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  • 1988 road rage case: Supreme Court sentences Navjot Singh Sidhu to one-year rigorous imprisonment

जानिए उस केस के एक-एक दिन की कहानी, जिसमें सिद्धू को एक साल की सजा हुई थी

34 साल पहले, 27 दिसंबर 1988 की शाम क्या हुआ था? जानिए पूरी कहानी

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19 मई 2022 (अपडेटेड: 1 अप्रैल 2023, 06:33 PM IST)
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34 साल पहले नवजोत सिंह सिद्धू पर ये मामला दर्ज हुआ था | फाइल फोटो: आजतक
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कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) 10 महीने की सजा काटने के बाद पटियाला जेल से रिहा हो गए. रोड रेज केस में सिद्धू को मई 2022 में एक साल की सजा हुई थी. लेकिन उनके ‘अच्छे व्यवहार’ के कारण जल्दी रिहा कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उन्होंने सरेंडर कर दिया था. 

सिद्धू को यह सजा 34 साल पुराने रोड रेज के मामले में सुनाई गई थी. पहले इस मामले में नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट ने महज एक हजार के जुर्माने पर छोड़ दिया था. लेकिन रोड रेज में जिस बुजुर्ग की मौत हुई थी, उसके परिवार ने रिव्यू पिटीशन दायर की थी. इसी पर सुनवाई करते हुए सिद्धू को एक साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई.

3 दशक पुराना मामला क्या है, 6 प्वाइंट्स में समझें…

1 – 27 दिसंबर 1988 की शाम को नवजोत सिद्धू अपने दोस्त रूपिंदर सिंह संधू के साथ पटियाला के शेरावाले गेट की मार्केट में पहुंचे. ये जगह उनके घर से 1.5 किलोमीटर दूर है. उस समय सिद्धू एक क्रिकेटर थे. उनका अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू हुए एक साल ही हुआ था.

2 – इसी मार्केट में कार पार्किंग को लेकर उनकी 65 साल के बुजुर्ग गुरनाम सिंह से कहासुनी हो गई. बात हाथापाई तक जा पहुंची. सिद्धू ने गुरनाम सिंह को घुटना मारकर गिरा दिया. उसके बाद गुरनाम सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई. रिपोर्ट में आया कि गुरनाम सिंह की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई.

3 – उसी दिन सिद्धू और उनके दोस्त रूपिंदर पर कोतवाली थाने में गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ. सेशन कोर्ट में केस चला. 1999 में सेशन कोर्ट ने केस को खारिज कर दिया.

4 – साल 2002 में पंजाब सरकार ने सिद्धू के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की. इसी बीच सिद्धू राजनीति में आ गए. 2004 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते.

5 – दिसंबर 2006 को हाईकोर्ट का फैसला आया. हाईकोर्ट ने सिद्धू और संधू को दोषी ठहराते हुए 3-3 साल कैद की सजा सुनाई. साथ ही 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. सिद्धू ने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया.

6 – हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. सिद्धू की ओर से बीजेपी के दिवंगत नेता अरुण जेटली ने केस लड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई. 2007 में सिद्धू फिर अमृतसर से चुनाव जीते.

सिद्धू पर इस मामले में दो केस दर्ज हुए थे

1988 के मामले में सिद्धू पर दो केस दर्ज थे. पहला गैर इरादतन हत्या का और दूसरा रोड रेज का. गैर इरादतन हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को 15 मई 2018 को बरी कर दिया था. मगर रोड रेज के केस में उन पर चोट पहुंचाने की धारा लगी थी, इस मामले में शीर्ष अदालत ने उन पर 1000 रुपए का जुर्माना लगाया था. सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील दायर की गई थी. 25 मार्च, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. 19 मई 2022 को कोर्ट ने फैसला सुना दिया. फिर सिद्धू ने अगले ही दिन सरेंडर कर दिया.

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