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पहला भारतीय, जिसका दुनिया में निकला दिवाला

सेठिया का कारोबार 5 साल में 600 गुना बढ़ा. लेकिन 30 महीने में 700 करोड़ का साम्राज्य भरभरा गया.

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3 दिसंबर 2015 (अपडेटेड: 5 अप्रैल 2018, 08:09 AM IST)
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बोइंग जहाज. जुआखाने. दर्जनों व्यापारी कंपनियों का करोड़पति मालिक. खुले हाथों से दौलत लुटाता. लेकिन जब बुरा वक्त आया तो जमानत के लिए 10 लाख रुपये तक नहीं जुटा पाया. दौर था 1986 का. ये कहानी तब 39 साल के बिजनेसमैन राजिंदर सिंह सेठिया की है. जानिए महज दो साल में राजा से दिवालिया बनने की सेठिया की कहानी... 1. सेठिया ने 1977 में ईजल कमोडिटीज कंपनी बनाई. 1978 में कारोबार करीब एक करोड़. 1979 में लंदन स्थित भारतीय बैंकों से संपर्क बढ़ाए. सूडान और नाइजीरिया से व्यापार के लिए कर्ज लिया. 2. ईजल का बिजनेस 1981 में करीब 100 करोड़ हो गया. 3 साल में 100 गुना बढ़ा व्यापार. कई और बैंकों से 100 करोड़ एडवांस लिया. 1982 में सेठिया ने 50 करोड़ की जायदाद खरीदी. 1983 में ईजल पर बैंकों का बकाया कर्ज 100 करोड़ तक पहुंच गया. 3. 1983 में ईजल का कारोबार 600 करोड़ के आंकड़े को पार गया. लेकिन इस साल नाइजीरिया में तख्तापलट से ईजल कंपनी को झटका लगा. भुगतान न किए जाने पर कर्ज बढ़ना इस साल से शुरू हुआ. 4. जनवरी 1984 में एलायड अरब बैंक ने कर्जे की वसूली के लिए फौजदारी का मुकदमा दायर किया. लंदन की एक कोर्ट ने ईजल का बैंक खाता जब्त कर लिया. फरवरी में सेठिया की गिरफ्तारी का वारंट जारी. सेठिया कर्ज और केसों से बचने के लिए लंदन से स्पेन चला गया. 5. ईजल को कर्जा देने वालों ने फरवरी 1984 में कोपेनहेगन में बैठक की. कंपनी को उबारने के लिए एक योजना बनाई गई. करीब 50 करोड़ की इस योजना को आरबीआई को भेजा गया. जिसने कर्जदारों और आरबीआई ने मंजूर कर लिया. 6. इस योजना को 6 नवंबर 1984 को लंदन के कोर्ट में रखा गया. हालांकि ब्रिटिश सरकार ने इसका विरोध किया. कोर्ट ने कंपनी बंद करवाकर कोर्क गुल्ला को इसका रिसीवर बना दिया. 7. नवंबर 1984 में सेठिया भारत लौटा. भारत में सेठिया ने तीन बैंकों से बात की. पैसा जुटाने के लिए वो कई बार अमेरिका और वेस्टर्न देश भी गया. आखिर में दिसंबर 1984 में फिर भारत लौट आया. 8. सेठिया 28 फरवरी 1985 को दिल्ली पहुंचा. अगले दिन सीबीआई ने जालसाजी और जाली पासपोर्ट रखने के आरोप में सेठिया को गिरफ्तार कर लिया. सेठिया को सजा हुई. जमानत तक के लिए रुपयों का जुगाड़ नहीं हो पाया. 715 दिन तिहाड़ जेल में रहने के बाद 13 फरवरी 1987 को सेठिया जमानत पर रिहा हुआ. 9. जिस वक्त सेठिया तिहाड़ जेल में कैद था, तब चार्ल्स शोभराज भी तिहाड़ जेल में था. हालांकि शोभराज तिहाड़ जेल से भाग गया था. बताया जाता है कि सेठिया और शोभराज के बीच काफी करीबियां थीं. सेठिया पर शोभराज को जेल से भगाने का आरोप भी लगा था. शोभराज को 1986 में तिहाड़ से भगाने का आरोप जिन 14 लोगों पर था, उनमें सेठिया का नाम सबसे ऊपर था. 10. सेठिया ने 2012 में कहा कि मेरे पर जिन बैंकों से कर्ज लेने की खबरें थीं, उन्हीं बैंकों ने कोर्ट में लिखित में कहा कि मेरे खिलाफ कोई केस नहीं है. सेठिया अब कमोडिटी के धंधे में हैं. हर साल तिरुपति बालाजी जाते हैं. साल 2012 में ही एक सड़क हादसे में उनकी पत्नी सोनिया की मौत हो गई थी.

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