साल था 1992. लालू के घर पर बहुत सारे लोग इकठ्ठा थे. पंचांग में नया साल शुरू हुआथा. फसल कटी थी. बिहार का फेमस 'चैता फेस्टिवल' चल रहा था. लालू यादव बिहार केमुख्यमंत्री थे. घर पर बांसुरी, हारमोनियम, सारंगी, तबला वगैरह रखे थे. पार्टी चलरही थी. नाचने वाले लड़के 'लड़कियों' की ड्रेस में ठुमक-ठुमक कर नाच रहे थे. गा रहेथे,'लालू बिन गद्दिया ना सोभे, राजा' चैता पार्टीपार्टी करने के मामले में लालू यादव कहां पीछे रहने वाले थे. आज भी लालू के घर कीहोली देख पार्टी देख लीजिए. इंडिया टुडे की एक रपट के मुताबिक चैता वाले दिनभी लालू के दोस्त, रिश्तेदार और पार्टी के विधायक भी इन नाचने वाले 'लौंडों' के साथनाचते रहे. लालू भी नाच रहे थे. बीच-बीच में सबको बुलाकर कह भी रहे थे, 'आओ, मजालूटो'. वैसे लालू और उनकी पार्टी के लोग थोड़ा संभलकर मौज कर रहे थे. उनको डर था कि'मर्यादा' न भंग हो जाए. लालू के दोस्त और पार्टी के कार्यकर्ता नाचने वालों की कमरमें नोट खोंस रहे थे.विपक्षियों ने कहा था कि ये सब मर्यादा के खिलाफ था. लेकिन लालू और उनकी पार्टीवालों का मानना था कि ये मिट्टी से जुड़ा सेलिब्रेशन था. लालू यादव का कहना था किराजनीति के टेंशन के बीच में ये सारे त्योहार राहत लेकर आते हैं. बिहार की राजनीतिमें पेच बहुत हैं. लालू जी को 'रिलैक्स' करने का मौका मिला था. कर लिए वो मजा.लालू यादव गाना भी बढ़िया गाते हैं. लगे हाथ वो भी सुन लो.https://www.youtube.com/watch?v=4uTC1z5N3cg--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंभइया तेज प्रताप, फोटो खींचने पर मानहानि का केस नहीं होतानीतीश-लालू की छवि हमने नहीं, इन 6 लोगों ने बिगाड़ी है