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'मर्द की सेक्सुअल प्रिफरेंस से मैं उसकी जिंदगी की फिलॉसफी बता दूंगी'

आज के दिन ही आइन रैंड की मृत्यु हुई थी. वो अमेरिका की लेखिका और फिलॉसफर थीं जिन्होंने कैपिटलिज्म की जबर्दस्त प्रशंसा की थी.

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Ayn Rand
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ऋषभ
6 मार्च 2017 (Updated: 6 मार्च 2017, 02:00 PM IST)
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आज एक लड़की की मौत हुई थी. उस लड़की से सारा जमाना डरता था. बड़े-बड़े विद्वानों के पास उसकी बातें सुनने का धैर्य नहीं था. Ayn Rand नाम था इस लड़की का. नाम का उच्चारण करना किसी को नहीं आता था. आज भी इस बात पर चर्चा होती है कि क्या पढ़ें. पर उन्होंने अपने एक फैन को लेटर लिख के समझाया था कि क्या पढ़ते हैं:
मैं ये जरूर कहूंगी कि Ayn नाम भी है और एक खोज भी. इसका ऑरिजिनल फिनलैंड के नामों से लिया गया है. अगर इसको पढ़ें तो ये आइना होगा. मुझे नहीं पता कि अंग्रेजी में इसको क्या कहा जाएगा पर मैं आखिरी आ हटा देती हूं स्पेलिंग से. मैं इसे आइन ही पढ़ती हूं.
आइन ने कई किताबें लिखी थीं. 1936 में इनकी पहली नॉवेल आई. We The Living. इसका नायक एक कम्युनिस्ट से कहता है,' मैं तुम्हारे आदर्शों से घृणा करता हूं. पर मैं तुम्हारे तरीकों की प्रशंसा करता हूं. अगर कोई ये सोचता है कि वो सही है, तो उसे लाखों मूर्खों को समझाने का इंतजार नहीं करना चाहिए. उसे उन लोगों को मजबूर कर देना चाहिए. फिर 1943 में इनकी किताब आई. The Fountainhead. इसका नायक एक आर्किटेक्ट हावर्ड रोर्क है. वो गरीब लोगों के लिए एक हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाता है. पर दया की वजह से नहीं. उसे डिजाइन की भूख है. पर जब उसके प्लान बदल दिए जाते हैं तो वो प्लान ही उड़ा देता है. उसे प्रोजेक्ट की महानता के अलावा और कुछ नहीं दिखाई देता. इस उपन्यास के सारे पात्र नियमों को तोड़ते हैं. फिर 1957 में किताब आई. Atlas Shrugged. इस उपन्यास के पात्र एक हाथ आगे जाते हैं. वो अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कुछ भी करने को तैयार होते हैं. इस किताब के मुताबिक कोई सरकार कुछ काम नहीं करती. अच्छे लोग भी हिंसा करते हैं. प्यार में लोग पागल हो जाते हैं. हर पात्र एक्स्ट्रीम पर जिंदगी जीता है. बिजनेस दुनिया के लिए सबसे जरूरी है. ये किताब कॉर्पोरेट को हीरो साबित करती है. आलोचना करने वालों को गलत. इसमें जिंदगी में दिमाग के रोल पर कहानी है. कि जब सारे थिंकर और क्रिएटिव लोग गायब होने लगते हैं तो क्या होता है. आइन की किताबें इंसान की महत्वाकांक्षा को सबसे ऊपर रखती हैं. आइन से मिलने जो भी जाता था, उसके तर्कों की चीर-फाड़ हो जाती थी. वो सेल्फिशनेस को सबसे ऊपर रखती थीं. दुनिया में जो लोग कुछ बनाते हैं, कुछ हासिल करते हैं, उनकी नजर में सेल्फिशनेस से ही हासिल कर पाते हैं. और यही करना भी चाहिए. उनके मुताबिक वो कोई भी इमोशन लॉजिक से समझा सकती थीं. हालांकि ऐसा माना जाता है कि इमोशन और लॉजिक अलग चीजें हैं. पर तर्क को आइन ने एक नये स्तर पर पहुंचा दिया था. वो कहती थीं कि मुझे बता दो कि एक मर्द को सेक्सुअली क्या अच्छा लगता है और मैं उसके जीवन की पूरी फिलॉसफी बता दूंगी. कर्म को लेकर आइन के बहुत तगड़े विचार थे. इतने कि बहुत लोग उनको हृदयहीन मानते थे. फाउंटेनहेड में पात्र रोर्क कहता है,' मुझसे मेरे परिवार, मेरे बचपन, दोस्तों या भावनाओं के बारे में मत पूछो. मुझसे उन चीजों के बारे में पूछो जिनके बारे में मैं सोचता हूं.' पर ये पूरी बात नहीं थी. रोर्क जिन चीजों के बारे में सोचता है, वो अंत में परिवार, बचपन जैसी चीजों से ही आकर मिल जाती हैं. इसी किताब में जो सेक्स सीन होता है, वो लगभग रेप के बराबर होता है. पर तर्कों के सहारे ये चीज भी निकल जाती है. आइन के तर्क मोटा-मोटी ये बताते हैं कि दुनिया के बारे में सोचने के बजाए अपनी महत्वाकांक्षाओं को फॉलो करना श्रेयस्कर है. 1905 से 1982 तक जिंदा रही थीं आइन. अमेरिका की उपन्यासकार और फिलॉसफर. ऑब्जेक्टिविज्म कहा गया इनकी फिलॉसफी को. आइन के मुताबिक धरती पर रहने की फिलॉसफी थी ये. इनका जन्म वैसे रूस में हुआ था. वहीं पढ़ाई हुई. हिस्ट्री, फिलॉसफी और स्क्रीनराइटिंग की. उनके सामने ही बोल्शेविक क्रांति हुई. रूस में कम्युनिस्ट आए. 1925 में वो रिश्तेदारों के पास जाने की बात कहकर अमेरिका आईं और फिर कभी वापस नहीं आईं. यहां पर लिखते-लिखते वो हॉलीवुड तक पहुंच गईं. एक एक्टर फ्रैंक कॉनर से शादी भी कर ली. फिर उपन्यास लिखना शुरू किया. इसके साथ ही तमाम आर्टिकल और निबंध भी लिखा. दुनिया में भरोसा और भावनाओं की ज्यादा बातें होती थीं उस वक्त. पर आइन ने रीजन यानी तार्किकता को प्रमोट किया. बलिदान की जगह पर खुद के फायदे को श्रेष्ठ बताया. समाज की जगह पर व्यक्तिगत चीजों को महत्व दिया. और कम्युनिज्म के दौर में कैपिटलिज्म को सबसे सही ठहराया. उनकी नजर में यही सबसे बढ़िया सोशल सिस्टम था. ऑब्जेक्टिविज्म के बारे में उन्होंने कहा:
मेरी फिलॉसफी का मतलब है कि इंसान एक हीरो है. जिसकी खुशी के साथ उसका नैतिक उद्देश्य भी होता है. उसका सबसे अच्छा काम कुछ क्रिएट करना ही हो सकता है. तार्किकता ही उसका सबसे बड़ा हथियार है.
ये आइन रैंड का पहला इंटरव्यू है: https://youtu.be/1ooKsv_SX4Y ये भी पढ़ें:

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