जब नोट बैन से हो रही दिक्कतों को ठीक-ठाक मीडिया कवरेज मिलने लगा, उसके ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले पर सर्वे शुरू किया है. वो 'डिजिटल' तौर-तरीकों के हिमायती हैं, इसलिए ये काम उन्होंने अपनी मोबाइल एप्लीकेशन के जरिये शुरू किया है. 10 सवाल हैं, जवाबों के विकल्प हैं.
लेकिन हमें इस सर्वे का नतीजा पता है.
खुद प्रधानमंत्री ने मंगलवार को इस सर्वे का ऐलान किया. एंड्रॉयड, एप्पल और विडोंज स्टोर पर पहले से मौजूद 'नरेंद्र मोदी' ऐप पर आप इस सर्वे में हिस्सा ले सकते हैं. बाकी का पता नहीं, लेकिन इस सर्वे का नतीजा हम पहले से जानते हैं.
पहले ये जान लें कि 'नरेंद्र मोदी' नाम से दो ऐप हैं. एक सरकारी और एक नरेंद्र मोदी की अपनी. मोदी की पर्सनल ऐप का डेवलपर 'नरेंद्र मोदी डॉट इन' को बताया गया है और इसके ब्योरे में बीजेपी दफ्तर का पता है. ये सर्वे नरेंद्र मोदी की अपनी ऐप पर है. इसलिए इसे आप सरकारी सर्वे नहीं कह सकते. ये कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री पर्सनल प्लेटफॉर्म पर ये सर्वे करा रहे हैं. वैसे रेटिंग और डाउनलोड दोनों में नरेंद्र मोदी की पर्सनल ऐप सरकारी से आगे है.
हां तो हम कह रहे थे कि हमें इस सर्वे का नतीजा पता है. वह होगा कि ज्यादातर लोग नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले से सहमत हैं. फिर बीजेपी प्रवक्ता और सरकार कई जगहों पर इसका जिक्र करेंगे. इसे सबूत की तरह पेश करेंगे. वाहवाही लूटेंगे.
क्योंकि इस सर्वे का रहस्य इसके सवालों की बुनावट में है. सवाल इतने चालाकी से बुने गए हैं कि उसका फीडबैक अंतत: नोटबंदी के पक्ष में ही आएगा. सब सवाल एक फॉरमैट में नहीं हैं. कुछ में 'हां' और 'नहीं' के ऑप्शन हैं और कुछ में 'नहीं' का ऑप्शन नहीं है. कुछ सवाल ऐसे हैं जिसमें 'असहमति' का ऑप्शन ही नहीं है.
22 नवंबर को प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, 'मैं करेंसी नोटों पर फैसले को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं जानना चाहता हूं. नरेंद्र मोदी ऐप पर इस सर्वे में हिस्सा लीजिए.'
https://twitter.com/narendramodi/status/800940663244132352
पहला पेच
हमें शक है कि प्रधानमंत्री एक्चुअली किसकी राय जानना चाहते हैं. भारत में सिर्फ 41 फीसदी लोगों के पास स्मार्टफोन हैं. नोट बैन से लोग खुश हैं या नाराज हैं, ये बहस का विषय हो सकता है. लेकिन कैश की उपलब्धता अचानक घट गई है, ये तो तथ्य है ही. और इससे सबसे ज्यादा गांवों में बसने वाला भारत प्रभावित हुआ है, जहां बैंकों और ATMs की संख्या कम है. 2015 के एक सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण भारत में सिर्फ 9 फीसदी लोगों के पास मोबाइल टेक्नॉलजी है. वे लोग इस सर्वे में कैसे हिस्सा लेंगे.
दूसरा पेच
अब सवाल है कि इस फीसदी के भी कितने फीसदी लोग नरेंद्र मोदी का पर्सनल ऐप यूज करते होंगे. ये एक व्यक्तिगत ऐप है, सरकारी नहीं. इसलिए जिन्होंने ये ऐप डाउनलोड किया है, या करेंगे; उनमें नोटबंदी से प्रभावित 'जेनुइन' लोगों और नरेंद्र मोदी समर्थकों की हिस्सेदारी का अनुपात कितना होगा? अनुमान आसान है.
इसलिए पॉलिटिकल विरोधियों ने भी इस सर्वे की खामियां अंडरलाइन की हैं.
https://twitter.com/milinddeora/status/801003648557924352
https://twitter.com/priyankac19/status/800981982197010432
https://twitter.com/asadowaisi/status/800967695692742657
सवाल कैसे कैसे?
10 सवाल हैं, जिनमें पहला सवाल है- 'क्या आपको लगता है कि भारत में काला धन है?' इस सवाल को प्रधानमंत्री अपने पक्ष में क्यों इस्तेमाल करना चाहते हैं? कौन होगा जो इसका जवाब 'ना' में देगा. जो लोग नोटबंदी से प्रभावित हैं, वे भी ये तो मानते ही हैं कि देश में काला धन है.
एक और सवाल है, 'क्या आपको लगता है कि भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लड़ने और इस समस्या को दूर करने की जरूरत है?' वो कौन भारतीय होंगे जो इस पर 'नहीं' पर क्लिक करेंगे. मानकर चलिए कि इस पर 99 फीसदी से ज्यादा 'हां' आएगी, उस 99 फीसदी के आंकड़े के आधार पर क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? क्या ये कहा जा सकता है कि ये सभी लोग नोटबैन के पक्ष में हैं?
https://twitter.com/madmanweb/status/800964890567421952
https://twitter.com/peeleraja/status/800961716322320386
https://twitter.com/krishashok/status/800980217917378560
किसी ने लिखा है कि ये सवाल उस तरह के हैं, जैसे किसी से पूछा जाए कि क्या तुमने अपनी बीवी को पीटना छोड़ दिया है. वह 'हां' कहे या 'ना', फंस जाएगा. लेकिन तीसरी बात कहने का ऑप्शन नहीं है.
ऐसा नहीं है कि सरकार को सर्वे नहीं कराना चाहिए. इस समय एक निष्पक्ष सर्वे की जरूरत है भी. लेकिन ये चालाक सर्वे आपको वही कहने देता है, जो आप प्रधानमंत्री सुनना चाहते हैं.
बहुत जल्द इस सर्वे के नतीजों की गूंज आपको न्यूज चैनलों पर सुनाई देगी. बीजेपी प्रवक्ताओं के मार्फत.
हैदर में शाहिद कपूर कहते हैं...
शक पे है यकीन तो, यकीन पे है शक मुझे
किसका झूठ झूठ है, किसके सच में सच नहीं
है कि है नहीं, बस यही सवाल है
और सवाल का जवाब भी सवाल है..