कोई जानवर कब कहलाता है आदमखोर? कैसे जारी होते हैं उसे मारने के आदेश?
कहा जा रहा है कि पुणे में एक तेंदुआ आदमखोर हो गया है.
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इन दिनों तेंदुए कम ही देखने को मिलते हैं. ये फोटो कोलकाता का है. फोटो- PTI
इंसान और जानवर के बीच टकराव के मामले नए नहीं हैं. अक्सर दोनों के बीच टकराव होता है. कई बार किसी एक की जान जाती है. हाल ही में महाराष्ट्र के वन विभाग ने एक तेंदुए को आदमखोर (man eater) घोषित कर दिया है. वन विभाग ने अपने आदेश में कहा कि इस खतरनाक तेंदुए को या तो काबू किया जाए वरना मार गिराया जाए. आपको बताएंगे कि किसी तेंदुए को आदमखोर कब घोषित किया जाता है लेकिन उससे पहले बताते हैं ये मामला.
तेंदुए को मारने के आदेश
सोमवार. 7 दिसंबर को इस तेंदुए ने आठ साल की बच्ची को मार डाला. इससे पहले ये तेंदुआ सोलापुर, बीड, अहमदनगर और औरंगाबाद जिलों में सात लोगों की जान ले चुका है. राज्य के प्रधान वन संरक्षक की ओर से जारी आदेश के मुताबिक 31 दिसंबर तक या तो इस तेंदुए को पकड़ लेना है या फिर मार गिराना है. उन्होंने कहा कि तेंदुए ने इस पूरे इलाके में रहने वाले लोगों में डर पैदा कर दिया है और अब ऐसे में लगता है कि तेंदुआ आदमखोर हो गया है.
पुणे के प्रभागीय वन संरक्षक राहुल पाटिल ने कहा,
ये तस्वीर मई 2020 की है जब हैदराबाद में एक तेंदुए को बीच सड़क पर बैठे देखा गया था. फोटो- PTI
कैसे घोषित किया जाता है आदमखोर?
अब ये मामला जानने के बाद सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर किसी जानवर को आदमखोर कब और कैसे घोषित किया जाता है. ये जानने के लिए हमने बात की कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर राहुल कुमार से. फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने 'द लल्लनटॉप' को बताया, राहुल कुमार ने कहा कि जानवर अमूमन अपने इलाकों में रहते हैं और इंसानों पर हमला नहीं करते. हजार में कोई एक बाघ होता है जो इंसान पर हमला करेगा. लैपर्ड भी इंसानों से दूरी रखते हैं. उन्होंने कहा, ये तो आप समझ गए होंगे कि आदमखोर आम बोलचाल की भाषा का शब्द है और किसी जानवर को विशेष परिस्थितियों में ही मारा जा सकता है लेकिन अगर तय वक्त में उसे मारा ना जा सके तो क्या होगा? ऐसी स्थिति के लिए क्या प्रावधान है? कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर राहुल कुमार कहते हैं, अब सवाल ये उठता है कि क्या इन्हें मारा जाना जरूरी है? क्या कोई ऐसा तरीका नहीं, जिससे इनको पकड़ लिया जाए और एक दुर्लभ किस्म के जानवर की जान ना जाए. पेटा समेत पूरी दुनिया के पशु प्रेमी भी इस तरह के शिकार के खिलाफ आवाज उठाते रहते हैं. साल 2018 में जब एक आदमखोर बाघिन को मारा गया था, तब भी ये सवाल उठे थे. इसका जवाब देते हुए राहुल कहते हैं, कौन जारी करता है मारने के आदेश?
2016 बैच के IFS ऑफिसर नवाकिशोर रेड्डी ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन (chief wildlife warden) ही किसी जानवर को मारने के आदेश जारी कर सकते हैं. वाइल्डलाइफ एक्ट 1972 के सेक्शन 11 (1) में इसकी जानकारी दी गई है. हर राज्य में एक चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन होते हैं और उन्हीं के आदेश पर किसी खूंखार हो चुके जानवर का शिकार किया जा सकता है.
कितने तेंदुओं की जान गई
महाराष्ट्र में साल 2020 में 172 तेंदुओं की जान चली गई. इनमें से 86 तेंदुए अपने आप मर गए जबकि सड़क दुर्घटनाओं में 34 तेंदुओं की मौत हुई. 25 तेंदुए अवैध शिकार के कारण मारे गए जबकि 10 तेंदुए अन्य वजहों से जान गवां बैठे. अब महाराष्ट्र में 669 तेंदुए बचे हुए हैं.
इंसान और जानवरों के बीच संघर्ष
भारत की मौजूदा आबादी 130 करोड़ से अधिक है. हर कहीं इंसानों की मौजूदगी है. जंगल सिमट रहे हैं और जानवरों के लिए दायरा छोटा होता जा रहा है. चंद दिनों पहले की ही बात है, जब गाजियाबाद की पॉश कॉलोनी में तेंदुए को घूमते देखा गया था. हर कुछ दिन के बाद अखबारों में रिहायशी इलाकों में जंगली जानवरों के घूमने की खबरें और तस्वीरें छपती रहती हैं. तभी मेरठ से, तो कभी बिजनौर से ऐसे मामले सामने आते रहते हैं. आप केवल गूगल पर बाघ और इलाके का नाम लिखें, नतीजे आपके सामने होंगे. खैर, हमें उम्मीद है कि आपको इस बारे में हर जरूरी जानकारी मिल गई होगी. लेकिन अगर आपके पास इससे जुड़ा कोई और फैक्ट है या फिर हमसे कोई फैक्ट मिस हो गया है तो आप हमें कॉमेंट में जरूर बताएं.
तेंदुए को मारने के आदेश
सोमवार. 7 दिसंबर को इस तेंदुए ने आठ साल की बच्ची को मार डाला. इससे पहले ये तेंदुआ सोलापुर, बीड, अहमदनगर और औरंगाबाद जिलों में सात लोगों की जान ले चुका है. राज्य के प्रधान वन संरक्षक की ओर से जारी आदेश के मुताबिक 31 दिसंबर तक या तो इस तेंदुए को पकड़ लेना है या फिर मार गिराना है. उन्होंने कहा कि तेंदुए ने इस पूरे इलाके में रहने वाले लोगों में डर पैदा कर दिया है और अब ऐसे में लगता है कि तेंदुआ आदमखोर हो गया है.
पुणे के प्रभागीय वन संरक्षक राहुल पाटिल ने कहा,
ये तस्वीर मई 2020 की है जब हैदराबाद में एक तेंदुए को बीच सड़क पर बैठे देखा गया था. फोटो- PTI
कैसे घोषित किया जाता है आदमखोर?
अब ये मामला जानने के बाद सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर किसी जानवर को आदमखोर कब और कैसे घोषित किया जाता है. ये जानने के लिए हमने बात की कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर राहुल कुमार से. फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने 'द लल्लनटॉप' को बताया, राहुल कुमार ने कहा कि जानवर अमूमन अपने इलाकों में रहते हैं और इंसानों पर हमला नहीं करते. हजार में कोई एक बाघ होता है जो इंसान पर हमला करेगा. लैपर्ड भी इंसानों से दूरी रखते हैं. उन्होंने कहा, ये तो आप समझ गए होंगे कि आदमखोर आम बोलचाल की भाषा का शब्द है और किसी जानवर को विशेष परिस्थितियों में ही मारा जा सकता है लेकिन अगर तय वक्त में उसे मारा ना जा सके तो क्या होगा? ऐसी स्थिति के लिए क्या प्रावधान है? कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर राहुल कुमार कहते हैं, अब सवाल ये उठता है कि क्या इन्हें मारा जाना जरूरी है? क्या कोई ऐसा तरीका नहीं, जिससे इनको पकड़ लिया जाए और एक दुर्लभ किस्म के जानवर की जान ना जाए. पेटा समेत पूरी दुनिया के पशु प्रेमी भी इस तरह के शिकार के खिलाफ आवाज उठाते रहते हैं. साल 2018 में जब एक आदमखोर बाघिन को मारा गया था, तब भी ये सवाल उठे थे. इसका जवाब देते हुए राहुल कहते हैं, कौन जारी करता है मारने के आदेश?
2016 बैच के IFS ऑफिसर नवाकिशोर रेड्डी ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन (chief wildlife warden) ही किसी जानवर को मारने के आदेश जारी कर सकते हैं. वाइल्डलाइफ एक्ट 1972 के सेक्शन 11 (1) में इसकी जानकारी दी गई है. हर राज्य में एक चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन होते हैं और उन्हीं के आदेश पर किसी खूंखार हो चुके जानवर का शिकार किया जा सकता है.
कितने तेंदुओं की जान गई
महाराष्ट्र में साल 2020 में 172 तेंदुओं की जान चली गई. इनमें से 86 तेंदुए अपने आप मर गए जबकि सड़क दुर्घटनाओं में 34 तेंदुओं की मौत हुई. 25 तेंदुए अवैध शिकार के कारण मारे गए जबकि 10 तेंदुए अन्य वजहों से जान गवां बैठे. अब महाराष्ट्र में 669 तेंदुए बचे हुए हैं.
इंसान और जानवरों के बीच संघर्ष
भारत की मौजूदा आबादी 130 करोड़ से अधिक है. हर कहीं इंसानों की मौजूदगी है. जंगल सिमट रहे हैं और जानवरों के लिए दायरा छोटा होता जा रहा है. चंद दिनों पहले की ही बात है, जब गाजियाबाद की पॉश कॉलोनी में तेंदुए को घूमते देखा गया था. हर कुछ दिन के बाद अखबारों में रिहायशी इलाकों में जंगली जानवरों के घूमने की खबरें और तस्वीरें छपती रहती हैं. तभी मेरठ से, तो कभी बिजनौर से ऐसे मामले सामने आते रहते हैं. आप केवल गूगल पर बाघ और इलाके का नाम लिखें, नतीजे आपके सामने होंगे. खैर, हमें उम्मीद है कि आपको इस बारे में हर जरूरी जानकारी मिल गई होगी. लेकिन अगर आपके पास इससे जुड़ा कोई और फैक्ट है या फिर हमसे कोई फैक्ट मिस हो गया है तो आप हमें कॉमेंट में जरूर बताएं.

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