क्या है ये BTST ट्रेड, जिससे सिर्फ सलाह देकर एंकर ने करोड़ों के वारे-न्यारे कर दिए?
इस 'हेराफेरी' के बहाने शेयर मार्केट से जुड़े कई खास टर्म्स भी आसान भाषा में समझ लीजिए.
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BSE की बिल्डिंग. अनगिनत कांड जुड़े है इससे. अब एक और जुड़ गया है. (तस्वीर:PTI)
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CNBC आवाज़ के एंकर हेमंत घई को लेकर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल में अपनी वेबसाइट पर 35 पन्नों का लंबा-चौड़ा PDF
डाला. इसमें हेमंत घई और उनके परिवार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए. उन्हें ट्रेडिंग करने और निवेश सलाह देने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया. अब आप पूछेंगे कि इस ख़बर को आज क्यूं बताया जा रहा है? तो जवाब ये है कि इस स्टोरी का मुख्य उद्देश्य ख़बर बताना नहीं, उसके माध्यम से फ़ाइनेंस, शेयर मार्केट और इस पूरे मुद्दे से जुड़े कई टेक्निकल टर्म्स को समझना-समझाना है. आसान भाषा में. लेकिन फ़ॉर अ चेंज, पूरा मामला जानते हुए बीच-बीच में टेक्निकल टर्म्स और कॉन्सेप्ट आसान भाषा में समझते हुए चलते हैं. # कहानी ऐसे शुरू होती है ‘CNBC आवाज़' हिंदी का एक ‘बिज़नेस न्यूज़’ चैनल है. इसमें फ़ाइनेंस से जुड़ी बाकी खबरों के अलावा शेयर मार्केट से जुड़ी ख़बरें भी रहती हैं. साथ ही कुछ ऐसे स्पेशल सेग्मेंट, एंकर और गेस्ट हैं, जिनके माध्यम से शेयर्स को लेकर राय दी जाती है.
राय मतलब, कौन सा शेयर ख़रीदना है. कब ख़रीदना है. कब तक इन शेयर्स को होल्ड करना है. कितने प्रॉफ़िट या लॉस के बाद बेच देना है. ये सब.
ज़रूरी नहीं है कि इन शोज़ में एंकर्स द्वारा दी जाने वाली रेकमंडेशन्स हमेशा सही निकलें, लेकिन ये ज़रूर है कि इन रेकमंडेशन्स को सुनकर काफ़ी लोग शेयर मार्केट में पैसा लगाते और निकालते हैं. मतलब ‘ट्रेडिंग वॉल्यूम’ या मात्रा इन रेकमंडेशन्स से बढ़ जाती है.
SEBI के चेयरमेन अजय त्यागी के पीछे SEBI का लोगो. (तस्वीर: PTI)
# खरीदने-बेचने की सलाह रेकमंडेशन दो तरह की हो सकती हैं. किसी शेयर को ख़रीदने की या बेचने (शॉर्ट करने) की. आपके पास अगर शेयर नहीं है, तब भी आप उन्हें बेच (शॉर्ट कर) सकते हैं. इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए ये स्टोरी पढ़ें.
ख़रीदने या बेचने, दोनों ही के रेकमंडेशन्स के कंपोनेंट एक से होते हैं. हम आपको ख़रीदने वाले रेकमंडेशन्स के कंपोनेंट बताते हैं, बेचने वाले आप अपने आप समझ जाएँगे.
# क्रय मूल्य: मतलब अभी अगर शेयर का मूल्य 50 रुपये चल रहा है तो रेकमेंडेशन देने वाला ये नहीं कहता कि ख़रीदो. वो कहता है कि जब इस शेयर का अमुक दाम हो जाए, तब ख़रीदो.
'हेमंत घई' और 'स्टॉक 20-20', वो एंकर और शो, जिनके बारे में ये स्टोरी है.
तो ‘CNBC आवाज़’ के ऐसे ही एक एंकर थे हेमंत घई, जो कई शोज़ में शेयर्स को लेकर रेकमंडेशन्स देते थे. उनके कुछ शोज़ थे, ‘स्टॉक 20-20’, ‘मुनाफ़े की तैयारी' और ‘पहला सौदा’. SEBI ने जो PDF अपलोड किया है, उसका संबंध ‘स्टॉक 20-20’ से है. सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार, हेमंत घई के इस शो में रोज़ कुछ शेयरों को खरीदने की सलाह (टार्गेट प्राइस और स्टॉप लॉस प्राइस के साथ) दी जाती है.
ट्रेड और रेकमंडेशन काफ़ी सिंक करते हैं. (सेबी के PDF का स्क्रीनग्रैब)
# BTST ट्रेड इसके नाम से ही काफ़ी कुछ ज़ाहिर है. इसमें शेयर्स पहले दिन ख़रीदे और दूसरे दिन बेच दिए जाते हैं. 'बाय टुडे, सेल टुमारो'. हालांकि यहां पर 'दिन' का मतलब वर्किंग या ट्रेडिंग डे से है. मतलब अगर शेयर शुक्रवार को ख़रीदे और सोमवार को बेचे गए हैं तो ये भी BTST ट्रेड कहलाएगा क्यूंकि शनिवार-रविवार मार्केट बंद रहता है. आपने आज शेयर ख़रीदे और अगले कुछ दिनों तक त्योहारों की छुट्टी और वीकेंड वग़ैरह के चलते 5 दिन बाद मार्केट खुले और अगर छठें दिन आपने अपने शेयर बेचें तो ये भी BTST ट्रेड कहलाएगा. अब ये इतना आसान सा कॉन्सेप्ट है कि इसे आसान भाषा में समझाना ज़रूरी भी नहीं.
हम आपको ये समझाएंगे कि BTST ट्रेड की अपनी एक अलग कैटिगरी क्यूं है. मतलब ऐसे तो ‘बाय टुडे, सेल डे आफ़्टर टुमारो’, ‘बाय टुडे, सेल आफ़्टर 5 डेज़’, ‘बाय टुडे, सेल आफ़्टर वन मंथ’ जैसी न जाने कितनी ही अलग-अलग कैटिगरी होनी चाहिए. लेकिन हैं नहीं. सिर्फ़ BTST अपने में स्पेशल है.
तो बात ये है कि भारत के दो सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण स्टॉक एक्सचेंज हैं BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज). यहां पर ट्रेड ‘T+2’ दिन के हिसाब से सैटल होते हैं. मतलब आज का ट्रेड दो दिन बाद सैटल होगा. सैटल होगा मतलब, आज आपने शेयर ख़रीदे तो आपको दो दिन बाद वो शेयर अपने डीमेट अकाउंट में रिफलेक्ट होंगे.
लेकिन शेयर मार्केट तो बहुत संवेदी है. पल-पल में शेयर्स के रेट बदलते रहते हैं. आज ख़रीदे शेयर अगर 2 दिन बाद मिलेंगे या आज बेचने के लिए डाले शेयर अगर 2 दिन बाद बिकेंगे तो पता नहीं, किए गए ट्रेड पर कितना नुक़सान हो जाएगा. है न?
अपनी फ़ैमिली या रिश्तेदारों के अकाउंट से ट्रेड करके ज़रूरी नहीं कि आप बच ही जाएं. (सेबी के PDF का स्क्रीनग्रैब)
चिंता मत कीजिए. ‘ट्रेड सैटल’ होने का मतलब ये नहीं कि आपको दो दिन बाद के रेट के हिसाब से पैसे देने पड़ेंगे. या अगर शेयर बेच रहे हैं तो 2 दिन बाद के रेट के हिसाब से पैसे मिलेंगे. होगा ये कि ट्रेड का आपका तुरंत 'एग्ज़ीक्यूट' हो जाएग, लेकिन सिस्टम पर दो दिन बाद रिफलेक्ट करेगा. या कहें कि शेयर्स की डिलीवरी दो दिन बाद होगी, पर उसी रेट पर होगी, जिस रेट पर आपने उसे आज ख़रीदा है. मतलब दो दिन बाद आप देखेंगे कि आपके अकाउंट में ख़रीदे गए शेयर्स तो आ गए हैं, लेकिन पैसे उसी दिन कट गए या उसी दिन के हिसाब से कटे जिस दिन आपने ट्रेडिंग की थी.
आसान भाषा में कहें तो एक बड़ी या एवरेज टाइप दुकान का सेटअप सोचिए. दिन भर ख़रीद बिक्री होती है. साथ ही हो सकता है सारी ख़रीद बिक्री दिन भर डॉक्यूमेंट भी की जा रही हो. लेकिन कितना फ़ायदा हुआ, कितना नुक़सान हुआ, दुकानदार को तब पता चलेगा, जब वो दुकान बढ़ाने के बाद गल्ले का पूरा हिसाब किताब एक साथ देखेगा. दरअसल वो तब ट्रेड सैटल कर रहा है. और इस दौरान अगर उसे पता चलता है कि उसे इतने का फ़ायदा या इतने का नुक़सान हुआ तो इसका मतलब ये तो नहीं है न कि उसकी दुकान में शॉपिंग अभी हो रही है.
बस एक्सचेंज मार्केट भी कहता है कि हिसाब किताब बाद में करेंगे, अभी ये कन्फ़र्मेशन ले लो कि ट्रेड हो गया. इतने रुपयों में हुआ. इतने शेयर का हुआ.
अब BTST ट्रेडिंग में आप क्या करते हैं कि आज (T) शेयर ख़रीदते हैं, कल (T +1) शेयर बेचते हैं और पसरों (T +2) ट्रेड सैटल होता है. मतलब अभी आपके पास शेयर्स की डिलीवरी हुई नहीं, उससे पहले ही आपने अपने ख़रीदे हुए शेयर्स बेच दिए. या जो शेयर्स आपके पास थे ही नहीं, उन्हें आपने बेच दिया. ऑफ़ कोर्स कल आने वाले थे पर अभी तो नहीं थे न आपके पास. लेकिन SEBI आपको सुविधा देता है कि डिलीवरी का इंतज़ार किए बिना भी आप अपने शेयर्स बेच सकते हैं.
इसलिए ही, अगर चुटकी लेकर कहें तो, ट्रेडिंग वाले सिलेबस में ‘BTST ट्रेडिंग’ का अलग से एक चैप्टर है.
अब आप कहेंगे कि-
इन्साइडर ट्रेडिंग करके शेयरों से करोड़ों कमाने की सोच रहे हैं तो ज़रा इसकी मंज़िल भी जान लीजिए.
BTST में डील करने वाले इसे इंट्राडे के मुक़ाबले इसलिए ज़्यादा पसंद करते हैं, क्यूंकि जब अगले दिन मार्केट 9:15 पर खुलता है तो शेयर का मूल्य वो नहीं रहता, जिस पर वो पिछले दिन बंद हुआ बल्कि ज़्यादातर उससे थोड़ा ऊपर या नीचे हो जाता है. कई बार बहुत ज़्यादा ऊपर या नीचे भी हो जाता है. इंट्रा-डे वाले इस ओवरनाइट उतार चढ़ाव का फ़ायदा नहीं उठा पाते.
ये BSE का कुछ दिनों पुराना कैंडलस्टिक चार्ट है. इसमें एक कैंडल का मतलब एक दिन की ट्रेडिंग. आप देख रहे होंगे कि दो दिनों की कैंडल के बीच हमेशा थोड़ा बहुत गैप रहता है, जिसे हमने अलग से तीर से दिखाया है. पीला तीर मतलब पहले वाले दिन जिस पॉइंट पर बंद हुआ, अगले दिन उससे अधिक पर खुला. सफ़ेद तीर मतलब, पहले वाले दिन जिस पॉइंट पर बंद हुआ, अगले दिन उससे कम पर खुला. इस गैप का फ़ायदा इंट्राडे ट्रेडर्स नहीं उठा पाते. (स्क्रीन ग्रैब: charting.bseindia.com)
# स्टोरी में वापस लौटते हैं तो हेमंत घई के मामले में होता क्या था? माना अगले दिन हेमंत घई को दर्शकों को कुछ रेकमंडेशन देनी है, तो वो पहले दिन अपनी पत्नी या मां के अकाउंट से शेयर्स ख़रीदते और अगले दिन अपने शो पर दर्शकों को उन्हीं शेयर्स को ख़रीदने की रेकमंडेशन देते, फिर अपनी पत्नी या मां के अकाउंट से वो शेयर्स बेच देते.
SEBI ने अपनी रिपोर्ट में ऐसे कई उदाहरण भी दिए. एक एंट्री बताती है,
Buy, Recommend, Sell, Repeat... (सेबी के PDF का स्क्रीनग्रैब)
पर ये समझने के लिए इससे हेमंत घई को कैसे फ़ायदा हुआ, आइए पहले समझते हैं कि शेयर्स की डिमांड एंड सप्लाई और ट्रेड कैसे एग्ज़ीक्यूट होते हैं. # कैसे पल-पल बढ़ते-घटते हैं शेयर्स के दाम ट्रेडिंग वाले समय में कभी किसी शेयर की चाल देखिए. हर दूसरे सेकेंड उसके दाम बदलते हैं. कैसे? देखिए किसी भी अन्य चीज़ की तरह शेयर्स के दाम भी 'डिमांड एंड सप्लाई' पर निर्भर करते हैं. अगर किसी शेयर की डिमांड बढ़ी तो उसके दाम बढ़ेंगे, अगर किसी शेयर की डिमांड घटी तो उसके दाम घटेंगे. पर इतनी ज़ल्दी-ज़ल्दी? आइए एक उदाहरण से समझते हैं कैसे-
एक कंपनी है XYZ. अभी उसके शेयर के दाम हैं 100 रुपये. कई लोग, जिनके पास ये शेयर्स हैं, चाहेंगे कि उन्हें इससे अधिक दाम मिले. तो कुछ लोग उसे 101 में बेचने को तैयार हैं. कुछ लोग 102 में, कुछ 103 में कुछ 104 में. उन्होंने मार्केट में ऐसे ही बिडिंग की है. फिर कुछ लोग जिनके पास शेयर्स नहीं है, वो ऑफ़-कोर्स चाहेंगे कि अभी के मूल्य से कम पर इसे ख़रीदें. तो उन्होंने ख़रीदने के लिए 99 रुपये की बिडिंग की है. फिर कुछ ने 98 की फिर कुछ ने 97 की….
अब अगर मार्केट में अचानक से कोई इन शेयर्स का ख़रीददार आ गया जिसे बिडिंग वग़ैरह के चक्कर में नहीं पड़ना, जिस रेट पर शेयर्स मिल रहे हैं, उसी रेट पर ख़रीद लेगा वो. तो यूं पहले वो 101 रुपये वालों के सारे शेयर्स ख़रीदेगा, क्यूंकि वही सबसे सस्ते में मिल रहे हैं. फिर कुछ शेयर्स, 102 रुपये में ख़रीदेगा. और अगर अब भी वो उतने शेयर्स नहीं ख़रीद पाया, जितने उसे चाहिए तो कुछ शेयर्स 103 रुपये में बेचने वालों से ख़रीदेगा. यूं अब शेयर का लास्ट ट्रेडिंग प्राइस हो गया 103 रुपये. और शेयर का यही LTP शेयर का प्राइस भी कह लिया जाता है. मतलब कि अंतिम बार उसकी ख़रीद-बिक्री कितने रुपयों में हुई.
एप्टेक के जिस शेयर-ट्रेडिंग की बात हम कर रहे हैं वो तो 'घई फ़ैमिली' की कारस्तानी का 'टिप ऑफ़ दी आइसबर्ग' है. (सांकेतिक तस्वीर: shiksha.com)
अब मानिए कोई अपने शेयर्स बेचना चाहता है. ढेर सारे. बिना बिडिंग किए. तो वो चाहेगा कि उसे अधिक से अधिक दाम मिले. तो सबसे पहले वो उनको शेयर्स बेचेगा जो इसे 99 रुपये में ख़रीदने को तैयार हैं, फिर बच गए तो उन्हें बेचेगा जो इसे 98 में ख़रीदेंगे. ऐसे करते-करते वो अपने सभी शेयर्स बेच डालेगा लेकिन सबसे कम दाम जो उसे मिला, वो शायद 95 रुपये हो. ऐसे वो शेयर का LTP 95 कर देगा और यही शेयर का मूल्य कहलाएगा.
यूं ये समझ में आता है कि अगर किसी शेयर के ढेरों ख़रीददार हो जाएं तो शेयर का LTP बढ़ता चला जाएगा. उसे ढेरों बेचने वाले हो जाएं तो LTP घटता चला जाएगा. और ये सब सिस्टम में पलक झपकते हो जाता है.
फिर इस घट-बढ़ के बाद जो LTP होगा, वही इस वक़्त का बेंचमार्क हो जाएगा. मतलब अब ट्रेडर्स इसी के इर्द-गिर्द अपनी बोलियां लगाएंगे. बेचने वाले इस मूल्य से कुछ ज़्यादा की, ख़रीदने वाले इस मूल्य से कुछ कम की. एक इंट्यूटिव उदाहारण सोचिए-
सीढ़ियों पर जोकर. पर ये ताश का पत्ता नहीं. (सांकेतिक इमेज, 'जोकर' मूवी से)
अब इस थॉट एक्सपेरिमेंट से शेयर मार्केट की इतनी चीज़ें पता चलती हैं कि सारी एक जगह लिखना भी मुश्किल है. जैसे चढ़ते वक्त आप 7 सीढ़ी में ही 100 पत्ते कैसे कमा गए? और उतरते वक्त आपको 10 सीढ़ियां क्यूं लगीं? ऑफ़ कोर्स चढ़ते वक्त हर सीढ़ी में ढेरों पत्ते रहे होंगे और उतरते वक्त हर सीढ़ी में कम नम्बर लिखे होंगे.
'एप्टेक लिमिटेड' के जिस शेयर का उदाहरण हमने दिया है, उसके वॉल्यूम में होने वाले बदलावों को भी SEBI ने मॉनिटर किया और फिर इसे एक टेबल से शेयर भी किया:
एक रेकमंडेशन से वॉल्यूम ऐसे चढ़ गया. (सेबी के PDF का स्क्रीनग्रैब)
टेबल में बताया गया 'टार्गेट प्राइस', 'स्टॉप लॉस' वगरैह क्या होते हैं, ये तो हम जानते ही हैं. 'वॉल्यूम' पर गौर करें तो हम पाते हैं कि जहां पिछले 10 दिनों का औसत वॉल्यूम 2.66 लाख के क़रीब था. अगले दस दिनों का औसत वॉल्यूम 3.33 लाख के क़रीब था. लेकिन जिस दिन ये स्टॉक रेकमंड किया गया, उस दिन वॉल्यूम शूट कर गया. क़रीब 4.14 लाख के क़रीब हो गया था.
तो ऐसे ही हमेशा सिर्फ़ रेकमंडेशन देने भर से शेयर कुछ समय के लिए तेज़ी से बढ़ जाता. लेकिन सिर्फ़ कुछ समय के लिए. फिर वो अपनी सामान्य चाल में आ जाता. देखिए, कोई शेयर करोड़ों की मात्रा में ट्रेड होता है, तो उसमें किसी रेकमंडेशन का कोई बड़ा या लंबे समय तक असर नहीं होता. लंबे समय तक तो एक ही चीज़ का असर रहता है. वो है उस कंपनी की परफ़ॉर्मेंस जिस कंपनी के शेयर्स हैं. लेकिन फिर भी CNBC आवाज़ कोई छोटा-मोटा मंच तो है नहीं. तो वो कुछ समय के लिए कुछ इंपेक्ट तो डालता ही होगा. तो इसी छोटी सी विंडो में घई परिवार खेल कर जाता था.
टाइमिंग देखिए. 9:00 बजे खुलने वाले शेयर मार्केट में 9:15 पर ट्रेडिंग शुरू होती है और हमारे 'एप्टेक' वाले उदाहारण में, ऑल्मोस्ट ट्रेडिंग शुरू होते ही ये लोग कल ख़रीदे हुए शेयर्स बेचना शुरू कर देते थे.
टाइमिंग भी, होती हैं घोटाले की ज़ुबां. (सेबी के PDF का स्क्रीनग्रैब)
SEBI का कहना है कि-
हेमंत घई, जया घई और श्याम मोहिनी घई को अगले आदेशों तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज़) की खरीद, बिक्री या सौदे करने से रोक दिया गया है. SEBI ने तीनों के सभी बैंक अकाउंट को भी फ्रीज़ कर दिया है. साथ ही, जब तक मामले की विस्तृत जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इनके 2.95 करोड़ फ्रीज रहेंगे.
सेबी ने ‘CNBC आवाज़’ को भी सलाह दी कि वो SEBI के Prohibition of Fraudulent and Unfair Trade Practices(FUTP)’ के प्रथमदृष्टया उल्लंघन के बारे में हेमंत घई द्वारा होस्ट किए गए शो के दर्शकों को सूचित करे.
डाला. इसमें हेमंत घई और उनके परिवार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए. उन्हें ट्रेडिंग करने और निवेश सलाह देने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया. अब आप पूछेंगे कि इस ख़बर को आज क्यूं बताया जा रहा है? तो जवाब ये है कि इस स्टोरी का मुख्य उद्देश्य ख़बर बताना नहीं, उसके माध्यम से फ़ाइनेंस, शेयर मार्केट और इस पूरे मुद्दे से जुड़े कई टेक्निकल टर्म्स को समझना-समझाना है. आसान भाषा में. लेकिन फ़ॉर अ चेंज, पूरा मामला जानते हुए बीच-बीच में टेक्निकल टर्म्स और कॉन्सेप्ट आसान भाषा में समझते हुए चलते हैं. # कहानी ऐसे शुरू होती है ‘CNBC आवाज़' हिंदी का एक ‘बिज़नेस न्यूज़’ चैनल है. इसमें फ़ाइनेंस से जुड़ी बाकी खबरों के अलावा शेयर मार्केट से जुड़ी ख़बरें भी रहती हैं. साथ ही कुछ ऐसे स्पेशल सेग्मेंट, एंकर और गेस्ट हैं, जिनके माध्यम से शेयर्स को लेकर राय दी जाती है.
राय मतलब, कौन सा शेयर ख़रीदना है. कब ख़रीदना है. कब तक इन शेयर्स को होल्ड करना है. कितने प्रॉफ़िट या लॉस के बाद बेच देना है. ये सब.
ज़रूरी नहीं है कि इन शोज़ में एंकर्स द्वारा दी जाने वाली रेकमंडेशन्स हमेशा सही निकलें, लेकिन ये ज़रूर है कि इन रेकमंडेशन्स को सुनकर काफ़ी लोग शेयर मार्केट में पैसा लगाते और निकालते हैं. मतलब ‘ट्रेडिंग वॉल्यूम’ या मात्रा इन रेकमंडेशन्स से बढ़ जाती है.
SEBI के चेयरमेन अजय त्यागी के पीछे SEBI का लोगो. (तस्वीर: PTI)# खरीदने-बेचने की सलाह रेकमंडेशन दो तरह की हो सकती हैं. किसी शेयर को ख़रीदने की या बेचने (शॉर्ट करने) की. आपके पास अगर शेयर नहीं है, तब भी आप उन्हें बेच (शॉर्ट कर) सकते हैं. इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए ये स्टोरी पढ़ें.
ख़रीदने या बेचने, दोनों ही के रेकमंडेशन्स के कंपोनेंट एक से होते हैं. हम आपको ख़रीदने वाले रेकमंडेशन्स के कंपोनेंट बताते हैं, बेचने वाले आप अपने आप समझ जाएँगे.
# क्रय मूल्य: मतलब अभी अगर शेयर का मूल्य 50 रुपये चल रहा है तो रेकमेंडेशन देने वाला ये नहीं कहता कि ख़रीदो. वो कहता है कि जब इस शेयर का अमुक दाम हो जाए, तब ख़रीदो.
buy @ 49: मतलब जब इसका दाम 49 रुपये हो जाए, तब ख़रीदो.# टार्गेट: वो दाम, जिस दाम पर अगर शेयर पहुंच जाए तो उसे बेच डालो.
sell @ 55: मतलब जब इसका दाम 55 रुपये हो जाए तो ख़रीदे हुए शेयर बेच डालो. यूं 55 रुपये इस शेयर का टार्गेट प्राइस हुआ. क्यूंकि रेकमंडेशन देने वाले का अनुमान है कि इससे ज़्यादा बढ़ने की इस शेयर की औक़ात फिलहाल नहीं है. प्रॉफ़िट कमाओ और निकल लो.# स्टॉप लॉस: हर रेकमंडेशन एक भविष्यवाणी ही होती है. कोई ज़रूरी नहीं कि भविष्यवाणी सटीक हो. लेकिन अगर भविष्यवाणी ग़लत भी हो तो भी नुक़सान कम से कम हो, इसके लिए हर एक्सपर्ट शेयर रेकमंड करते वक़्त उसका स्टॉप लॉस भी बताता है.
stop loss @ 45: मतलब अगर शेयर बढ़ने के बदले घटने लगे तो 45 रुपये तक ही रुको, उसके बाद इसे बेचकर घाटा खाकर निकल लो. क्यूंकि एक्सपर्ट के अनुसार अगर इससे ज़्यादा रुके तो ज़्यादा नुक़सान हो सकता है.# ट्रेल: कई बार जब टार्गेट अचीव हो जाता है तो आपने एक्सपर्ट को कहते सुना होगा कि स्टॉप लॉस ट्रेल करें. ये अच्छा कॉन्सेप्ट है. इसके अनुसार आप शेयर के टार्गेट तक पहुँचने के बाद भी उसे बेचें नहीं, बस स्टॉप लॉस को थोड़ा ऊपर की ओर खिसका दें. जैसे माना 50 रुपये में ख़रीदे गए शेयर का टार्गेट प्राइस 55 था और वो अभी 57 पर पहुंच गया है तो आप उस शेयर को बेचने के बजाय अपना स्टॉप लॉस, जो पहले 45 रुपये में था, उसे 55 रुपये में लगा दें. यहां पर अगर शेयर बिक भी गया तो भी आप जितने प्रॉफ़िट की या जिस टार्गेट प्राइस उम्मीद कर रहे थे वो तो मिल ही गया. फिर जैसे-जैसे शेयर का रेट बढ़ता जाए, अपने स्टॉप-लॉस को भी ऊपर की ओर बढ़ाते चले जाएँ. 59 हुआ तो स्टॉप लॉस 57 पर और 61 हुआ तो 59 रुपये पर स्टॉप-लॉस लगा दें. ‘स्टॉप-लॉस लगा दें’ से हमारा मतलब ये है कि डीमैट अकाउंट आपको सुविधा देता है कि आप अपने ट्रेड के लिए एक स्टॉप-लॉस लगा सकें और उसे चाहें कितनी भी बार बदल सकें. शेयर के दाम इस स्टॉप लॉस के नीचे जाने से पहले ही आपके शेयर्स ऑटोमैटिकली बिक जाएँगे.
'हेमंत घई' और 'स्टॉक 20-20', वो एंकर और शो, जिनके बारे में ये स्टोरी है.तो ‘CNBC आवाज़’ के ऐसे ही एक एंकर थे हेमंत घई, जो कई शोज़ में शेयर्स को लेकर रेकमंडेशन्स देते थे. उनके कुछ शोज़ थे, ‘स्टॉक 20-20’, ‘मुनाफ़े की तैयारी' और ‘पहला सौदा’. SEBI ने जो PDF अपलोड किया है, उसका संबंध ‘स्टॉक 20-20’ से है. सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार, हेमंत घई के इस शो में रोज़ कुछ शेयरों को खरीदने की सलाह (टार्गेट प्राइस और स्टॉप लॉस प्राइस के साथ) दी जाती है.
प्रथमदृष्टया ये पाया गया है कि हेमंत की पत्नी जया और उनकी मां श्याम मोहिनी के ट्रेडिंग अकाउंट से 1 जनवरी 2019 और 31 मई 2020 के बीच NSE और BSE से कुछ ऐसे शेयर्स ख़रीदे और बेचे गए हैं, जिनकी ख़रीद-फ़रोख़्त हेमंत घई की रेकमंडेशन्स की टाइमिंग के साथ मैच करती है. BTST (बाय टुडे सेल टुमारो मतलब आज ख़रीदें कल बेचें) पैटर्न के इन ट्रेड्स के आधार पर SEBI ने प्रारंभिक जांच की.
ट्रेड और रेकमंडेशन काफ़ी सिंक करते हैं. (सेबी के PDF का स्क्रीनग्रैब)# BTST ट्रेड इसके नाम से ही काफ़ी कुछ ज़ाहिर है. इसमें शेयर्स पहले दिन ख़रीदे और दूसरे दिन बेच दिए जाते हैं. 'बाय टुडे, सेल टुमारो'. हालांकि यहां पर 'दिन' का मतलब वर्किंग या ट्रेडिंग डे से है. मतलब अगर शेयर शुक्रवार को ख़रीदे और सोमवार को बेचे गए हैं तो ये भी BTST ट्रेड कहलाएगा क्यूंकि शनिवार-रविवार मार्केट बंद रहता है. आपने आज शेयर ख़रीदे और अगले कुछ दिनों तक त्योहारों की छुट्टी और वीकेंड वग़ैरह के चलते 5 दिन बाद मार्केट खुले और अगर छठें दिन आपने अपने शेयर बेचें तो ये भी BTST ट्रेड कहलाएगा. अब ये इतना आसान सा कॉन्सेप्ट है कि इसे आसान भाषा में समझाना ज़रूरी भी नहीं.
हम आपको ये समझाएंगे कि BTST ट्रेड की अपनी एक अलग कैटिगरी क्यूं है. मतलब ऐसे तो ‘बाय टुडे, सेल डे आफ़्टर टुमारो’, ‘बाय टुडे, सेल आफ़्टर 5 डेज़’, ‘बाय टुडे, सेल आफ़्टर वन मंथ’ जैसी न जाने कितनी ही अलग-अलग कैटिगरी होनी चाहिए. लेकिन हैं नहीं. सिर्फ़ BTST अपने में स्पेशल है.
तो बात ये है कि भारत के दो सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण स्टॉक एक्सचेंज हैं BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज). यहां पर ट्रेड ‘T+2’ दिन के हिसाब से सैटल होते हैं. मतलब आज का ट्रेड दो दिन बाद सैटल होगा. सैटल होगा मतलब, आज आपने शेयर ख़रीदे तो आपको दो दिन बाद वो शेयर अपने डीमेट अकाउंट में रिफलेक्ट होंगे.
लेकिन शेयर मार्केट तो बहुत संवेदी है. पल-पल में शेयर्स के रेट बदलते रहते हैं. आज ख़रीदे शेयर अगर 2 दिन बाद मिलेंगे या आज बेचने के लिए डाले शेयर अगर 2 दिन बाद बिकेंगे तो पता नहीं, किए गए ट्रेड पर कितना नुक़सान हो जाएगा. है न?
अपनी फ़ैमिली या रिश्तेदारों के अकाउंट से ट्रेड करके ज़रूरी नहीं कि आप बच ही जाएं. (सेबी के PDF का स्क्रीनग्रैब)चिंता मत कीजिए. ‘ट्रेड सैटल’ होने का मतलब ये नहीं कि आपको दो दिन बाद के रेट के हिसाब से पैसे देने पड़ेंगे. या अगर शेयर बेच रहे हैं तो 2 दिन बाद के रेट के हिसाब से पैसे मिलेंगे. होगा ये कि ट्रेड का आपका तुरंत 'एग्ज़ीक्यूट' हो जाएग, लेकिन सिस्टम पर दो दिन बाद रिफलेक्ट करेगा. या कहें कि शेयर्स की डिलीवरी दो दिन बाद होगी, पर उसी रेट पर होगी, जिस रेट पर आपने उसे आज ख़रीदा है. मतलब दो दिन बाद आप देखेंगे कि आपके अकाउंट में ख़रीदे गए शेयर्स तो आ गए हैं, लेकिन पैसे उसी दिन कट गए या उसी दिन के हिसाब से कटे जिस दिन आपने ट्रेडिंग की थी.
आसान भाषा में कहें तो एक बड़ी या एवरेज टाइप दुकान का सेटअप सोचिए. दिन भर ख़रीद बिक्री होती है. साथ ही हो सकता है सारी ख़रीद बिक्री दिन भर डॉक्यूमेंट भी की जा रही हो. लेकिन कितना फ़ायदा हुआ, कितना नुक़सान हुआ, दुकानदार को तब पता चलेगा, जब वो दुकान बढ़ाने के बाद गल्ले का पूरा हिसाब किताब एक साथ देखेगा. दरअसल वो तब ट्रेड सैटल कर रहा है. और इस दौरान अगर उसे पता चलता है कि उसे इतने का फ़ायदा या इतने का नुक़सान हुआ तो इसका मतलब ये तो नहीं है न कि उसकी दुकान में शॉपिंग अभी हो रही है.
बस एक्सचेंज मार्केट भी कहता है कि हिसाब किताब बाद में करेंगे, अभी ये कन्फ़र्मेशन ले लो कि ट्रेड हो गया. इतने रुपयों में हुआ. इतने शेयर का हुआ.
अब BTST ट्रेडिंग में आप क्या करते हैं कि आज (T) शेयर ख़रीदते हैं, कल (T +1) शेयर बेचते हैं और पसरों (T +2) ट्रेड सैटल होता है. मतलब अभी आपके पास शेयर्स की डिलीवरी हुई नहीं, उससे पहले ही आपने अपने ख़रीदे हुए शेयर्स बेच दिए. या जो शेयर्स आपके पास थे ही नहीं, उन्हें आपने बेच दिया. ऑफ़ कोर्स कल आने वाले थे पर अभी तो नहीं थे न आपके पास. लेकिन SEBI आपको सुविधा देता है कि डिलीवरी का इंतज़ार किए बिना भी आप अपने शेयर्स बेच सकते हैं.
इसलिए ही, अगर चुटकी लेकर कहें तो, ट्रेडिंग वाले सिलेबस में ‘BTST ट्रेडिंग’ का अलग से एक चैप्टर है.
अब आप कहेंगे कि-
इस हिसाब से भी कम से कम एक कैटिगरी ‘बाय टुडे, सेल टुडे' भी तो होनी ही चाहिए. उसमें भी तो ट्रेड सैटल होने से पहले ही प्रॉफ़िट-लॉस हो जा रहा.तो उत्तर है कि-
बिल्कुल है. उसे इंट्राडे ट्रेडिंग कहते हैं.इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में आप हमारे इस आर्टिकल में विस्तार से पढ़ सकते हैं-
इन्साइडर ट्रेडिंग करके शेयरों से करोड़ों कमाने की सोच रहे हैं तो ज़रा इसकी मंज़िल भी जान लीजिए.
BTST में डील करने वाले इसे इंट्राडे के मुक़ाबले इसलिए ज़्यादा पसंद करते हैं, क्यूंकि जब अगले दिन मार्केट 9:15 पर खुलता है तो शेयर का मूल्य वो नहीं रहता, जिस पर वो पिछले दिन बंद हुआ बल्कि ज़्यादातर उससे थोड़ा ऊपर या नीचे हो जाता है. कई बार बहुत ज़्यादा ऊपर या नीचे भी हो जाता है. इंट्रा-डे वाले इस ओवरनाइट उतार चढ़ाव का फ़ायदा नहीं उठा पाते.
ये BSE का कुछ दिनों पुराना कैंडलस्टिक चार्ट है. इसमें एक कैंडल का मतलब एक दिन की ट्रेडिंग. आप देख रहे होंगे कि दो दिनों की कैंडल के बीच हमेशा थोड़ा बहुत गैप रहता है, जिसे हमने अलग से तीर से दिखाया है. पीला तीर मतलब पहले वाले दिन जिस पॉइंट पर बंद हुआ, अगले दिन उससे अधिक पर खुला. सफ़ेद तीर मतलब, पहले वाले दिन जिस पॉइंट पर बंद हुआ, अगले दिन उससे कम पर खुला. इस गैप का फ़ायदा इंट्राडे ट्रेडर्स नहीं उठा पाते. (स्क्रीन ग्रैब: charting.bseindia.com)# स्टोरी में वापस लौटते हैं तो हेमंत घई के मामले में होता क्या था? माना अगले दिन हेमंत घई को दर्शकों को कुछ रेकमंडेशन देनी है, तो वो पहले दिन अपनी पत्नी या मां के अकाउंट से शेयर्स ख़रीदते और अगले दिन अपने शो पर दर्शकों को उन्हीं शेयर्स को ख़रीदने की रेकमंडेशन देते, फिर अपनी पत्नी या मां के अकाउंट से वो शेयर्स बेच देते.
SEBI ने अपनी रिपोर्ट में ऐसे कई उदाहरण भी दिए. एक एंट्री बताती है,
पता चला है कि 9 जनवरी 2020 को हेमंत घई ने 'एप्टेक लिमिटेड' के शेयर ख़रीदने का रेकमंडेशन दिया था. इससे एक दिन पहले 8 जनवरी, 2020 को जया घई ने 'एप्टेक लिमिटेड' के 52,000 शेयर खरीदे. और सारे 52,000 शेयर 9 जनवरी 2020 को 9:15:08 से 9:22:20 के बीच बेच दिए गए.स्क्रीनशॉट हाज़िर है-
Buy, Recommend, Sell, Repeat... (सेबी के PDF का स्क्रीनग्रैब)पर ये समझने के लिए इससे हेमंत घई को कैसे फ़ायदा हुआ, आइए पहले समझते हैं कि शेयर्स की डिमांड एंड सप्लाई और ट्रेड कैसे एग्ज़ीक्यूट होते हैं. # कैसे पल-पल बढ़ते-घटते हैं शेयर्स के दाम ट्रेडिंग वाले समय में कभी किसी शेयर की चाल देखिए. हर दूसरे सेकेंड उसके दाम बदलते हैं. कैसे? देखिए किसी भी अन्य चीज़ की तरह शेयर्स के दाम भी 'डिमांड एंड सप्लाई' पर निर्भर करते हैं. अगर किसी शेयर की डिमांड बढ़ी तो उसके दाम बढ़ेंगे, अगर किसी शेयर की डिमांड घटी तो उसके दाम घटेंगे. पर इतनी ज़ल्दी-ज़ल्दी? आइए एक उदाहरण से समझते हैं कैसे-
एक कंपनी है XYZ. अभी उसके शेयर के दाम हैं 100 रुपये. कई लोग, जिनके पास ये शेयर्स हैं, चाहेंगे कि उन्हें इससे अधिक दाम मिले. तो कुछ लोग उसे 101 में बेचने को तैयार हैं. कुछ लोग 102 में, कुछ 103 में कुछ 104 में. उन्होंने मार्केट में ऐसे ही बिडिंग की है. फिर कुछ लोग जिनके पास शेयर्स नहीं है, वो ऑफ़-कोर्स चाहेंगे कि अभी के मूल्य से कम पर इसे ख़रीदें. तो उन्होंने ख़रीदने के लिए 99 रुपये की बिडिंग की है. फिर कुछ ने 98 की फिर कुछ ने 97 की….
अब अगर मार्केट में अचानक से कोई इन शेयर्स का ख़रीददार आ गया जिसे बिडिंग वग़ैरह के चक्कर में नहीं पड़ना, जिस रेट पर शेयर्स मिल रहे हैं, उसी रेट पर ख़रीद लेगा वो. तो यूं पहले वो 101 रुपये वालों के सारे शेयर्स ख़रीदेगा, क्यूंकि वही सबसे सस्ते में मिल रहे हैं. फिर कुछ शेयर्स, 102 रुपये में ख़रीदेगा. और अगर अब भी वो उतने शेयर्स नहीं ख़रीद पाया, जितने उसे चाहिए तो कुछ शेयर्स 103 रुपये में बेचने वालों से ख़रीदेगा. यूं अब शेयर का लास्ट ट्रेडिंग प्राइस हो गया 103 रुपये. और शेयर का यही LTP शेयर का प्राइस भी कह लिया जाता है. मतलब कि अंतिम बार उसकी ख़रीद-बिक्री कितने रुपयों में हुई.
एप्टेक के जिस शेयर-ट्रेडिंग की बात हम कर रहे हैं वो तो 'घई फ़ैमिली' की कारस्तानी का 'टिप ऑफ़ दी आइसबर्ग' है. (सांकेतिक तस्वीर: shiksha.com)अब मानिए कोई अपने शेयर्स बेचना चाहता है. ढेर सारे. बिना बिडिंग किए. तो वो चाहेगा कि उसे अधिक से अधिक दाम मिले. तो सबसे पहले वो उनको शेयर्स बेचेगा जो इसे 99 रुपये में ख़रीदने को तैयार हैं, फिर बच गए तो उन्हें बेचेगा जो इसे 98 में ख़रीदेंगे. ऐसे करते-करते वो अपने सभी शेयर्स बेच डालेगा लेकिन सबसे कम दाम जो उसे मिला, वो शायद 95 रुपये हो. ऐसे वो शेयर का LTP 95 कर देगा और यही शेयर का मूल्य कहलाएगा.
यूं ये समझ में आता है कि अगर किसी शेयर के ढेरों ख़रीददार हो जाएं तो शेयर का LTP बढ़ता चला जाएगा. उसे ढेरों बेचने वाले हो जाएं तो LTP घटता चला जाएगा. और ये सब सिस्टम में पलक झपकते हो जाता है.
फिर इस घट-बढ़ के बाद जो LTP होगा, वही इस वक़्त का बेंचमार्क हो जाएगा. मतलब अब ट्रेडर्स इसी के इर्द-गिर्द अपनी बोलियां लगाएंगे. बेचने वाले इस मूल्य से कुछ ज़्यादा की, ख़रीदने वाले इस मूल्य से कुछ कम की. एक इंट्यूटिव उदाहारण सोचिए-
एक सीढ़ी के हर स्टेप में में ढेर सारे ताश के पत्ते गिरे हैं. टास्क ये है कि आप कम से कम सीढ़ी चढ़ें और 100 पत्ते इकट्ठा कर लें. तो आप चढ़ते हुए हर सीढ़ी के सारे पत्ते इकट्ठा करना चाहेंगे. पहली सीढ़ी में 20 पत्ते पड़े थे. दूसरी में 15… और ऐसे कर-कर के जब तक आपकी जेब में 100 पत्ते हुए, आप 7 सीढ़ियां चढ़ गए.
इसी के उलट अब अगर आपको टास्क दिया जाए कि आपके जेब में जो 100 ताश के पत्ते हैं उन्हें नीचे उतरते हुए आपको गिराते चले जाना हैं. टास्क ये कि आप न्यूनतम कितनी सीढ़ियां उतरेंगे. आप तो चाहेंगे कि सारे पत्ते पहली ही सीढ़ी में गिरा दिए जाएं. पर अबकी बार हर सीढ़ी में एक रेंडम नम्बर लिखा है. आप महत्तम उतने ही पत्ते उस सीढ़ी में गिरा सकते हो. तो आप कभी नहीं चाहोगे कि जो नम्बर सीढ़ी में मेंशन है, उससे कम पत्ते गिराओ. यूं जब आपके सारे पत्ते ख़त्म हो चुके होते हैं तो आप पाते हैं कि आप 10 सीढ़ियां उतर चुके हो.
सीढ़ियों पर जोकर. पर ये ताश का पत्ता नहीं. (सांकेतिक इमेज, 'जोकर' मूवी से)अब इस थॉट एक्सपेरिमेंट से शेयर मार्केट की इतनी चीज़ें पता चलती हैं कि सारी एक जगह लिखना भी मुश्किल है. जैसे चढ़ते वक्त आप 7 सीढ़ी में ही 100 पत्ते कैसे कमा गए? और उतरते वक्त आपको 10 सीढ़ियां क्यूं लगीं? ऑफ़ कोर्स चढ़ते वक्त हर सीढ़ी में ढेरों पत्ते रहे होंगे और उतरते वक्त हर सीढ़ी में कम नम्बर लिखे होंगे.
मतलब रिलेट करके देखिए, कि 100 शेयर्स की ख़रीद पर जो शेयर 7 रुपये चढ़ा, वही 100 शेयर्स बेचने के दौरान 10 रुपये तक घट गया. क्यूं? क्यूंकि जब आप बेच रहे थे तो ‘वॉल्यूम’ कम था ख़रीदने वालों का. जब आप ख़रीद रहे थे तो बेचने वालों की क़तार लगी थी.तो हमें इंट्यूटिवली समझ में आया कि शेयर मार्केट में पल-पल बदलते रेट्स के पीछे का फ़ंडा क्या है. साथ ही वॉल्यूम भी समझ में आया. और ये भी कि किसी शेयर के रेट्स के घटने बढ़ने में ‘वॉल्यूम’ (यानी डिमांड एंड सप्लाई) का ही बहुत बड़ा हाथ है. साथ ही ‘वॉल्यूम’ ही वो शै है जो डिसाइड करती है कि किसी शेयर का बढ़ना-घटना कितना तेज़ या कितना धीमे होगा. # आगे की स्टोरी- तो होता क्या था कि घई परिवार उस शेयर को पहले ही दिन ख़रीद के रख लेता जिसकी रेकमंडेशन हेमंत घई अगले दिन देने वाले होते. जैसे ही हेमंत उस शेयर को ख़रीदने की रेकमंडेशन देते तो उस शेयर का वॉल्यूम बढ़ जाता. ख़रीदने वालों की लाइन लग जाती. और शेयर की क़ीमत बढ़नी शुरू हो जाती. ज़रा सीढ़ी वाले थॉट एक्सपेरिमेंट को फिर रिकॉल करिए.
'एप्टेक लिमिटेड' के जिस शेयर का उदाहरण हमने दिया है, उसके वॉल्यूम में होने वाले बदलावों को भी SEBI ने मॉनिटर किया और फिर इसे एक टेबल से शेयर भी किया:
एक रेकमंडेशन से वॉल्यूम ऐसे चढ़ गया. (सेबी के PDF का स्क्रीनग्रैब)टेबल में बताया गया 'टार्गेट प्राइस', 'स्टॉप लॉस' वगरैह क्या होते हैं, ये तो हम जानते ही हैं. 'वॉल्यूम' पर गौर करें तो हम पाते हैं कि जहां पिछले 10 दिनों का औसत वॉल्यूम 2.66 लाख के क़रीब था. अगले दस दिनों का औसत वॉल्यूम 3.33 लाख के क़रीब था. लेकिन जिस दिन ये स्टॉक रेकमंड किया गया, उस दिन वॉल्यूम शूट कर गया. क़रीब 4.14 लाख के क़रीब हो गया था.
तो ऐसे ही हमेशा सिर्फ़ रेकमंडेशन देने भर से शेयर कुछ समय के लिए तेज़ी से बढ़ जाता. लेकिन सिर्फ़ कुछ समय के लिए. फिर वो अपनी सामान्य चाल में आ जाता. देखिए, कोई शेयर करोड़ों की मात्रा में ट्रेड होता है, तो उसमें किसी रेकमंडेशन का कोई बड़ा या लंबे समय तक असर नहीं होता. लंबे समय तक तो एक ही चीज़ का असर रहता है. वो है उस कंपनी की परफ़ॉर्मेंस जिस कंपनी के शेयर्स हैं. लेकिन फिर भी CNBC आवाज़ कोई छोटा-मोटा मंच तो है नहीं. तो वो कुछ समय के लिए कुछ इंपेक्ट तो डालता ही होगा. तो इसी छोटी सी विंडो में घई परिवार खेल कर जाता था.
टाइमिंग देखिए. 9:00 बजे खुलने वाले शेयर मार्केट में 9:15 पर ट्रेडिंग शुरू होती है और हमारे 'एप्टेक' वाले उदाहारण में, ऑल्मोस्ट ट्रेडिंग शुरू होते ही ये लोग कल ख़रीदे हुए शेयर्स बेचना शुरू कर देते थे.
टाइमिंग भी, होती हैं घोटाले की ज़ुबां. (सेबी के PDF का स्क्रीनग्रैब)SEBI का कहना है कि-
यूं हेमंत घई ने क़रीब 2.95 करोड़ रुपये अवैध तरीक़े से कमाए. इन ट्रेड्स को मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड, MAS कंसल्टेंसी, मेहसाणा-गुजरात के अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से किया गया था. SEBI ने ब्रोकर और घई के बीच हुई कॉल्स के डेटा को भी जांचा, जिससे ये स्थापित हो सके कि अपनी मां और अपनी पत्नी के अकाउंट से दरअसल हेमंत ही ट्रेडिंग कर रहे थे. SEBI इस नतीजे पर भी पहुंचा कि हेमंत घई को शो में की जाने वाली सिफारिशों के बारे में पहले से जानकारी थी और इसका उन्होंने प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया.SEBI ने अपने आदेश में कहा कि हेमंत घई के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सिक्योरिटी मार्केट से जुड़ी निवेश सलाह देने, सेल-बाय रेकमंडेशन देने, शोध रिपोर्ट प्रकाशित करने जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
हेमंत घई, जया घई और श्याम मोहिनी घई को अगले आदेशों तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज़) की खरीद, बिक्री या सौदे करने से रोक दिया गया है. SEBI ने तीनों के सभी बैंक अकाउंट को भी फ्रीज़ कर दिया है. साथ ही, जब तक मामले की विस्तृत जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इनके 2.95 करोड़ फ्रीज रहेंगे.
सेबी ने ‘CNBC आवाज़’ को भी सलाह दी कि वो SEBI के Prohibition of Fraudulent and Unfair Trade Practices(FUTP)’ के प्रथमदृष्टया उल्लंघन के बारे में हेमंत घई द्वारा होस्ट किए गए शो के दर्शकों को सूचित करे.

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