देश में सुपर कंप्यूटर बनाने का काम आपके ऑफिस वाले लैपटॉप से भी स्लो चल रहा है
पांच साल से जुटे पड़े हैं, बने सिर्फ तीन.
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ये भारत का सुपर कंप्यूटर ‘परम शिवाय’ है, जो BHU में रखा हुआ है. एक सुपर कंप्यूटर 32.5 करोड़ रुपए में बनकर तैयार होता है. (फोटो- India Today)
भारत ने साल 2015 में सुपर कंप्यूटर बनाने का काम शुरू किया था. टेक्नोलॉजी के मामले में धमक बनाने के लिए. लेकिन दुनिया का सबसे तेज कंप्यूटर बनाने का ये काम इतनी धीमी रफ्तार से चल रहा है कि आपको अपने ऑफिस का वो लैपटॉप भी इससे तेज लगेगा, जो एक वर्ड फाइल खोलने में भी दो मिनट तक डमरू घुमाता रहता है.
काम शुरू हुए पांच साल बीत चुके हैं और अब तक सुपर कंप्यूटर बने हैं कितने – तीन ठो. पांच साल, तीन कंप्यूटर. यानी एक साल में एक सुपर कंप्यूटर भी न बन पा रहा है. ये सारा काम शुरू हुआ था 2015 में लॉन्च हुए नेशनल सुपर कंप्यूटर मिशन (NSM) के साथ. इस मिशन को देश का ओवरऑल कंप्यूटर सिस्टम संवारने के लिए शुरू किया गया था.
ये थी खबर. इसे समझेंगे दो टुकड़ों में. पहले प्रोजेक्ट के बारे में बात कर लेते हैं. फिर थोड़ी बात करेंगे सुपर कंप्यूटर पर.
प्रोजेक्ट के बारे में...
इस काम में पार्टी कौन-कौन है? ये जानकारी मिली है एक RTI से. जवाब किसने दिए हैं? मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी ने (MeitY) और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नॉलजी (DST) ने. इन दोनों ने ही मिलकर NSM का जिम्मा संभाल रखा है. सारे काम में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग-पुणे (C-DAC) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) को नोडल सेंटर बनाया गया है. अच्छा, ये सारे अंग्रेजी नाम अब याद रखिएगा, आगे आते रहेंगे- MeitY, DST, C-DAC, IISc और NSM. जितना मांगा, उसका 17% मिला प्रोजेक्ट के लिए कुल बजट पास हुआ था- 4500 करोड़ रुपए. C-DAC और IISc को मिला कितना? 750 करोड़ रुपए ओन्ली. यानी जितना पइसा पास हुआ था, उसका सिर्फ 16.67 फीसदी. पूरा प्रोजेक्ट सात साल का है. पांच साल पूरे होने को आ रहे हैं. 2022 में प्रोजेक्ट की डेडलाइन है और अब तक कितना काम हो चुका है, वो तो ऊपर बता ही चुके हैं. सुपर कंप्यूटर बनाए क्यों जा रहे हैं? माने अपना काम तो छोटू से डेस्कटॉप से चल ही रहा है. कोई ऐसी दिक्कत है नहीं, तो बड़े लोग सुपर कंप्यूटर के पीछे क्यों पड़े हैं? जवाब है- अपना काम चल रहा है. लेकिन देश में और बैलेंस शीट बनाने से भी बड़े-बड़े और काम चल रहे हैं. उसके लिए सुपर कंप्यूटर की जरूरत पड़ती है. NSM का टारगेट है एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना, जिसमें 70 हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम हों. इनमें से 11 सुपर कंप्यूटर तो 2020 तक ही तैयार किए जाने का टारगेट था, जिनमें से अभी तीन ही तैयार हुए हैं. ये सिस्टम देश के प्रीमियम एजुकेशन ऑर्गनाइजेशन में लगाए जाएंगे. जैसे कि- IIT, NIT, IISER वगैरह. अब घूम-फिरकर ये सारे सुपर कंप्यूटर रहते तो देश में ही. तो कहने को भारत के पास दुनिया के सबसे तेज कंप्यूटर्स की गिनती बढ़ती. 2019 में IIT-BHU को परम-शिवाय मिला था भारत को 2019 में परम शिवाय मिला था. परम शिवाय यानी भारत को NSM के तहत मिला पहला सुपर कंप्यूटर. फरवरी-2019 में इसे IIT-BHU में इंस्टॉल किया गया था. कीमत थी करीब 32.5 करोड़ रुपए.Today Prime Minister inaugurates First Super Computer built under the National Supercomputer Mission at IIT BHU Varanasi. @rsprasad @PMOIndia @cdacindia @_DigitalIndia @makeinindia pic.twitter.com/8LvLwkqR7V
— Ministry of E & IT (@GoI_MeitY) February 19, 2019
अब सुपर कंप्यूटर के बारे में...
क्या है सुपर कंप्यूटर? दुनिया का सबसे तेज, सबसे धांसू कंप्यूटर. माने हमारे-आपके घर में जो कंप्यूटर होते हैं, उसकी कैपेसिटी को कई-कई गुना बढ़ा दें, तो बनता है एक सुपर कंप्यूटर. यानी कंप्यूटर अगर कैलकुलेशन के मामले में फुटकर है, तो सुपर-कंप्यूटर थोक. सुपर कंप्यूटर की कोई ऑफिशियल परिभाषा तो है नहीं, इसलिए हम उपमाओं के बल पर आपको जितना अधिक हो सके उतना आइडिया देने की कोशिश कर रहे हैं. भौकाली माइक्रोप्रोसेसर सुपर कंप्यूटर की इतनी रंगबाजी क्यों रहती है? भौकाली माइक्रोप्रोसेसर की वजह से. माइक्रोप्रोसेसर होता है कंप्यूटर का दिमाग. जितना ज़्यादा दिमाग, उतनी झमाझम कैलकुलेशन. उतनी बढ़िया स्पीड. अब सोचिए कि एक सुपर कंप्यूटर में हज़ारों की गिनती में माइक्रोप्रोसेसर लगे होते हैं. इसी वजह से उसकी स्पीड 200 पेटाफ्लॉप्स है. फ्लॉप्स? ये क्या गोची है… फ्लॉप्स. माने वो बॉक्स-ऑफिस वाला हिट-फ्लॉप नहीं. समझ लीजिए कि जितने ज़्यादा फ्लॉप्स, उतनी फास्ट सुपर-कंप्यूटर की स्पीड. और 200 पेटाफ्लॉप्स का मतलब है ‘दस हज़ार खरब’ कैलकुलेशन एक सेकंड में कर सकने की क्षमता. चीन के पास 227 सुपर कंप्यूटर दुनियाभर में सबसे ज्यादा सुपर कंप्यूटर चीन के पास हैं- 227. दूसरे नंबर पर 119 सुपर कंप्यूटर के साथ अमेरिका है. अब आप पूछेंगे कि भारत के पास कितने हैं? हम कहेंगे- छोड़ो यार कुछ और बात करो. अपने देश के पास है सिर्फ एक. हाई-परफॉर्मिंग सुपर कंप्यूटर के नाम पर एक डिवाइस है हमारे पास. वो भी पिछले साल 2019 में मिला परम-शिवाय, जिसका अभी ऊपर ज़िक्र आया था. यूं तो और तमाम सुपर कंप्यूटर तैयार हैं, लेकिन जो दुनियाभर का पैरामीटर है, वो मैच करने का दम सबमें नहीं है. अब सारा मामला उड़ेल दिया है गुरु. अभी सुपर कंप्यूटर बनाने का काम सुस्त चल रहा है. लेकिन डेडलाइन में अभी सालभर बचा है. क्या पता, काम सुपर कंप्यूटर की रफ्तार से ही चल पड़े. वरना ऑफिस वाला लैपटॉप तो है ही. फॉर्मेट मार-मारके काम चलाते रहिए.अरब से ज़्यादा लोगों के कंप्यूटर पर दिखने वाली ये फोटो आई कहां से है?