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रुपये में होगा अंतरराष्ट्रीय व्यापार, क्या RBI ने 'आपदा में अवसर' वाली बात सही साबित कर दी?

भारतीय रिज़र्व बैंक ने रुपये में एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट के चालान, भुगतान और निपटान के लिए एक अहम फैसला लिया है. कहा है कि RBI का उद्देश्य भारतीय रूपये को विश्व स्तर पर ज्यादा व्यापार योग्य बनाना है.

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13 जुलाई 2022 (अपडेटेड: 14 जुलाई 2022, 12:54 PM IST)
आरबीआई गवर्नर, शक्तिकांत दास
आरबीआई गवर्नर, शक्तिकांत दास
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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने रुपये में एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट के चालान, भुगतान और निपटान के लिए एक अहम फैसला लिया है. कहा है कि RBI का उद्देश्य भारतीय रुपये को विश्व स्तर पर ज्यादा व्यापार योग्य बनाना है. बात करेंगे कि ये फैसला क्या है, इसके क्या मायने हैं और इसे क्यों लिया गया.

ये एग्ज़ैक्टली है क्या?

बात हो रही है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार के लिए रुपये से सेटलमेंट करने की. ये मैकेनिज्म किसी भी व्यापार को रुपये में सेटल करने में मदद करेगा. जैसे हम कहीं बाहर जाने से पहले करेंसी कन्वर्ट कराते हैं न डॉलर में, उसकी ज़रूरत शायद आने वाले समय में न पड़े.

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय व्यापार आरबीआई के ट्रांजैक्शन कंट्रोल नियमों के तहत पूरी तरह से कनवर्टिबल यानी परिवर्तनीय मुद्राओं में तय किया जाता था. पर अब चूंकि उद्देश्य ही रुपये की मदद से व्यापार, भुगतान, आदि करना है, इसीलिए इन विदेशी मुद्राओं के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. ट्रिविया के लिए जान लीजिए ये 5 मुद्राएं हैं – रेमिन्बी, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, अमेरिकी डॉलर, यूरो.

क्यों लिया गया ये फैसला?

वर्तमान की बात करें तो डॉलर की तुलना में रुपया सबसे निचले स्तर पर है. जो मैकेनिज्म RBI लाया है, उसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी देशों द्वारा लगाए प्रतिबंधों के तहत देशों के साथ व्यापर को सुविधाजनक बनाना है. रूस-यूक्रेन युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है. जानकार कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगाई से लेकर आर्थिक, व्यापारिक प्रतिबंध सब इस क्राइसिस के दुष्परिणाम ही हैं. 

यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ने से रूस स्विफ्ट पेमेंट गेटवे (SWIFT Payment Gateway) से कट गया. इसके बाद निर्यातकों (exporters) के लिए पेमेंट करना बड़ी समस्या बन गया. साथ ही रूस पर लगाए गए व्यापार प्रतिबंध कुछ देशों के साथ व्यापर के लिए अमेरिकी डॉलर जैसी वैश्विक मुद्रा के इस्तेमाल को रोकते हैं. ऐसे में अगर रुपये से ट्रेड सेटलमेंट होने लग जाए तो पेमेंट्स या भुगतान में आ रही दिक्कतों को दूर किया जा सकता है. साथ ही भारत एक तरह से, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अमेरिकी मुद्रा पर पूरी तरह आश्रित नहीं रहेगा. 

सांकेतिक तस्वीर (सोर्स: फ्री प्रेस जर्नल)

पश्चिमी देशों के लगाए प्रतिबंधों के चलते रूस की तरफ आ रहे डॉलर्स पर रोक लग गई. इन सबके बीच भारतीय कंपनियां आयात के लिए भुगतान के नए विकल्प खोज रही हैं, ताकि रूसी वस्तुओं की कम हुई कीमतों का लाभ उठा सकें. सो अगर ग्लोबल ट्रेड के लिए रुपया इस्तेमाल होता है, तो भारतीय कंपनियों को किसी और ‘मौद्रिक सहायक’ की ज़रुरत नहीं होगी. डॉलर पर आश्रित हुए बगैर भारतीय रुपये का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आसानी से किया जा सकेगा. ऐसे में व्यापारियों की बाछें खिलना लाज़मी है, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं.

इसके अलावा RBI का ये फैसला विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव के जोखिम भी कम करेगा. साथ ही रूस के साथ भुगतान करने में मुश्किलें नहीं होंगी. ये मैकेनिज्म न केवल रुपये को स्थिर करने में मदद करेगा, बल्कि इसे 100 पर्सेंट Rupee Convertibility के पहले कदम के रूप में भी देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि इससे भारत के निर्यात को बढ़ावा देने और रूस से क्रूड आयल खरीदने में भी सहायता मिलेगी.

ये सब होगा कैसे?

अब लेनदेन है पैसे का तो ज़ाहिर है बैंक तो सीन में होंगे ही. उन्हीं से शुरू कर समझते हैं. इस मामले में जो बैंक अधिकृत, माने ऑथराइज्ड डीलर होंगे, उन्हें RBI से अप्रूवल लेना होगा. चालन व्यवस्था के अंतर्गत सभी इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट को रुपये में डिनोमिनेट और इनवॉइस किया जा सकेगा.

अब मुद्रा का आदान-प्रदान है तो दो पार्टी होंगी जिनके बीच ट्रांजैक्शन होगा. इन भागीदार देशों की मुद्राओं के बीच का एक्सचेंज रेट मार्किट नियमित होगा. एक्सचेंज रेट का ख़ास ख्याल रखना ज़रूरी है ताकि किसी भी देश को नुकसान या उससे जुड़ी अस्थिरता न महसूस हो. 

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया

आयातक और निर्यातक, दोनों को भागीदार देश के बैंक से जुड़े एक खास अकाउंट का उपयोग करना होगा. इसे स्पेशल वोस्त्रो खाता (Special Vostro Account) कहते हैं. यही एकाउंट्स या खाते, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA 1999) के अधीन परियोजनाओं और निवेशों, आयात निर्यात अग्रिम प्रवाह प्रबंधन, ट्रेज़री बिल्स के भुगतान में इस्तेमाल होंगे. 

पर वोस्त्रो माने? 

वोस्त्रो और नोस्त्रो, दोनों शब्द एक ही बैंक खाते के लिए प्रयोग किए जाते हैं. नोस्त्रो का मतलब होता है ‘हमारा’ और वोस्त्रो का ‘आपका/तुम्हारा.’ शर्तों का इस्तेमाल तब होता है जब एक बैंक के पास दूसरे बैंक का पैसा जमा होता है. उनका उपयोग हरेक बैंक द्वारा रखे गए अकाउंटिंग रिकॉर्ड के दो सेट्स के बीच अंतर जानने के लिए किया जाता है. 

कुल मिलाकर कहें तो 'आपदा में अवसर' को RBI ने सही से भुनाने का एक प्रयास किया है. इस फैसले को, ज़ाहिर है ऊपर बताए गए फैक्टर्स की वजह से पॉजिटिव लाइट में भी देखा जा रहा है. लेकिन देखना ये है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों को कितनी मदद मिलेगी.

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