एक गैंग का भंडाफोड़ किया था. इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. ये लोग चीनी ऐप के जरिए पहले दो महीने के लिए इंट्रेस्ट फ्री लोन देने का वादा करते थे. फिर अगले ही दिन से फोन हैक करके पीड़ित के तमाम रिश्तेदारों और घरवालों से लोन अमाउंट से कहीं ज्यादा रकम वापस मांगते थे. उन्हें धमकाते थे. दिल्ली पुलिस ने बताया कि लोगों से लिया गया पैसा क्रिप्टो करेंसी में बदलकर चीन भेजा जाता था.

बुल्ली बाई ऐप केस

जनवरी 2022 में बुल्ली बाई ऐप के निर्माता असम के 21 वर्षीय नीरज बिश्नोई को भी दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने ही गिरफ्तार किया था. बुल्ली बाई ऐप पर सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं के नाम "नीलामी" के लिए लिस्ट किए गए थे. उनकी तस्वीरों को बिना मंजूरी के इस्तेमाल किया गया था और साथ ही, उन तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई थी. पुलिस के मुताबिक इसमें कोई वास्तविक नीलामी या बिक्री नहीं हुई थी. लेकिन, ऐप का मकसद सोशल मीडिया पर एक्टिव कई मुस्लिम महिलाओं को अपमानित करना और डराना था.

ऑनलाइन परीक्षा हैकिंग रैकेट का भंडाफोड़

जनवरी 2022 में ही IFSO यूनिट ने एक बड़े ऑनलाइन एग्जाम हैकिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया. यूनिट ने एक ऐसे गैंग का पकड़ा जो ऑनलाइन परीक्षा में सेंध लगा लेते थे. इस काम को अंजाम दुनिया के बड़े हैकर देते थे, और फिर सॉल्वर कहीं दूर बैठ कर पेपर सॉल्व कर देते थे. दिल्ली पुलिस 6 महीने से इस गैंग के पीछे पड़ी थी. पुलिस ने अपने ही एक सिपाही को छात्र बना कर भेजा, फिर कहीं जाकर पुलिस ने गैंग के मास्टरमाइंड समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया. 

दिशा रवि टूलकिट केस में IFSO पर उठे सवाल!

फरवरी 2021 में दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को गिरफ्तार किया था. उन पर जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा पोस्ट किए गए किसानों के आंदोलन का समर्थन वाले एक टूलकिट को सोशल मीडिया पर साझा करने का आरोप लगा था. पुलिस ने दावा किया था कि 26 जनवरी 2021 को किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा का पूरा घटनाक्रम इस टूलकिट की योजना से मिलता-जुलता है. पुलिस ने दिशा रवि पर राजद्रोह और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई थीं.

लेकिन, गिरफ्तारी के दस दिन बाद ही दिशा रवि को जमानत मिल गई. पर्यावरण कार्यकर्ता को जमानत देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने कहा था कि पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्य बेहद कम और अधूरे हैं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा का कहना था कि किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र में, नागरिक सरकार की अंतरात्मा के संरक्षक होते हैं. उन्हें केवल इसलिए जेल नहीं भेजा जा सकता कि वे सरकार की नीतियों से असहमत हैं. अदालत ने कहा कि रत्ती भर भी सबूत नहीं है, जिससे 26 जनवरी को हुई हिंसा में शामिल अपराधियों से दिशा रवि के किसी संबंध का पता चलता हो.

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