भोपाल की सेंट्रल जेल. उसके गेट पर ही मोटे से अक्षरों में लिखा है ISO. जेल उसकेमानकों पर खरी थी इसलिए ही उसे ISO का सर्टिफिकेट मिला. यानी आप उसकी मजबूती परभरोसा कर सकते हैं. टाइट सिक्योरिटी वाली इस जेल से सिमी के आठ संदिग्ध आतंकी ताला तोड़कर भाग निकले. वोभी एक हेड कांस्टेबल का मर्डर करके. ISO वाली सेंट्रल जेल से भागना कोई पहली बारनहीं था. इससे पहले भी दो कैदी भाग चुके हैं, वो भी आठ महीने पहले. मर्डर के मामलेमें दोषी ठहराए गए थे और सजा काट रहे थे. वो कैदी अब कहां हैं, दोबारा पकड़े गए यानहीं, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई. उसी जेल में लकड़ी की चाभी से ताला खोलकर 8'खूंखार' संदिग्ध आतंकी भाग निकले. अब पता चला है कि जेल की सिक्योरिटी पर रिटायर्डजेल प्रमुख ने 2014 में ही चेतावनी दे दी थी. और कहा था कि सब कुछ भगवान भरोसे चलरहा है. इसके बाद भी जरूरी इंतजाम नहीं किए गए.पढ़िए, भोपाल की सेंट्रल जेल की सुरक्षा की पोल खोलते ये तीन उदाहरण1. जेल से भाग गए गणपत सिंह और रामलाल6 फरवरी साल 2004. खबर आती है दो कैदी सेंट्रल जेल से फरार हो गए. इनमें से एकमंडी, ग्यारसपुर (विदिशा) का रहने वाला गणपत सिंह रावत था और दूसरा फ्रीगंज, कुरवाई(विदिशा) का रामलाल केवट. ये दोनों मर्डर के जुर्म में 6 साल से सजा काट रहे थे.उम्रकैद हुई थी. इसमें सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात ये है कि पुलिस को पता भी नहींचला कि दो कैदी भाग गए हैं. जब कैदियों की गिनती हुई, तब पता चला. वो बाकी कैदियोंके साथ बगीचे में काम करने के लिए ले जाए गए थे. वहां से लौटने से के दौरान हीपुलिस को चकमा दे गए. तब बंदियों को ले जाने वाले प्रहरी को एसपी (जेल) ए.के. तोमरने सस्पेंड कर दिया था.2. सब कुछ भगवान भरोसे था सेंट्रल जेल मेंसाल 2014 की बात है. मध्य प्रदेश के फॉर्मर आईजी (जेल) जी.के. अग्रवाल ने मध्यप्रदेश सरकार को जेल का बेकार बिल्डिंग स्ट्रक्चर, सिक्योरिटी और स्टाफ की बदहालीके बारे में चेतावनी दी थी. बताया गया था कि यहां सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है.जेल में स्टाफ की कमी है. अग्रवाल साल 2000 में रिटायर हुए थे. 'इंडियन एक्सप्रेस'से बातचीत में जीके अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने इस बारे में उस समय के स्टेट चीफसेक्रेटरी एंथनी डेसा को 26 जून 2014 में एक लेटर लिखा था. इसकी कॉपी उन्होंनेनेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल और इंटेलिजेंस ब्यूरो को भी भेजी थी. 2013 मेंभोपाल की खांडवा जेल से सिमी के 6 मेंबर्स भाग गए थे. इसके कुछ महीने बाद हीउन्होंने लेटर लिखा था. लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया. अग्रवाल ने जेल अफसरों सेमीटिंग बुलाने की भी मांग की थी, जिसमें वह जेल से कैदियों के फरार होने जैसीघटनाओं से बचने के लिए कुछ सुझाव देते, लेकिन मीटिंग पर भी कोई जवाब नहीं मिला.उन्होंने लेटर में लिखा, 'इस समय सभी जेलों के सिमी सदस्यों को भोपाल सेंट्रल जेलमें रखा गया है. लेकिन इस जेल की बिल्डिंग स्ट्रक्चर से लेकर, गलत सुरक्षा व्यवस्थाऔर स्टाफ की दुर्दशा को देखते हुए यह मान लेना बिलकुल गलत होगा कि सब कुछ ठीक रहसकता है. यहां कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है.' अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने यहलेटर उस वक्त जेल प्रशासन को भी भेजा था. लेकिन जब डीजी (जेल) संजय चौधरी से पूछागया तो उन्होंने कहा कि वह ऐसे किसी लेटर के बारे में नहीं जानते.3. संदिग्ध आतंकियों को जेल में काबू करना हो गया था मुश्किलनई दुनिया की खबर है. 25 दिसंबर साल 2014. भोपाल सेंट्रल जेल प्रशासन ने जेलहेडक्वार्टर को लेटर लिखा. जिसमें बताया गया कि उन्हें काबू करना मुश्किल हो गयाहै. उस वक्त जेल में सिमी के 28 मेंबर्स बंद थे. उस लेटर में सिमी के कथित आतंकियोंकी हरकतों की जानकारी दी गई. बताया गया कि सेंट्रल जेल में बंद फैजल और उसकेसाथियों के इरादों को देखते हुए उन्हें दूसरे कैदियों से अलग कर दिया गया है. इसकेबावजूद फैजल अपने साथियों का मनोबल बढ़ाने के लिए भड़काऊ भाषण का इस्तेमाल कर माहौलबिगाड़ने की कोशिशें कर रहा है. कई दिनों तक कथित आतंकी खाने के बर्तन बजाकर जेल मेंशोरशराबा करते हैं. और जब नमाज पढ़ने के वक्त एक साथ मिलते हैं. तो आपस में बातेंकरने लग जाते हैं. कुछ प्लानिंग करते हैं. रिपोर्ट पढ़ने के बाद कुछ सवाल भी पैदाहोते हैं. पहला ये कि मर्डर करके फरार होने वाले दोनों कैदी कहां हैं? दूसरा सवाल,जब रिटायर्ड अफसर ने आगाह किया था तो क्यों कुछ नहीं किया गया? तीसरा सवाल, सिमी केसंदिग्ध आतंकियों को लेकर ही खास तौर से आगाह किया गया था. फिर भी लापरवाही क्योंबरती गई? चौथा सवाल, संदिग्ध आतंकियों को साल 2014 में अलग-अलग रखा जा रहा था और वेसिर्फ नमाज के वक्त मिलते थे. जब वो इतने कथित खतरनाक आतंकी थे तो उन्हें एक दूसरे के संपर्क में आने का मौका क्यों दिया गया? सवाल उठाइए. सवाल पूछिए. सवालों केहोने से सच का सबसे परिष्कृत रूप सामने आता है. यही लोकतंत्र है. --------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंभोपाल जेल में जब मोनिका बेदी बंद थीं तब CCTV कैमरे खूब चल रहे थे, फर्राटे से चलरहे थेभोपाल एनकाउंटर: इन दो चश्मदीदों ने निकाली पुलिस के दावे की हवा'ठीक किया, ठोंक के मारा आतंकियों को, लेकिन..'भोपाल जेल से फरार संदिग्ध आतंकियों का एनकाउंटर, आठों हलाक