The Lallantop
Advertisement

गांधी जी से नहीं इस नेता से डरते थे अंग्रेज, लॉर्ड क्लीमेंट एटली ने किया था खुलासा

आज रासबिहारी बोस की पुण्यतिथि है, जानिए उनके कुछ रोचक किस्से!

Advertisement
pic
25 मई 2020 (अपडेटेड: 24 मई 2020, 04:50 AM IST)
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more

'मैं सिपाही हूं. मैं लड़ूंगा. अंतिम और निर्णायक लड़ाई'

- रासबिहारी बोस

रासबिहारी बोस उस क्रांतिकारी का नाम है जिसने अंग्रेजों की सेज में खटमल बिछाके रख दिया था. ये 1905  का साल था जब लॉर्ड कर्जन ने बंगाल के टुकड़े कर दिए थे. पूरे बंगाल में गुस्से की झुरझुरी दौड़ गई. जवान ख़ून खौल उठा. सबने मिलकर 'युगांतर' नाम का ग्रुप बनाया. बोस ने खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी के लिए बम बनाए. वही बम जो किंग्सफोर्ड पर फेंके गए. हालांकि वो बमकांड असफल रहा. खुदीराम को फांसी हो गई. इसने बोस के अंदर विद्रोह की आग में घी डाल दिया. वो चल पड़े पंजाब. क्रांति की मशाल लिए. बोस फिर जापान गए. वहां सबसे विकराल क्रांतिकारी ग्रुप था-दि ब्लैक ड्रैगन सोसायटी. बोस और इस ग्रुप की सोच सेम टू सेम मिलती थी. तत्काल बोस और ड्रैगन सोसायटी के चीफ़ तोयामा मितसुरू ने हाथ मिला लिए. तय हो गया तोयामा, बोस की क्रांति में मदद करेंगे. जापान में ही बोस ने शादी कर ली. अब वो जापान के नागरिक हो गए. 1923 में ए.एम. नायर के साथ मिलकर बना डाली 'आज़ाद हिंद फ़ौज़'. मकसद था अंग्रेजों का जबड़ा हिलाकर सारी बत्तीसी उखाड़ के दफ़न कर देना. अंग्रेज बोस के सामने ऐसे भीगी बिल्ली हो गए कि उस जमाने में भी बोस के सिर पर 75 हजार का इनाम ठोंक दिया.

लॉर्ड एटली ने किया था बोस के ख़ौफ़ का ख़ुलासा-

1327126106_rash behari bose one

तबके कोलकाता हाइकोर्ट के चीफ़ जस्टिस पीवी चक्रबर्ती 30 मार्च, 1976 को लिखा है,

"1956 में जब मैं प.बंगाल का गवर्नर था, तो ब्रिटिश पीएम एटली से मिला. मैंने उनसे सीधा सवाल यही पूछा कि सन् 47 में तो गांधी जी का 'भारत छोड़ो' आंदोलन ठंडा पड़ गया था, फिर वो क्या वजह थी जो अंग्रेजों ने इतना आनन-फानन में देश छोड़ने का फ़ैसला ले लिया. एटली ने जो सबसे ख़ास कारण गिनाया वो था, आज़ाद हिंद फ़ौज़ का आतंक.

एटली ने भी ये कहा कि अंग्रेजों के देश छोड़ने के डिसीजन पर क्विट इंडिया मूवमेंट का सबसे कम असर पड़ा."

'बोस करी' का दीवानो भयो सगरो जापान-

cash8   20वीं सदी के शुरूआती दशकों में जितने बड़े क्रांतिकारी षडयंत्र हुए थे, उन सबके सूत्रधारों में शामिल थे रास बिहारी बोस. गदर रिवोल्यूशन से लेकर अलीपुर बम कांड केस तक, गर्वनर जनरल हॉर्डिंग की हत्या की प्लानिंग से लेकर मशहूर क्रांतिकारी संगठन युगांतर पार्टी के उत्तर भारत में विस्तार तक. लेकिन जापान में उनकी ‘क्रांति’ पर भारी पड़ गई उनकी ‘करी’. इंडियन करी के नाम से मशहूर करी  के क्रेज को आप जापान में इस बात से समझ सकते हैं कि हर रेस्तरां में इंडियन करी नाम से डिश उनके मेन्यू में होती है. जापान में बोस ने एक रेस्तरां मालिक की लड़की से ब्याह कर लिया था. इसी रेस्तरां  में उन्होंने वो करी बनाई थी. रेस्तरां का नाम था- नाकामुराया. और अब उस करी की रेसिपी कहलाती है- नाकामुराया का बोस.    
ये भी पढ़ें-

क्या सुभाष चंद्र बोस विमान हादसे के 20 साल बाद जिंदा थे?

जन गण मन के वो झूठ, जो आपको बचपन से अब तक रटाए गए हैं

Advertisement

Advertisement

()