हमारे देश के नाम पर बहस हो रही है. एक बेजा बहस. क्या हमारे देश का नाम बदलाजाएगा? क्या हमारे देश का नाम बदलने से देश बदल जाएगा? किसी संस्थान के नाम के आगेभारत लिखा है या इंडिया, इस बहस में उतरे बिना हम जानेंगे अपने देश के नाम कीकहानी. भिन्न-भिन्न नाम कहां से हमारे पास आए? और साथ में रुख करेंगे आज की सबसेजरूरी खबर का - मणिपुर. जहां की परिस्थितियों पर G20 के ठीक पहले संयुक्त राष्ट्रकी रिपोर्ट सामने आई है. क्या लिखा है इन कागजों में? और भारत सरकार का स्टैंड क्याहै? और जब एक अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के दरम्यान हमारे देश की स्थिति क्या है?प्रेसीडेंट ऑफ भारत और प्राइम मिनिस्टर ऑफ भारत लिखे दो कागजों से विवाद का जन्महुआ. विपक्ष ने इस पर अपने-अपने तर्कों के साथ सरकार के इस संभावित मूव पर सवालउठाए. सरकार ने कह दिया कि ऐसी कोई योजना नहीं है. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर नेइंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि नाम बदलने की बात अफवाह है. लेकिन उन्होंनेसाथ में एक बात नत्थी कर दी. कहा कि 'भारत' नाम के प्रति उनकी (विपक्ष की) मानसिकदशा क्या है, ये साफ दिखता है.लेकिन नाम परिवर्तन हो न हो, देश को विवाद के लिए मसाला मिल गया है. लेकिन इस विवादके पहले देश के संविधान की वो लाइन आपके सामने फिर से रखना चाहेंगे, जिससे हमने 4सितंबर के लल्लनटॉप शो की शुरुआत की थी.India, that is Bharat, shall be a Union of states.इंडिया, जो कि भारत है, राज्यों का एक संघ होगा. यानी देश का संविधान भी दोनोंनामों को अलग करके नहीं देखता. सत्ता और विपक्ष किस निगाह से देखेंगे? और क्योंदेखेंगे? वो भी तब जब दोनों ही नामों का अपना एक गुलजार इतिहास है.भारत नाम के बारे में बताते हैं. लेखक देवदत्त पटनायक टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखेअपने लेख में कुछ जानकारियां देते हैं. पहले तीर्थंकर ऋषभ देव के पुत्र और पहलेचक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम से उपजा भारत. ये जैन धर्मावलंबियों का मानना है.इसके अलावा ऋगवेद में भी एक वर्णन मिलता है भरत वंश का. इस वंश ने सात नदियोंद्वारा सींची गई जमीन पर 10 राजाओं को हराया था. इनके नाम पर देश का नाम पड़ा भरत,ये भी एक मान्यता है.इसके अलावा भरत नाम कहां-कहां मिलता है, इसका भी उल्लेख है. जैसे राजा राम के भाईभरत, शकुंतला और दुष्यंत के बेटे का नाम भरत, नाट्यशास्त्र लिखने वाले मुनि का नामभी भरत हुआ.इसके अलावा नाम इंडिया और हिंदुस्तान नाम की बात है तो दोनों ही नाम Indus और सिंधुनामों से उपजे. इंडियन एक्सप्रेस में छपे अद्रिजा रॉयचौधरी के आलेख की मानें तोमान्यता है कि हिंदुस्तान नाम फारसी लोगों ने दिया, कैसे? उन्होंने सिंधु घाटी मेंनीचे के इलाकों में बसे लोगों को हिंदू कहा. सिंधु से जन्मा हिंदू. स्तान जोड़ने परहिंदुस्तान नाम बन गया.फिर ग्रीक जब भारत आए तो उन्होंने सिंधु नाम को अपनी भाषा में Indus कहा. ध्यान रहेकि इसके पहले सिंधु कहा गया था, Indus बाद में ग्रीकों ने कहा था. बाद में जबईसापूर्व तीसरी शताब्दी में मैसेडोनिया के राजा अलेक्जेंडर ने भारत पर आक्रमण कियातो उसने Indus के आगे बसे हिस्से को India कहा.हिंदुस्तान नाम मुग़लों के भारत में आने के साथ ज्यादा चलन में रहा. लेकिन जब 18वींशताब्दी में देश में अंग्रेज आए तो उन्होंने इंडिया शब्द को चलन में रखा.लेकिन हमारे देश के इतने ही नाम नहीं है. हमारे बहुत सारे अभिलेखों में और देश मेंप्रचलित बहुत सारी मान्यताएं हैं, जो हमारे देश को अपने-अपने नामों से बुलाती हों.और सुनते हैं तो साफ होता है कि देश बस एक भूखंड नहीं है, देश एक भावना है, इसेफलने देना चाहिए.लेकिन देश का बहुत जरूरी वक्त नाम की बहस में बर्बाद हो रहा है. हमारे देश मेंविवाह के बाद महिलाओं का नाम बदला जाना एक आम बात है, लेकिन क्या नाम बदलने से देशकी महिलाएं एक बेहतर स्थिति में है? तो क्या देश का नाम देश की समस्याओं औरउपलब्धियों का पैरामीटर है? उससे स्थितियाँ बदलेंगी? सुधरेंगी या बिगड़ेंगी? शायदनहीं. इस बहस से बाहर देखना होगा हमें मणिपुर को, मणिपुर पर आई संयुक्त राष्ट्र कीरिपोर्ट को. मणिपुर हिंसा को लेकर UN एक्सपर्ट्स की एक रिपोर्ट सामने आई है. और इसपर हमेशा की तरह सरकार की नकार भी आ चुकी है. क्या है इस रिपोर्ट में? आइए समझतेहैं -4 सितंबर को आई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मणिपुर में मानवाधिकार उल्लंघन औरउत्पीड़न की घटनाएं हो रही हैं. साथ ही यौन हिंसा, एक्स्ट्रा-जूडिशल हत्याएं, घरोंकी तबाही, बेदखली, टॉर्चर और बुरे बर्ताव जैसी चीजें सामने आ रही हैं.मैतेई और कुकीसमुदायों के बीच संघर्ष को लेकर UN ने कहा है कि मणिपुर में चल रहे मानवीय संकट केबीच संकट सुलझाने के मानवीय प्रयास नदारद हैं. रिपोर्ट में और क्या कहा गया है?> अगस्त 2023 के मध्य तक इस हिंसा में 160 लोग मारे गए, जिसमें से अधिकांश कुकीसमुदाय से हैं> 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए> हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए> सैकड़ों चर्च जला दिए गए> खेत, फसल और जीविकाओं का बड़े स्तर पर नुकसान हुआयही नहीं, इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बड़े स्तर पर कुकी समुदाय को, खासकरइस समुदाय से आने वाली हर वर्ग की महिलाओं को, टारगेट किया गया है. जैसे -"ये चिंता का विषय है कि जो हिंसा हुई है, वो नफरती और भड़काऊ भाषण दिए जाने की वजहसे भड़के. ये भाषण ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यमों से फैले, जिनमें कुकी अल्पसंख्यकों,खासकर महिलाओं, के खिलाफ हो रही हिंसा को जायज ठहराया गया. ये हिंसा उनकी जनजातीयपहचान और उनके धार्मिक विश्वास को आधार बनाकर की गई."इसके अलावा इस रिपोर्ट में सुरक्षा बलों और सरकारों द्वारा उठाए जा रहे कदमों की भीआलोचना की गई है. बानगी देखिए -"इस हिंसा में जनजातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को जायज ठहराने केलिए काउंटर-टेररिज़म तरीकों का बेजा इस्तेमाल किया गया है, ऐसी जानकारियां चिंतापैदा करने वाली हैं. मणिपुर में हो रही घटनाएं भारत में धार्मिक और जातीयअल्पसंख्यकों की लगातार गिरती स्थिति में एक और दुखद अध्याय हैं...मणिपुर में यौनहिंसा रोकने के लिए भारत सरकार का धीमा और कमजोर रीस्पान्स चिंता पैदा करने वालाविषय है."हम यहां बता दें कि हम यहां पर अंग्रेजी में लिखी गई रिपोर्ट का एक फौरी हिन्दीअनुवाद आप तक ला रहे हैं, ताकि आपको मामला समझा सकें. इस पूरी रिपोर्ट को आपयूनाईटेड नेशंस के ह्यूमन राइट्स के हाई कमीशन की वेबसाइट पर जाकर पढ़ सकते हैं.रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत सरकार द्वारा रिपोर्ट का खंडन आया, जैसे बीते समय कईसारे इंडेक्स और रिपोर्ट की खंडन आया है. Press Trust of India के हवाले से आईखबरों की मानें तो जिनेवा में UN ऑफिस में मौजूद भारतीय स्थायी मिशन के जवाब में UNकी रिपोर्ट पर तीन शब्द हाईलाइट किए जाने लायक हैं-Unwarranted - अनपेक्षितPresumptive - मनमाना या अनुमानितMisleading - भ्रामकलेकिन इसके साथ ही भारत सरकार ने एक और वाक्य लिखा है, जिसको बार-बार अंडरलाइन करकेपढ़ा जाना चाहिएSituation in Manipur is peaceful and stable. यानी मणिपुर में स्थितियां शांत औरस्थिर हैं.इस वाक्य पर ध्यान क्यों देना चाहिए, इस पर आगे बात करेंगे, पहले भारत का पक्षबताते हैं. भारत ने ये भी कहा कि सरकार मणिपुर समेत पूरे देश के लोगों केमानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. और ये रिपोर्ट मणिपुर के सही हालातोंऔर भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को सही से समझे बिना जारी की गई है. भारत ने येभी नाराजगी ज़ाहिर की है कि स्थायी कमीशन के जवाब का इंतजार किए बिना ये रिपोर्टजारी कर दी गई. लेकिन इस नूराकुश्ती के बीच, नेरटिव सम्हालने की कोशिशों के बीच इसपर बात करना जरूरी है कि जब दिल्ली में G20 का उत्सव मनाया जा रहा है, उस दौरानमणिपुर में क्या स्थिति है?स्थिति ये है कि आज की तारीख में भी मणिपुर में झड़पें हो रही हैं और कई इलाकों मेंअभी भी फायरिंग जारी है. दोषी कौन है? दोनों ही समुदाय. निशाने पर कौन है? दोनों हीसमुदाय. अगर आप 6 सितंबर को आया ये बुलेटिन देख रहे हैं तो आपको ये भी पता होनाचाहिए कि 5 सितंबर की शाम से मणिपुर की घाटी के 5 जिलों में कर्फ्यू को फुल इफेक्टमें लागू कर दिया गया. ये जिले हैं-बिष्णुपुरकाकचिंगथोबलइंफाल वेस्टइंफाल ईस्टइन जिलों में बीते कुछ दिनों तक कर्फ्यू में कुछ घंटों की ढील दी जाती रही, लेकिनऐसा क्या हुआ कि 5 सितंबर की शाम कर्फ्यू छूट वापिस ले ली गई. इसका जवाब है COCOMI- Coordination Committee on Manipur Integrity का एलान. बता दें कि COCOMI मैतेईसमुदाय के बीच मौजूद सिविल सोसायटीज़ का एक अम्ब्रेला समूह है. COCOMI ने एलान कियाकि वो 6 सितंबर को कुकी बहुल चुराचांदपुर की सीमा तक मार्च करेंगे, और वहां परमौजूद केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाएंगे. लिहाजा कर्फ्यू की छूट वापिस ले ली गई.6 सितंबर का दिन आया, कर्फ्यू के बीच मार्च शुरु हुआ और बिष्णुपुर की सीमा तक गया.सामने सुरक्षाबलों की बैरकेडिंग थी. संघर्ष शुरु हुआ. ग्राउंड पर मौजूद सूत्रों नेबताया कि Rapid Action Force के जवानों ने प्रतिरोध किया. खबरों ने बताया कि आंसूगैस के गोले और रबर बुलेट की फायरिंग की गई. बड़ी संख्या में लोग घायल हुए. इस शो केलिखे जाने तक घायलों की संख्या की अभी तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं आई है.चूंकि मणिपुर पुलिस ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और उसके पदाधिकारियों पर FIR भीदर्ज की है क्योंकि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में मणिपुर के स्थानीय पत्रकारों के बायसपर बात की थी, और सुप्रीम कोर्ट ने अपने आज के आदेश में पुलिस को अगली सुनवाई तककोई भी एक्शन लेने से मना कर दिया, तो ज़ाहिर है कि मणिपुर जिस भी स्थिति में है,स्थिर भले है, लेकिन शांति की उम्मीद इस राज्य को अभी भी है.