...जब अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा- हराम में भी राम होता है
वाजपेयी चुटकियां लेने में माहिर थे. इस बात पर नहीं हंसना, उस पर नहीं हंसना, ऐसे पॉलिटिकली करेक्ट होने का लोड नहीं लेते थे वो.
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अटल बिहारी वाजपेयी गुजर गए हैं. उनकी हस्ती उनकी राजनीति से बनी थी. उसी हस्ती की ये पहचान थी कि वो हंसोड़ थे. खूब हंसते थे, खूब हंसाते थे. हाजिरजवाब थे. भारत के नेताओं में इतना सेंस ऑफ ह्यूमर दिखता कहां है.
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