बलात्कार और हत्या का दोषी राम रहीम फिर चर्चा में है. वजह है उसको मिली 21 दिन कीफरलो (Furlough). इसे लेकर पहले से विवाद था कि अब खबर है कि उसे हरियाणा सरकार नेखालिस्तानियों से खतरा बताकर जेड प्लस सुरक्षा भी दे दी है. पंजाब चुनाव के ठीकपहले राम रहीम को मिली फरलो और उसके बाद मिली जेड प्लस सुरक्षा को चुनाव कोप्रभावित करने की साजिश बताया जा रहा है. कोर्ट में इसके खिलाफ़ याचिकाएं दी जा रहीहैं. क्या है पूरा मामला? राम रहीम साल 2017 से हरियाणा में रोहतक की सुनारिया जेलमें बंद था. हालांकि पिछले साल भी उसे अपनी बीमार मां से मिलने के लिए परोल दी गईथी, लेकिन सिर्फ सुबह से शाम तक. फिर 31 जनवरी 2022 को राम रहीम ने जेलसुपरिटेन्डेन्ट को पत्र लिखकर तीन हफ़्तों की फरलो की मांग की. कहा कि उसे परिवार केसाथ गुरुग्राम के घर में रहना है. 7 फरवरी 2022 को 21 दिन के लिए राम रहीम को फरलोपर छोड़ दिया गया. कहा गया कि उसका जेल में व्यवहार अच्छा था, सो बतौर गुड कंडक्टप्रिजनर्स उसे छुट्टी दी गई है. ये भी कहा गया कि इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहींहै और न ही राम रहीम किसी चुनावी कार्यक्रम में शरीक हो रहा है.राम रहीम (फोटो सोर्स- आजतक)हालांकि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को मिली फरलो का जमकर विरोध हो रहा है. पटियाला केभादसों के रहने वाले एक शख्स ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर राम रहीम की फरलोरद्द करने की मांग की. याचिका में कहा गया कि डेरा प्रमुख कई संगीन अपराधों मेंदोषी करार दिया जा चुका है और उसके खिलाफ कई और आपराधिक मामले चल रहे हैं. ऐसे मेंपंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक ऐसे अपराधी को फरलो देना पूरी तरह से गलत है.ये भी कहा गया कि चुनाव में राजनीतिक फायदा उठाने के लिए हरियाणा की मनोहर लालखट्टर सरकार ने राम रहीम को फरलो दी है. इसके बाद पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट नेहरियाणा सरकार को फरलो से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने को कहा. जिस पर एडवोकेट जनरल बीआरमहाजन ने शुरुआती दलीलें पेश कीं और कहा कि डेरा प्रमुख को नियमों के मुताबिक़ हीफरलो दी गई.इसी तरह की याचिका पंजाब की समाना विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी परमजीत सिंहसोहाली ने भी दायर की. याचिका में कहा गया कि डेरा प्रमुख का इलाके में प्रभाव है,जिसका असर चुनावों पर भी पड़ेगा. इसलिए फरलो का फैसला रद्द कर दिया जाए और राम रहीमको वापस जेल भेज दिया जाए.इस बीच फरलो पर 16 दिन से ज्यादा की छुट्टी राम रहीम गुजार चुका है. अब तो उसे जेडप्लस सुरक्षा भी दे दी गई है. जो देश के इक्का-दुक्का सबसे महत्वपूर्ण लोगों कोमिलती है. ये भी नई जानकारी नहीं है कि पंजाब और हरियाणा में डेरा सच्चा का चुनावीदखल और प्रभाव हमेशा से रहा है. इस बार भी खबरें आ रही हैं कि मालवा बेल्ट की कईसीटों पर डेरा की तरफ़ से भाजपा और शिरोमणि अकाली दल को समर्थन देने का संदेशापहुंचा दिया गया है.पंजाब के CM चरणजीत सिंह चन्नी ने भी ट्वीट कर कहा है कि अकाली दल और भाजपा डेरासच्चा की मदद ले रहे हैं.Akali and bjp partnership is out in open, both are taking support from DeraSacha Sauda. Let them team up, people of Punjab are teaming up against thesebeadbi partners and will teach them a lesson with their votes.Baraat jinni marzi vaddi hove, Pind ton Ghat hi hundi hai— Charanjit S Channi (@CHARANJITCHANNI) February 20, 2022चुनाव पर डेरा और गुरुमीत राम रहीम का प्रभाव जो भी हो, सवाल ये है कि राम रहीम कोफरलो कैसे और किन नियमों के तहत मिली, इसे बुलेट पॉइंट्स में समझ लेते हैं. क्या हैफरलो? # फरलो एक तरह से छुट्टी है. इसमें कैदी को कुछ दिन के लिए जेल से रिहा कियाजाता है. फरलो की ड्यूरेशन को कैदी की सजा में छूट और उसके हक़ के तौर पर देखा जाताहै. सज़ा में छूट माने फरलो के दिन सज़ा में ही काउंट कर लिए जाते हैं.# फरलो आमतौर पर सज़ायाफ्ता कैदियों को ही मिलती है, यानी ऐसे कैदी जो दोष सिद्धहोने के बाद मामले में सजा काट रहे हैं.# आम तौर पर फरलो उन कैदियों को मिलती है जो लंबी सजा काट रहे हैं.# जेल राज्य का मामला है, इसलिए अलग-अलग राज्यों में फरलो के नियम अलग-अलग हैं.# फरलो जेल के कैदियों के अलावा सरकारी कर्मियों को भी दी जा सकती है. परोल और फरलोमें फर्क परोल और फरलो में बड़ा फर्क है. प्रिजन एक्ट 1894 में इन दोनों का जिक्रकिया गया है. फरलो सिर्फ सजायाफ्ता कैदी को ही मिल सकती है, जबकि परोल पर किसी भीकैदी को कुछ दिनों के लिए रिहा किया जा सकता है. लेकिन फरलो किसी छोटे कारण या बिनाकारण के भी दी जा सकती है, जबकि परोल के लिए वाजिब वजह होना जरूरी है. परोल तभीमिलती है जब कैदी के परिवार में किसी की मौत हो जाए, ब्लड रिलेशन में शादी समारोहजैसा कुछ हो या और कोई ख़ास वजह हो. और किसी कैदी को परोल देने से ये कहकर इनकार भीकिया जा सकता है कि उसे छोड़ना समाज के हित में नहीं है.हालांकि कुछ स्थितियां हैं जिनमें परोल और फरलो दोनों ही नहीं मिलतीं. सितंबर 2020में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने परोल और फरलो के लिए कुछ नई गाइडलाइंस जारी की थीं.इनके मुताबिक़,# ऐसे कैदी जिनकी मौजूदगी समाज के लिए खतरनाक हो, शांति और कानून व्यवस्था बिगड़नेका खतरा हो, उन्हें रिहा नहीं किया जाना चाहिए.# ऐसे कैदी जो हमला करने, दंगा भड़काने, बगावत की कोशिश और जेल हिंसा से जुड़ेअपराधों में शरीक रहे हों, उन्हें रिहाई नहीं दी जानी चाहिए.# डकैती, आतंकवाद संबंधी जुर्म, अपहरण, ड्रग्स की स्मगलिंग, जैसे गंभीर अपराधों केदोषी या आरोपी को भी रिहा नहीं किया जाना चाहिए.# इसके अलावा ऐसे कैदी जिनके परोल या फरलो का वक़्त पूरा कर वापस जेल लौटने पर शंकाहो, उन्हें भी छोड़ा नहीं जाना चाहिए.# हालांकि यौन अपराधों, हत्या, बच्चों के अपहरण और हिंसा जैसे गंभीर अपराधों केमामलों में एक कमेटी सारे फैक्ट्स को ध्यान में रखकर परोल या फरलो देने का फैसला करसकती है.अब बाबा राम रहीम के मामले में ऐसा क्या ख़ास था, जो उसे फरलो भी दी गई और जेड प्लससिक्योरिटी भी, ये तो कोर्ट की बहस का विषय है, लेकिन इतना कहा जा सकता है किसामान्य स्थितियों में परोल या फरलो मिलना इतना आसान नहीं होता.बता दें कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरुमीत राम रहीम को 2017 में CBI की स्पेशलकोर्ट ने अपने ही आश्रम की एक साध्वी के रेप और हत्या के मामले में दोषी करार दियाथा. कोर्ट ने उसे 20 साल कैद की सजा सुनाई थी. राम रहीम को पूर्व डेरा प्रमुख रंजीतसिंह और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी आजीवन कैद की सजा मिलीहै. वहीं अपने आश्रम के कई साधुओं को नपुंसक बनाए जाने का मामला अभी विचाराधीन है.