एक आखिरी बार ह्यू जैकमैन वुल्वरिन बनकर आ रहे हैं. उनकी फिल्म आ रही है न लोगन.एक्स-मेन में ऐसे सुपरहीरोज दिखते हैं. जिनके पास म्यूटेंट पावर्स होती हैं. वो आमआदमियों से कहीं बढ़कर होते हैं. तो एक्स-मेन के फैंस आजकल परेशान हैं, परेशान सेज्यादा दुखी हैं. क्योंकि अब वो कभी स्क्रीन पर वुल्वरिन को नहीं देख पाएंगे. लेकिनबात चिंता करने की नहीं है. फिल्म न आए तो न आए. हमारे हर ओर म्यूटेंट्स बिखरे पड़ेहैं, बहुत से तो राजनीति में हैं. https://www.youtube.com/watch?v=RH3OxVFvTegअक्सर मैं सोचता था नरेंद्र मोदी में ऐसा क्या था कि उन्हें एक बार में 272 सेज्यादा सीटें मिल गईं? जो कारनामा कभी कोई पार्टी साठ-पैंसठ सालों में नहीं कर पाईमोदी की पार्टी ने वो अकेले कैसे कर लिया? फिर मैंने एक्स-मेन देखी, एक्स-मेन देखनेके बाद दो बातें पक्की हो गईं. पहला ये कि कृष 3 में विवेक ओबेरॉय को एक अंगुली सेगाड़ियां उड़ाने का आईडिया कहां से आया. और दूसरा ये कि नरेंद्र मोदी एक म्यूटेंटहैं. बिलकुल प्रोफ़ेसर जेवियर की तरह जो लोगों के दिमाग में घुस कर उनसे मनचाहा कामकरा लेते हैं इसीलिए तो वो देशभर के लोगों के दिमाग में घुसकर भाजपा को वोट डलवापाए. इसीलिए तो वो नोटबंदी कर पाए और अब कोई उन्हें कुछ नहीं कह रहा है. जैसेप्रोफ़ेसर जेवियर्स के पास सेरेब्रो मशीन है. वैसे ही मोदी के पास मन की बात वालारेडियो है. दोनों एक जैसा ही काम करते हैं. मुझे ये भी पता चला कि रामविलास पासवानभी एक म्यूटेंट हैं, जैसे मिस्टीक मौका देखकर रूप बदलती है. इवेन पार्टी भी, वैसेही पासवान मौका देखकर बदल जाते हैं. तमाम म्यूटेंट्स में मुझे सबसे ज्यादा पसंदवुल्वरिन आया. ये बिलकुल हमारे आडवाणी जी जैसा है, ये कितने सालों का है खुद उसे भीनहीं पता. आखिरी बात जो उसे याद है, वो ये कि आडवाणी जी के साथ उसने वियतनाम कायुद्ध लड़ा था. हालांकि आडवाणी जी खुद अपना बचपन हल्दीघाटी के युद्ध के पहलेहल्दीघाटी के मैदान में सितोलिया खेलते बीतना बताते हैं. लेकिन ये पक्का रहा किआडवाणी जी भी वुल्वरिन की तरह ऐसे म्यूटेंट हैं जिन पर उम्र का असर नही पड़ता.वुल्वरिन ज़िंदगी भर प्यार तलाशता रहा और आडवाणी जी एक अदद कुर्सी. आडवाणी जी कीकहानी सच में वुल्वरिन जैसी है, उसे भी हमेशा उन्हीं लोगों ने दुःख दिया, जो उसकेआस-पास रहते थे. वुल्वरिन पर हथियारों का असर नही होता, वो सारे घाव सह लेता है उसीतरह आडवाणी जी भाजपा में रहते हुए सारे अपमान और तमाम लोगों को शपथ ग्रहण करते देखदिल पर घाव झेल रहे हैं. हीरो है तो विलेन भी होगा और मोदी जी की ज़िंदगी के विलेनबने हैं अरविंद केजरीवाल. आपने कभी सोचा कि आम आदमी पार्टी के सारे लोग हमेशा टोपीक्यों लगाकर रखते हैं? वजह हम बताते हैं आपने एक्स-मेन सीरिज की फिल्मों मेंमैग्नेटो को हेलमेट लगाए देखा होगा जिसके कारण प्रोफ़ेसर जेवियर मैग्नेटो उर्फ़ एरिकके दिमाग में नहीं घुस पाते. बस वही काम ‘आप’ की टोपी भी करती है. इसीलिए मोदी आमआदमी पार्टी की टोपी लगाए लोगों के दिमाग में घुस नहीं पाए और फिर जो हुआ वो दिल्लीमें इतिहास था. ये और बात है दिल्ली वाले खुद ही इतिहास बनाकर भुगत रहे हैं. आपनेतो कभी ये भी ध्यान नहीं दिया होगा कि एरिक और एरिविंद केजरीवाल नाम कितनेमिलते-जुलते हैं. साथ ही अरविंद केजरीवाल में क्विक सिल्वर की भी पावर्स हैं, इतनीजल्दी बनारस से दिल्ली और दिल्ली से पंजाब और फिर पंजाब से गोवा पहुंचना सिर्फक्विकसिल्वर के बस का है. राहुल गांधी दूसरी तरह के म्यूटेंट हैं, उनमें दो हीखासियत हैं, पहली उनकी उम्र नहीं बढ़ती वो चिरयुवा हैं. और दूसरी ये कि वो सबको अपनीफैमिली से बांधकर रह सकते हैं. दूसरी वाली क्वालिटी उन्हें स्टॉर्म बनाती है. साथही कुछ रोज़ पहले उन्होंने कहा था वो बोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा. बस यही पावर तो जीनग्रे के पास भी हैं. वैसे जीन ग्रे की कहानी तो ये भी है कि वो उन लोगों के लिएज्यादा खतरनाक साबित हुई जो उनके साथ थे. अरे, यही तो राहुल के साथ भी है. बहनमायावती के पास भी म्यूटेंट शक्तियां हैं. जिससे वो हाथी तक को कंट्रोल कर सकतीहैं. म्यूटेंट्स के साथ कुछ समस्याएं भी देखने को मिलती हैं. एक म्यूटेंट एंजल कीअपने पापा से नहीं पटती थी, लेकिन अंत में उनके काम वही आता है. एंजल आजकल यूपी मेंहै. पापा से अब भी नहीं पटती लेकिन लोग उसे अखिलेश बुलाते हैं.-------------------------------------------------------------------------------- लास्ट वुल्वरीन फिल्म का ट्रेलर आ गया है और ये अब तक की बेस्ट फिल्म है!ह्यू जैकमैन को देखता हूं, तो मरा हुआ भाई याद आ जाता हैएक्स-मेन के बड़े पापा वोल्वरिन कितने साल के हैं?एक्स मेन का मतलब वोल्वरीन ही होता है!एक्स मेन: एपोकैलिप्स एक मिस्टीक प्रधान फिल्म है