राजस्थान के अलवर में एक नाबालिग लड़की के साथ हुई रेप की घटना हुई. रेप के मामलोंमें अव्वल रहने के बावजूद अशोक गहलोत सरकार अब तक ऐसी नज़ीर पेश क्यों नहीं कर पाईहै, कि अपराधी ऐसी घटनाओं को अंजाम देने से पहले 20 बार सोचें. छोडो मेहँदी खडकसंभालो खुद ही अपना चीर बचा लो द्यूत बिछाये बैठे शकुनि, मस्तक सब बिक जायेंगे सुनोद्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे जब भी बलात्कार और उसे जुड़ी विभत्सताकी खबरें आती हैं तो रामधारी सिंह दिनकर की ये लाइनें जहन में कौंधने लगती है. हरकोई इसको लिखने-पढ़ने लगता है. और आज हम इसका जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्योंकिराजस्थान के अलवर में हुई घटना ने फिर से इंसानी चेतनाओं को झंझोड़ कर दिया है. 13जनवरी के बुलेटिन में हमने आपको बताया था कि अलवर में किस तरह एक 16 साल की मूकबाधिर बच्ची के साथ दरिंदगी हुई. बच्ची के शरीर पर नुकीली चीज से वार किया. घंटोंचले इलाज और सर्जरी के बाद उसकी जान बच गई. मगर आज फिर से इस खबर पर विस्तार से बातकरना जरूरी इसलिए हो गया क्योंकि घटना के तीन दिन बाद अब पुलिस इस मामले में कोई भीकार्रवाई नहीं कर पाई है. ऐसे में उस बच्ची की वेदना को समझना जरूरी हो गया है, जोना बोल सकती है, ना सुन सकती है...सिर्फ फफक-फफक कर रो सकती है. इसलिए आज उसबेजुबान की आवाज बनना हमें देश तमाम खबरों से ज्यादा जरूरी लगा. और अब इस परराजनीति होनी लगी है. राजस्थान के अलग-अलग शहरों में सीएम गहलोत के पुतले बीजेपीकार्यकर्ताओं की तरफ से फूंके गए, नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन खूब हुआ. चूंकि यूपीमें लड़की हूं, लड़ सकती हूं का नारा देने वाली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी व्यक्तिगत वजहों से राजस्थान के सवाई माधोपुर के दौरे पर हैं तो बीजेपी के तीखेसवाल उनसे भी होने लगे. इस घटना पर हो रही राजनीति और उसके तमाम पहलुओं को समझे,उससे पहले पूरे घटनाक्रम को समझना होगा. तारीख 11 जनवरी. वक्त- रात के 8 बजे जगह-तिजारा फाटक पुलिया, अलवर राजस्थान. ठीक इसी जगह पर जहां पुलिस गस्त सुराग तलाशतेनजर आ रही है, यहीं पर एक 16 की बच्ची लहूलुहान स्थिति में मिली. वो ना कुछ बतापाने की स्थिति में थी, ना ही कुछ समझा पाने की. उसके प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंगहो रही थी और उसकी मानसिक हालत भी ठीक नहीं थी. पुलिस ने और जानकारी जुटाई तो पताचला कि चलती गाड़ी से कोई लड़की को फेंककर चला गया. पुलिस ने डॉग स्कॉट की मदद सेसुराग तलाशने की कोशिश की और रात में ही मौके पर अलवर जिले की एसपी तेजस्वनी गौतममौके पर पहुंची. और पहला बयान भी वहीं से जारी किया गया उन्होंने कहा मौक़े परपुलिस तुरंत पहुँच गई थी. बच्ची को हमने ICU में भर्ती कराया है. डॉक्टर्स ने बतायाकि बच्ची मानसिक रूप से कमजोर है. उसके प्राइवेट पार्ट से बहुत ख़ून आ रहा था.संभवतः यह सेक्शुअल असॉल्ट का मामला है. यानि यहां से बात साफ है कि मामला रेप सेजुड़ा हुआ है और पुलिस उस दिशा में जांच कर रही है. पुलिस एक काम अच्छा किया कि उसेफौरन इलाज के लिए अस्पाल ले गई. जिसकी वजह से उसकी जान बच गई. लेकिन सवाल अब ये किपिछले तीन दिन की जांच के बावजूद भी पुलिस अब तक आरोपियों की तलाश क्यों नहीं करपाई ? और एक सवाल अलवर पुलिस के शुरुआती रवैये पर भी. मानसिक रूप से कमजोर बच्चीदोपहर के करीब 1 बजे ही घर से गायब हो गई, जांच हुई तो शाम के करीब 7.30 बजे उसेइलाके में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में पैदल चलते देखा गया. माना जा रहा है कि इसकेबाद ही बच्ची के साथ कुछ गलत हुआ. लेकिन इससे पहले बच्ची के परिजन शाम के करीब 4बजे पुलिस के पास मिसिंग रिपोर्ट लिखवाने अलवर की अकबरपुर चौकी में गए. तबपुलिसवालों ने तुरंत एक्शन लेने के बजाय, टालमटोल करते हुए मालाखेड़ा थाने में जाकरमिसिंग रिपोर्ट लिखवाने भेज दिया. तो सवाल यहीं से कि अकबरपुर चौकी की पुलिस नेतुरंत रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं की ? स्थानीय पुलिस ने आलाधिकारियों को सूचित क्योंनहीं किया ? और सबसे बड़ा सवाल फौरन गश्त पर जाकर बच्ची को क्यों नहीं ढूंढा ?प्रथम दृष्टया ही मामला पुलिस के ढुलमुल रवैये का ही लगता है क्योंकि बच्ची अपने घरसे करीब 25-26 किलोमीटर दूर तिजारा पुलिया पर मिली. शहर में कोविड प्रोटोकॉल की वजहसे नाकेबंदी और गश्ती भी बढ़ी हुई है लेकिन किसी ने भी इसे नोटिस नहीं किया, जबकिइस दौरान बच्ची मालाखेड़ा थान,सदर थाना, अरावली विहार, NEB कोतवाली और शिवाजी पार्कथाने के इलाकों से गुजरी. और इसके बावजूद हुई घटना ने 5-5 थानाक्षेत्र की पुलिस कीमुस्तैदी प्रश्नवाचक चिन्ह लगा दिया शिवाजी पार्क थाने की पुलिस तब जाकर सक्रियहुई, जब उसका शरीर तिजारा पुलिस पर खून से लथपथ मिला. जांच के लिए अब तक पुलिस 25किलोमीटर के दायरे में 300 सीसीटीवी फुटेज तलाश चुकी है, लेकिन आरोपियों का अब तककोई सुराग नहीं मिल पाया. कड़ियां जोड़ने में पुलिस नाकाम है और तब यहां से शुरूहोती है राजनीति. पिछले तीन दिनों से स्थानीय बीजेपी के नेता गहलोत सरकार के खिलाफप्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन आज दिल्ली से भी मोर्चा थाम लिया गया. बीजेपी प्रवक्तासंबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सीधे प्रियंका गांधी को निशाने पर ले लियाऔर सीधे प्रियंका गांधी से सवाल इसलिए क्योंकि जब अलवर केस सामने आया तब, प्रियंकागांधी की मौजूदगी राजस्थान में ही है. रणथंभौर में वो अपना जन्मदिन मनाने पहुंचीथीं. विरोधियों की तरफ से पूछा जाने लगा कि यूपी में लड़की हूं लड़ सकती हैं कानारा देने वाली प्रियंका राजस्थान के मामले पर चुप क्यों हैं ? जबकि वहां तो उन्हींकी पार्टी की सरकार का है. एक नैरेटिव ये भी सेट किया जाने लगा कि प्रियंका यूपी केउन्नाव और हाथरस तो जाती हैं, मगर अपने ही राज्य में कुछ भी नहीं बोल रही हैं. औरबीजेपी ने इसी बात को मुद्दा बनाकर उन्हें घेरना शुरू कर दिया. और राज्यसभा सांसदकिरोणीलाल मीणा के नेतृत्व में जहां प्रियंका गांधी ठहरी हैं, वहां विरोध प्रदर्शनहुआ... इतना नहीं कुछ बीजेपी की कुछ कार्यकर्ता पुलिस का घेरा तोड़कर आगे बढ़ गईंतो आगे महिला पुलिस ने उन्हें रोक लिया . यानि पुलिस ने अपना काम किया औरप्रदर्शनकारियों ने अपना, मगर बुलेटिन रिकॉर्ड किए जाने तक प्रियंका गांधी का कोईबयान या ट्वीट नहीं आया और ना ही सीएम गहलोत का कोई ट्वीट. ये बात हर पार्टी औरनेता की तरफ से रहती है. विपक्ष रहे तो हल्ला बोल, कानून व्यवस्था के नाम पर सवालऔर सत्ता मिली तो जवाब आता है कि सबकुछ सरकार नहीं कर सकती. हम मानते हैं कि सरकारसबकुछ नहीं कर सकती, समाज भी अपनी जिम्मेदारी है. मगर सरकार क्या पुलिस को इतना भीनिर्देश नहीं दे सकती कि महिलाओं से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई की जाए, जोकि यहां नहीं की गई. या कह लीजिए लगातार नहीं की जा रही है क्योंकि NCRBके आंकड़ेकहते हैं कि रेप के मामले में राजस्थान नंबर 1 पर है, सबसे ज्यादा रेप की घटनाएंराजस्थान में हुई हैं. साल 2019 में रेप के 5997 मामले दर्ज हुए, यानी प्रतिदिन 16केस. ठीक इसी तरह साल 2020 में 5310 रेप के मामले सामने आए यानी 15 केस प्रतिदिन जबकि 2018 में वसुंधरा सरकार के वक्त 4335 रेप केस दर्ज हुए यानी 12 केस प्रतिदिन.साफ है कि पिछली सरकार की तुलना में रेप केस राजस्थान में बढ़ गए हैं और इस मामलेमें नंबर वन होना किसी भी सूबे के लिए दागदार हैं. मगर इस पर भी पुलिस और सरकारकहती है कि हम हर मामला दर्ज करते हैं इसलिए ये आंकड़े हैं और इस भी तुर्रा ये किपुलिस कहती है 43%आंकड़े झूठे होते हैं. ऐसा 2300 से ज्यादा मामलों में फाइनलरिपोर्ट लगाने के बाद पुलिस कहती है. फिर भी पुलिस के ये बयान भी पीड़ित पक्ष केमनोबल को तोड़ने वाले होते हैं. और अपराधियों के हौसलों को बुलंद करते हैं. इसमामले में फिलहाल पुलिस ने IPC की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की 3,4,5,6 धाराओ मेंमामला दर्ज किया. जबकि पुलिस ने प्राइवेट पार्ट्स में वार कर नुकसान पहुँचाने पर376 A में मामला दर्ज करना चाहिए था. इसके अलावा पुलिस ने जानलेवा कोशिश की धाराएंभी दर्ज नहीं की हैं.इससे पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल उठ रहा है. मगर इस मामलेमें सरकार के नुमाइंदे कह रहे हैं कि वो कड़ी कार्रवाई करेंगे कार्रवाई होगी, मगरकब ये सवाल अब भी बना हुआ है. बच्ची मासूम है, परिवार गरीब है. माता-पिता दोनोंमजदूरी करते हैं और उनकी मजबूरी बड़ी ही संवेदना के साथ समझना होगा. सरकार से सवालतो है मगर रही बात पॉलिटिकल नैरेटिव की तो एक सवाल विपक्ष के तौर पर बीजेपी से भीहै. जिस राज्य में जो विपक्ष में रहता है कि उसके नेता सरकार के खिलाफ प्रदर्शनकरते हैं. प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश की घटनाओं में जाने पर बीजेपी उसके तारराजस्थान से जोड़ती है और विरोधी के नाते ये उसका अधिकार है ? मगर खुद बीजेपीराजस्थान में विपक्ष में होकर अपनी मजबूत स्थिति क्यों नहीं दर्ज कराती ? बजायप्रियंका गांधी से पूछने के लिए वो अपने बड़े नेताओं को जमीन पर उतार सरकार कोक्यों नहीं झकझोरती है ? इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है. स्थानीय नेता तो विरोध कररहे हैं. मगर क्या सिर्फ ट्वीट करने से जिम्मेदारी पूरी हो जाती है ? पूर्व सीएमवसुंधरा राजे क्यों नहीं विरोध करने उतरीं ? वो क्यों खुद प्रदर्शनों को लीड करतीहैं, क्या सीधे चुनाव के वक्त ही बाहर आएंगी राज्य में बीजेपी के अध्यक्ष सतीशपुनिया क्यों नहीं अलवर गए ? पूर्व महिला विकास मंत्री अनीता भंदेल क्यों पीड़ित सेनहीं मिलीं ? या इनके अलावा दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व से राजस्थान में जाकर विरोधक्यों नहीं करता ? प्रियंका गांधी और राहुल गांधी उत्तर प्रदेश जाते हैं तो सरकारपर दबाव बनता है, क्या ऐसा नहीं होना चाहिए कि दिल्ली से बीजेपी के बड़े नेताराजस्थान पहुंचकर विपक्ष की भूमिका निभाएं, गहलोत सरकार पर कार्रवाई का दबाव बनाए ?इस पर भी बतौर विपक्ष बीजेपी को सोचना चाहिए. बड़े नेताओं को जाकर परिवार सेसंवेदनाएं जतानी चाहिए, क्योंकि बड़ी मुश्किल से 7 डॉक्टरों की टीम ने प्लास्टिकसर्जरी कर उसकी जान बचाई है. डॉक्टर कहते हैं कि 25 दिन में बच्ची के जख्म भरनेशुरू हो जाएंगे. मगर बच्ची का चेहरा, उसकी पीड़ा, उसकी वेदना डॉक्टर भी नहीं भूल पारहे. होश आती है तो रोने लगती है, अपने माता-पिता को खोजने लगती है. शरीर के जख्मतो कुछ दिन में भर जाएंगे, मगर आत्मा पर जो चोट हुई है वो शायद ही कभी भर पाएगी. वोभले ना बोल पाए, लल्लनटॉप की टीम उसकी आवाज लगातार उठाती रहेगी, जबकि पुलिस कोई ठोसकार्रवाई नहीं कर देती. जब तक कोई कठोर संदेश नहीं दे देती.