मुहर्रम चल रहा है और हाशिम सिस्टर्स के नोहे आजकल सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं.ख़ासकर इंग्लिश में पढ़ा गया उनका नोहा 'वी आर दि शिया ऑफ अली'. हाशिम सिस्टर्सपाकिस्तानी मूल की है. हाशिम सिस्टर्स तीन बहनें हैं, जिनमें सबसे बड़ी का नाम हैमाहम. माहम हाशिम सिस्टर्स की हर वीडियो में सेंटर में दिखती हैं. उनसे छोटी हैंअदीया और सबसे छोटी हैं सानिया.इन बहनों की पैदाइश तो पाकिस्तान की है पर बचपन से अब तक की परवरिश ब्रिटेन में हुईहै. हाशिम सिस्टर्स की खास बात ये है कि वो चार अलग-अलग भाषाओं में नोहा पढ़ती हैं.इनके नोहे इंग्लिश, उर्दू, फारसी और अरबी में हैं. हाशिम सिस्टर्स का इंग्लिश मेंवो नोहा जिसे इंटरनेशनल लेवल पर पॉपुलैरिटी मिली है, वो है 'वी आर द शिया ऑफ अली.'ये वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इस नोहे में शिया सेक्ट की पूरी डेफिनीशन है.https://www.youtube.com/watch?v=AMpRExd3X8Y'वी आर द शिया ऑफ अली' नोहे का हिंदी अनुवाद कुछ इस तरह है:हम अली को मानने वाले शिया हैं हमें कोई नहीं रोक सकता, आपका नाम लेने से. हम आपकेपरचम को और ऊंचा लहराएंगे, तब तक लहराएंगे जब तक आसमान को न छू ले.हम जानते हैं कि हमें सताया जाएगा और तकलीफ दी जाएगी, पर ये सब हमें रोक नहीं सकतींआपका नाम लेने से. हम आपके परचम को और ऊंचा लहराएंगे, तब तक लहराएंगे जब तक आसमानको न छू ले.ये एक मजबूत जुड़ाव है, आशा की लकीर है, उस जंग के लिए जिसे हम लड़ रहे हैं. हमारीनज़रों में आप ही हमारी ताकत हो और हम कभी नहीं हारेंगे.हमारे इमाम अली हैं, यही हमारा प्राइड और डिग्निटी है, हम हर दर्द और कठिनाइयों कोसह लेंगे. उनका नाम हम तह-ए-दिल से लेते हैं और वो हमारी तकलीफों को सुनते हैं.या अली या अली...--------------------------------------------------------------------------------इसके अलावा भी हाशिम सिस्टर्स के कुछ इंग्लिश नोहे हैं जो बहुत मशहूर हुए. उनमें सेएक है 'इन करबला', जिसमें करबला की जंग का ज़िक्र है. इस वीडियो में करबला की जंग केबारे में इंग्लिश में बताया गया है, जिससे इंटरनेशनल लेवल पर लोग करबला की कहानीजान सकें. 12 अक्टूबर को तो मोहर्रम भी है, जब करबला की जंग की याद में मातम मनायाजाता है.https://www.youtube.com/watch?v=OXQzFCfPjDwहाशिम सिस्टर्स का इंग्लिश में तीसरा नोहा 'टू सर्व यू हुसैन' है, जिसमें इमामहुसैन की बहादुरी और कैसे एक शिया उन्हें अपना आइडल मानता है, इसका ज़िक्र है.https://www.youtube.com/watch?v=zLir6jbPKckचौथा इंग्लिश नोहा 'फॉर यू ओ जैनब' है, जिसमें जैनब (हुसैन की बहन) के बारे मेंबताया गया है, उनके त्याग और बहादुरी को दिखाया गया है कि कैसे वो एक औरत होकर भीअपने भाई हुसैन और हसन की शहादत के बाद करबला में अपने कारवां को लीड करती हैं.https://www.youtube.com/watch?v=1o8tlSQ2oLkइनके अलावा भी हाशिम सिस्टर्स के कई इंग्लिश नोहे हैं. खास बात ये है कि इंग्लिशमें होने की वजह से इसे पूरी दुनिया के लोग सुन रहे हैं और करबला की ऐतिहासिक जंगको इन नोहों से जान पा रहे हैं. इसके अलावा हाशिम सिस्टर्स के उर्दू, फारसी और अरबीमें भी नोहे हैं. हाशिम सिस्टर्स का उर्दू में सबसे मशहूर नोहा है 'या हुसैन याहुसैन', जिसमें हाशिम सिस्टर्स हुसैन के लिए अपने प्यार का जिक्र कर रहीं हैं.https://www.youtube.com/watch?v=jx765ERxe2Aदूसरा उर्दू नोहा है 'मेरे बाबा का अज़ादार', जिसमें इमाम अली को याद किया गया है.https://www.youtube.com/watch?v=dC2-0r3I6OAजिन्हें नोहा के बारे में नहीं पता है, उन्हें बता दें कि नोहा एक पोएट्री है,जिसमें करबला की जंग में इमाम हुसैन पर हुए जुल्म की दास्तान बयां की जाती हैं.इम्पॉर्टेन्ट बात ये है कि नोहा शिया मुस्लिम में ही पढ़ा जाता है. खासकर मुहर्रममें मातम के दौरान. इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक मुहर्रम महीने की 10 तारीख को हुसैनकरबला के मैदान में यज़ीद के खिलाफ जंग लड़ते हुए शहीद हुए थे. मुहर्रम के दिन शियाहुसैन की याद में मातम मनाते हैं.शिया इमाम अली को अपना पहला इमाम मानते हैं. नोहा पढ़ने का भी एक ख़ास तरीका होता है,जिसमें उसे पढ़ने वाले जोर-जोर से अपनी छाती पीटते हैं और उनकी आंखे आंसुओं से भीगजाती हैं. ये उनका अंदाज़ होता है हुसैन को याद करने का. हाशिम सिस्टर्स के पेरेंट्सका कहना है कि जब ये लड़कियां छोटी थीं और वो घर में नोहा पढ़ते थे तो ये बहनेंउन्हें फॉलो करती थीं और रो देती थीं. फिर जैसे-जैसे बड़ी होती गईं, खुद-ब-खुद इनकारुझान दीनी बातों की तरफ होने लगा. खुद से ही नोहा लिखने लगीं और आज इस मुकाम परपहुंच गईं कि पूरा वर्ल्ड उन्हें हाशिम सिस्टर्स के नाम से जानने लगा.--------------------------------------------------------------------------------दी लल्लनटॉप के लिए ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने लिखी है.