'उमंग' ऐपः जिसे मोदी सरकार ने हर भारतीय की ज़रूरत को देखकर बनाया था, पर फ़्लॉप रहा
अपने समय से एक कदम आगे बताया गया ये मोबाइल ऐप अपने टार्गेट्स से एक साल पीछे है.
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सभी डॉक्यूमेंट एक ही जगह पर. सभी सेवाएं एक ही जगह पर. सभी कार्य एक ही जगह पर. सभी ट्रांज़ैक्शन एक ही जगह पर. यही उमंग की वेबसाइट पर लिया गया है. (फ़ीचर इमेज, उमंग के एक एड का स्क्रीनग्रैब है.)
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मोदी सरकार, ‘उमंग’ ऐप के तीन से अधिक वर्ष बीत जाने के बाद इसकी सफलता-असफलता का आंकलन करने वाली है. इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार सरकार ये भी जानना चाहती है कि क्यों लोगों ने इसे उतना पसंद नहीं किया?
'उमंग' ऐप के ढाई करोड़ के लगभग रजिस्टर्ड यूज़र्स हैं. और ये अब तक चार करोड़ से भी कम बार डाउनलोड किया गया है. जबकि लॉन्च के वक्त इसे इस तरह से प्रोजेक्ट किया गया था कि ये हर भारतीय नागरिक के लिए एक ‘मस्ट हेव’ ऐप है. और इसलिए सरकार रिव्यू करना चाह रही है कि इसे आशातीत सफलता क्यूं नहीं मिली है?
इस खबर के आने के बाद उत्सुकता होती है कि आख़िर क्या है ये ‘उमंग’ ऐप जिसे लेकर केंद्र सरकार शुरुआत में बहुत उत्साहित थी, फिर यूं सोई कि गोया सारी ‘उमंग’ जाती रही. और फिर सीधे तीन साल बाद इसकी याद आई. क्या है UMANG ऐप
यूं 'उमंग' ऐप का नाम ‘उमंग’ इसके फुल फ़ॉर्म के चलते है. यूनिफ़ाइड मोबाइल एप्लिकेशन फ़ॉर न्यू एज़ गवर्नेंस (UMANG).
इस फ़ुल फ़ॉर्म का शाब्दिक अर्थ हुआ: न्यू एज़ गवर्नेंस के लिए एकीकृत मोबाइल ऐप. हालांकि इसका फुल फ़ॉर्म और हिंदी अनुवद भी उतना ही क्लिष्ट है जितना एब्रिविएशन. लेकिन फिर भी काफ़ी स्पष्ट होता है कि ये ऐप नए ज़माने के सरकारी कामकाज के लिए बनाया गया है और इसमें कुछ सुविधाएं एकीकृत की गई हैं.
आप 'उमंग' द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ इसकी वेबसाइट के माध्यम से भी ले सकते हैं. (स्क्रीनग्रैब: web.umang.gov.in)
तो यहीं से क्यू लेकर कहें तो, 23 नवंबर, 2017 को मोदी सरकार ने इस ऐप को लॉन्च किया. ऐप को साइबरस्पेस की पांचवी ग्लोबल कॉन्फ़्रेंस (GCCS 5.0) के दौरान लॉन्च किया गया था. इसका उद्देश्य ये था कि भारत के नागरिकों को केंद्र और राज्य की सारी (या अधिक से अधिक) सुविधाएं, एक ही जगह पर मिल जाएं. अंग्रेज़ी में इसके लिए एक टर्म है, ‘अंडर वन अंब्रेला’.
यानी इस ऐप को लॉन्च करने के पीछे विचार यह था कि भारत के नागरिक एक ही मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से केंद्र सरकार की, अपने राज्य की सरकार की और ज़िला, पंचायत और ग्राम स्तर की ई-गवर्नेंस सेवाओं का लाभ ले सकें.
उदाहारण के लिए, इस ऐप के माध्यम से आप अपना PF बैलेन्स जान सकते हैं, अपने बिजली का, गैस का बिल भर सकते हैं. अपने सारे आवश्यक डॉक्यूमेंट्स का एक वर्चुअल संस्करण ‘डिजिटल लॉकर’ में सुरक्षित करके उसे दुनिया के किसी भी कोने से एक्सेस कर सकते हैं. 10th-12th का रिज़ल्ट देख सकते हैं. कौशल विकास योजना के लिए खुद को रजिस्टर कर सकते हैं.
तस्वीर 2017 की है. नरेंद्र मोदी और जयशंकर प्रसाद, ऐप को साइबरस्पेस की ग्लोबल कॉन्फ़्रेंस के दौरान लॉन्च करते हुए. (तस्वीर: PTI)
शुरुआत में इसमें सरकार के कुल 43 विभाग डेढ़ सौ से अधिक सुविधाएं दे रहे थे. ये आंकड़े बढ़े और अब 200 के क़रीब विभाग 2,000 से अधिक सुविधाएं दे रहे हैं. सरकार का लक्ष्य था कि दिसंबर 2019 तक ही इसमें 200 से ज़्यादा डिपार्टमेंट एकीकृत कर लिए जाएंगे. इस लक्ष्य से अभी भी माने जनवरी 2021 आ जाने के बाद भी ये ऐप 5-6 डिपार्टमेंट दूर है. ऐप शुरुआत में 13 भाषाओं में उपलब्ध था. और अभी इसमें कोई और भाषा नहीं जुड़ी है. लॉन्च करते वक्त कहा गया था कि सरकार के 1500 के क़रीब दूसरे ऐप्स को इस ऐप में मर्ज कर दिया जाएगा या दोनों को साथ में रखकर परफॉर्मेंस को बेहतर बनाया जाएगा. UMANG पर अभी क्यों बात हो रही है जैसा शुरुआत में बताया था, उसी को और विस्तार से बताएं तो, मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी एक ऐसी एज़ेंसी की तलाश कर रही है, जो इस ऐप के प्रभाव का विस्तारपूर्वक आंकलन कर सके.
युवा, बुजुर्ग, स्त्री, पुरुष, व्यवसायी, नौकरीपेशा… हर किसी के कुछ न कुछ काम का है ये ऐप (तस्वीर: 'उमंग' ऐप के एड का स्क्रीनग्रैब).
इसके लिए मिनिस्ट्री ने एक RFP (रिक्वेस्ट फ़ॉर प्रपोज़ल) भी निकाला है. सरकार और मंत्रालय ये जानना चाहता है कि नागरिकों के लिए ये ऐप और इससे जुड़े राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न डिपार्टमेंट कैसा परफ़ॉर्म कर रहे है. चुनी गई एज़ेंसी का काम ये जानना भी होगा कि इतने सारे फ़ीचर्स होने के बावज़ूद ये ऐप नागरिकों के बीच सफल और चर्चित क्यूं नहीं है.
'उमंग' ऐप के ढाई करोड़ के लगभग रजिस्टर्ड यूज़र्स हैं. और ये अब तक चार करोड़ से भी कम बार डाउनलोड किया गया है. जबकि लॉन्च के वक्त इसे इस तरह से प्रोजेक्ट किया गया था कि ये हर भारतीय नागरिक के लिए एक ‘मस्ट हेव’ ऐप है. और इसलिए सरकार रिव्यू करना चाह रही है कि इसे आशातीत सफलता क्यूं नहीं मिली है?
इस खबर के आने के बाद उत्सुकता होती है कि आख़िर क्या है ये ‘उमंग’ ऐप जिसे लेकर केंद्र सरकार शुरुआत में बहुत उत्साहित थी, फिर यूं सोई कि गोया सारी ‘उमंग’ जाती रही. और फिर सीधे तीन साल बाद इसकी याद आई. क्या है UMANG ऐप
मुद्रा. फुल फ़ॉर्म, ‘माइक्रो यूनिट्स डिवेलपमेंट एंड रि-फ़ाइनेंस एज़ेंसी’ (MUDRA) बैंक.ये मोदी सरकार की विशेषता है. अपनी पॉलिसीज़ के शॉर्ट फ़ॉर्म या एब्रिविएशन को लेकर थोड़ा क्रिएटिव होना. ऐसा ही उनके सरकारी ऐप के मामले में भी है. जैसे ‘भीम ऐप’ या फिर आज की स्टोरी का मुख्य किरदार ‘उमंग' ऐप.
दर्पण. फुल फ़ॉर्म, ‘डिजिटल एडवांसमेंट ऑफ़ रूरल पोस्ट ऑफ़िस फ़ॉर अ न्यू इंडिया’ (DARPAN).
अमृत. फुल फ़ॉर्म, ‘अटल मिशन फ़ॉर रिजूविनेशन एंड अर्बन ट्रांसफ़ॉरमेशन’ (AMRUT).
उजाला. फुल फ़ॉर्म, ‘उन्नत ज्योति बाय एफ़ोर्डबल LEDs फ़ॉर ऑल’ (UJALA).
यूं 'उमंग' ऐप का नाम ‘उमंग’ इसके फुल फ़ॉर्म के चलते है. यूनिफ़ाइड मोबाइल एप्लिकेशन फ़ॉर न्यू एज़ गवर्नेंस (UMANG).
इस फ़ुल फ़ॉर्म का शाब्दिक अर्थ हुआ: न्यू एज़ गवर्नेंस के लिए एकीकृत मोबाइल ऐप. हालांकि इसका फुल फ़ॉर्म और हिंदी अनुवद भी उतना ही क्लिष्ट है जितना एब्रिविएशन. लेकिन फिर भी काफ़ी स्पष्ट होता है कि ये ऐप नए ज़माने के सरकारी कामकाज के लिए बनाया गया है और इसमें कुछ सुविधाएं एकीकृत की गई हैं.
आप 'उमंग' द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ इसकी वेबसाइट के माध्यम से भी ले सकते हैं. (स्क्रीनग्रैब: web.umang.gov.in)तो यहीं से क्यू लेकर कहें तो, 23 नवंबर, 2017 को मोदी सरकार ने इस ऐप को लॉन्च किया. ऐप को साइबरस्पेस की पांचवी ग्लोबल कॉन्फ़्रेंस (GCCS 5.0) के दौरान लॉन्च किया गया था. इसका उद्देश्य ये था कि भारत के नागरिकों को केंद्र और राज्य की सारी (या अधिक से अधिक) सुविधाएं, एक ही जगह पर मिल जाएं. अंग्रेज़ी में इसके लिए एक टर्म है, ‘अंडर वन अंब्रेला’.
यानी इस ऐप को लॉन्च करने के पीछे विचार यह था कि भारत के नागरिक एक ही मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से केंद्र सरकार की, अपने राज्य की सरकार की और ज़िला, पंचायत और ग्राम स्तर की ई-गवर्नेंस सेवाओं का लाभ ले सकें.
उदाहारण के लिए, इस ऐप के माध्यम से आप अपना PF बैलेन्स जान सकते हैं, अपने बिजली का, गैस का बिल भर सकते हैं. अपने सारे आवश्यक डॉक्यूमेंट्स का एक वर्चुअल संस्करण ‘डिजिटल लॉकर’ में सुरक्षित करके उसे दुनिया के किसी भी कोने से एक्सेस कर सकते हैं. 10th-12th का रिज़ल्ट देख सकते हैं. कौशल विकास योजना के लिए खुद को रजिस्टर कर सकते हैं.
तस्वीर 2017 की है. नरेंद्र मोदी और जयशंकर प्रसाद, ऐप को साइबरस्पेस की ग्लोबल कॉन्फ़्रेंस के दौरान लॉन्च करते हुए. (तस्वीर: PTI)शुरुआत में इसमें सरकार के कुल 43 विभाग डेढ़ सौ से अधिक सुविधाएं दे रहे थे. ये आंकड़े बढ़े और अब 200 के क़रीब विभाग 2,000 से अधिक सुविधाएं दे रहे हैं. सरकार का लक्ष्य था कि दिसंबर 2019 तक ही इसमें 200 से ज़्यादा डिपार्टमेंट एकीकृत कर लिए जाएंगे. इस लक्ष्य से अभी भी माने जनवरी 2021 आ जाने के बाद भी ये ऐप 5-6 डिपार्टमेंट दूर है. ऐप शुरुआत में 13 भाषाओं में उपलब्ध था. और अभी इसमें कोई और भाषा नहीं जुड़ी है. लॉन्च करते वक्त कहा गया था कि सरकार के 1500 के क़रीब दूसरे ऐप्स को इस ऐप में मर्ज कर दिया जाएगा या दोनों को साथ में रखकर परफॉर्मेंस को बेहतर बनाया जाएगा. UMANG पर अभी क्यों बात हो रही है जैसा शुरुआत में बताया था, उसी को और विस्तार से बताएं तो, मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी एक ऐसी एज़ेंसी की तलाश कर रही है, जो इस ऐप के प्रभाव का विस्तारपूर्वक आंकलन कर सके.
युवा, बुजुर्ग, स्त्री, पुरुष, व्यवसायी, नौकरीपेशा… हर किसी के कुछ न कुछ काम का है ये ऐप (तस्वीर: 'उमंग' ऐप के एड का स्क्रीनग्रैब).इसके लिए मिनिस्ट्री ने एक RFP (रिक्वेस्ट फ़ॉर प्रपोज़ल) भी निकाला है. सरकार और मंत्रालय ये जानना चाहता है कि नागरिकों के लिए ये ऐप और इससे जुड़े राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न डिपार्टमेंट कैसा परफ़ॉर्म कर रहे है. चुनी गई एज़ेंसी का काम ये जानना भी होगा कि इतने सारे फ़ीचर्स होने के बावज़ूद ये ऐप नागरिकों के बीच सफल और चर्चित क्यूं नहीं है.

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