शाहरुख खान और तुषार कपूर जिस तरह से बाप बने हैं, वह मुमकिन नहीं होगा भारत केसरोगेसी बिल के कानून में बदल जाने के बाद. कुछ सालों से भारत में सरोगेसी कामार्किट बन गया था. पर यूनियन कैबिनेट ने बुधवार को सरोगेसी बिल का एक ड्राफ्टप्रस्तावित किया. ये अब पार्लियामेंट में रखा जायेगा. पास हो जाने के बादजम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू हो जायेगा. इस बिल ने सोशल मीडिया पर बड़ातूफ़ान खड़ा किया है. लोग इसकी बड़ी आलोचना कर रहे हैं. क्योंकि सरोगेसी यानी 'किराएकी कोख' पर सरकार ने कड़े कानून लगाने का फैसला किया है. पर सरकार के इरादे उतनेखराब नहीं हैं, जितना कि प्रचारित किया जा रहा है.--------------------------------------------------------------------------------सरोगेसी: मतलब अगर कोई दंपती बच्चा पैदा नहीं कर सकता या नहीं करना चाहता, तो वोअपने शुक्राणु और अंडाणु लेकर किसी दूसरी औरत के कोख में डलवा देंगे. बाद में जोबच्चा पैदा होगा, उसे फिर ये दंपती ले लेंगे. बदले में उस औरत को पैसा दिया जाएगा.--------------------------------------------------------------------------------आइये पढ़ते हैं कि बिल में क्या है और इसके क्या तर्क हैं: 1.--------------------------------------------------------------------------------नए बिल के मुताबिक अब सरोगेसी को ख़रीदा नहीं जा सकता. मतलब पैसे दे के किसी औरत सेबच्चा पैदा नहीं करा सकते. ये बिल्कुल सही है. क्योंकि ये MNREGA नहीं है.प्रेगनेंसी एक जटिल चीज है. फिर 9 महीने पेट में बच्चा रखने के बाद औरत का बच्चे सेबड़ा ही अनोखा संबंध बन जाता है. कोई औरत अगर पैसे के लिए बच्चे पैदा कर रही है, तोइसका उसके मन और तन दोनों पर बुरा असर होगा. फिर अगर वो इसके लिए कई बच्चे पैदा करदे, तो उसके मरने का भी खतरा हो सकता है. और इच्छुक दम्पतियों के लिए अनाथालय काऑप्शन भी है. आप वहां से बच्चे ले सकते हैं. 2.--------------------------------------------------------------------------------विदेशी लोग अब इंडिया में सरोगेसी का फायदा नहीं उठा सकते. इस बात को लेकर सुषमास्वराज के बयान की बड़ी आलोचना हो रही है. पर ये जरूर देखा जाना चाहिए कि सुषमा काबयान सिर्फ बयान है. वो बिल में शामिल नहीं है. फिर जर्मनी, जापान, स्वीडन,ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूरोप के कई देशों में कमर्शियल सरोगेसी बैन है. क्योंकिवहां पर 'औरतों' की सुरक्षा सबसे ऊपर रखी जाती है. तो फिर इंडिया में क्यों मार्किटबनाना? क्या यहां की औरतें यूरोप की औरतों से कमतर हैं? 3.--------------------------------------------------------------------------------इंडिया के जिन लोगों के बच्चा नहीं हो सकता, वो लोग सरोगेसी का फायदा ले सकते हैं.पर होमोसेक्सुअल, लिव-इन, सिंगल लोगों को ये अधिकार नहीं है. अगर किसी दम्पती कोबच्चा नहीं हो सकता और अपने ही 'शुक्राणु' या 'अंडाणु' से बच्चा चाहता है, तो येऑप्शन उनको दिया जा रहा है. हालांकि अनाथालय से बच्चा गोद लेना ज्यादा समझदारी काकदम हो सकता था. होमोसेक्सुअल और लिव-इन के बारे में सरकार का अभी का फैसला उचितहै. क्योंकि अभी तक इनको कानूनी मान्यता नहीं मिली है. जो कि मिल जानी चाहिए. बिनाशादी किए तुषार कपूर हाल ही में सरोगेसी से पिता बने थे. इस बिल के कानून में बदलजाने के बाद सिंगल लोग ऐसा नहीं कर पाएंगे. 4.--------------------------------------------------------------------------------जिनको अधिकार है, उनकी शादी को कम-से-कम पांच साल होने चाहिए. औरत की उम्र 23-50 औरमर्द की 26-55 होनी चाहिए. ये बिल्कुल बायोलॉजी और उम्र को देखकर लिया गया फैसलाहै. साइंटिफिक फैसला. 5.--------------------------------------------------------------------------------अब सब कुछ हो जाने के बाद योग्य दम्पती पैसा नहीं देगा किराये की कोख के लिए.ज्यादा से ज्यादा मेडिकल बिल भर सकता है. मतलब सरकार ने 'मार्किट' एकदम ख़त्म करदिया. अब ख़रीदा-बेचा नहीं जा सकता. क्योंकि किराये की कोख के मामले में कई तरह केदलाल बीच में आ जाते थे. और औरत को पैसा नहीं मिल पाता था. फिर कई बार ये भी हुआ किदम्पती ने बच्चा लिया ही नहीं. ऐसे में वो औरत क्या करेगी? 6.--------------------------------------------------------------------------------सरोगेसी के लिए कोई नजदीकी रिश्तेदार औरत ही बच्चे को जन्म दे सकती है. ब्रिटेन मेंतो एकदम ब्लड रिलेटिव ही ऐसा कर सकते हैं. पर इंडिया में थोड़ी उदारता बरती गई है.क्लोज रिलेटिव कर के. हालांकि इसका दुरुपयोग हो सकता है. 7.--------------------------------------------------------------------------------अगर आपके पास बच्चा है, तो आप सरोगेसी का इस्तेमाल दूसरे बच्चे के लिए नहीं करसकते. अभी हाल में ही शाहरुख़ खान ने ऐसा ही किया था. दो बच्चों के बाद एक सरोगेसीसे बच्चा कराया. इसका एक पहलू ये भी है कि जिन के पास पैसा है, वो लोग अपने शरीर काख्याल रखेंगे, पर किसी गरीब इंसान के शरीर की परवाह नहीं करेंगे. कह देंगे कि पैसातो दे ही दिया है. 8.--------------------------------------------------------------------------------एक नेशनल सरोगेसी बोर्ड बनाया जायेगा. इसके अध्यक्ष हेल्थ मिनिस्टर होंगे. ये बोर्डपूरे देश में सरोगेसी को मैनेज करेगा. ये बढ़िया कदम है. जो कि बहुत पहले ही हो जानाचाहिए था. तो कई लोगों को ऐसा लगता है कि सरकार ने 'एकदम मध्ययुगीन' कदम उठाया है.पर क्या सरोगेसी एक धनी वर्ग की इच्छाओं के लिए ही नहीं बना है? जो कि गरीब औरत कीजान के रिस्क पर पूरा किया जा रहा है? जब किसी को बच्चे की जरूरत है, तो वो अनाथालयका क्यों नहीं हो सकता? क्या ये जरूरी है कि अपने ही 'स्पर्म' या 'ओवम' से पैदाकिया जाए? जब गरीबों के हक़ की बात आती है तो समाज इसे 'पिछड़ापन' कह के नकारना चाहताहै, पर अपने ऊपर कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता.-------------------------------------------------------------------------------- इस आर्टिकल में सरोगेसी बिल पर ऋषभ के विचार हैं, अगर आप इससे कुछ अलग सोचते हैं,तो कॉमेंट में बता सकते हैं.