'अकेली खड़ी हूं तो ज़बरदस्ती फोटो खींच लोगे मेरी? मैं क्या इंडिया गेट हूं?'
सेलिब्रिटी भी तो इंसान होते हैं भाई.
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फोटो - thelallantop
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फिल्म ‘फ़ुकरे’ की भोली पंजाबन परेशान है. फ़िल्म में भी थी, लेकिन इस बार असल ज़िंदगी में परेशान है. उन खलिहरों से जो किसी की प्राइवेसी का रत्ती भर ख़याल नहीं करते. कोई फ़िल्म स्टार है इसका मतलब ये नहीं कि जहां दिखे वहां उन पर झपट लो. जबसे मोबाइल में कैमरे का अविष्कार हुआ है, लोगों ने ‘शूट ऐट साईट’ का कोई और ही मतलब निकाल लिया है. कोई सेलिब्रिटी दिखा नहीं कि शूट कर डालते हैं.
ऐसे ही फुकरों से तंग आकर एक्ट्रेस रिचा चड्ढा को कहना पड़ा है,
ऐसी ही एक घटना के बारे में उन्होंने बताया.
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जहां-तहां घुस आने वाले फैंस से परेशान रिचा का कहना है कि एक्टर पब्लिक फिगर तो होते हैं, लेकिन पब्लिक प्रॉपर्टी नहीं. रिचा ने कहा, “मैं सड़क पर खड़ी भी होती हूं तो लोग आते हैं और मेरे फोटो खींचने लगते हैं. मुझसे पूछे बगैर. ये सही नहीं है.”“मैं इंसान हूं, इंडिया गेट नहीं.”
ऐसी ही एक घटना के बारे में उन्होंने बताया.
“मैं अपनी मां के साथ अस्पताल से बाहर आ रही थी. मां की तबियत खराब थी. मैं उन्हें चेकअप करवाने ले गई थी. दो बंदे एक बाइक पर आए. फोटो खींचने की ज़िद करने लगे. मुझे अपनी मां को कार में बिठा कर दवाइयां कलेक्ट करनी थी. ऐसी सिचुएशन में मैं फोटो लेने से क्यों इंकार नहीं कर सकती?”उन्हें इस एक बार के बारे में बताना पड़ा क्यूंकि उनका ये इन्कार सुर्ख़ियों में आ गया. रिचा का कहना सही ही है. स्टार भी तो आखिर इंसान ही है. उनका भी अच्छा-बुरा दिन होता है. किसी-किसी दिन उनका भी मूड खराब हो सकता है. हर वक़्त तो दांत चियार कर सेल्फी लेना या पाउट बनाना नहीं पॉसिबल होता है न! इतनी सी बात समझने के लिए कोई डिग्री लेनी पड़ती है? वैसे स्टार्स को यूं तंग करने की घटनाएं नई नहीं हैं. अभी कुछ दिन पहले पॉर्न स्टार मियां खलीफ़ा के साथ भी ऐसा ही वाकया पेश आया था. एक अतिउत्साही फैन सेल्फी खिंचाने के लिए उनके आगे कूद पड़ा था. मियां खलीफ़ा ने भी एक मुक्का रसीद कर दिया था भाई को. पूरी कहानी यहां से पढ़िए: पॉर्न स्टार मिया खलीफ़ा के साथ कर रहा था बदतमीज़ी, मुक्का खा गया अभी हमारी जनता को किसी को ‘स्पेस देना’ क्या होता है ये सीखना पड़ेगा. नहीं सीखेंगे तो किसी दिन रिचा चड्ढा उर्फ़ 'नगमा' वैसे ही दौड़ा देगी, जैसे ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ में सरदार ख़ान को दौड़ाया था. याद है न!
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