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जब अटल ने पेट पूजा के लिए टूटी चप्पल दिखाके 5 रुपये मांगे

अटल कानपुर में लॉ की पढ़ाई छोड़कर आ गए थे लखनऊ. यहां वो बन गए पत्रकार. 15 अगस्त 1947 को लखनऊ से राष्ट्रधर्म नाम की मासिक पत्रिका शुरू हुई थी. अटल उसमें सहायक संपादक बन गए. अटल बड़ी मेहनत से यहां काम करने लगे. राष्ट्रधर्म के प्रबंधक पवनपुत्र बादल ने दैनिक जागरण को बताया कि कि 31 अगस्त 1947 को राष्ट्रधर्म पत्रिका का पहला अंक प्रकाशित हुआ. पहले अंक की 3500 कॉपियां बिकीं जो उस समय रेकॉर्ड थीं.

विपक्ष के लाए अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए वाजपेयी ने सोनिया गांधी पर सवाल दागा. कहा, ऐसा लगता है कि आप डिक्शनरी सामने खोलकर लिख रही थीं.
अटल बिहारी वाजपेयी ने लखनऊ में पत्रकारिता की शुरुआत की और वहीं से बाद में लंबे समय तक सांसद रहे.

इसी दौर का एक किस्सा सुनाते हुए पवनपुत्र बताते हैं कि अटलजी ने एक दिन तत्कालीन कार्यालय प्रमुख जगदंबा प्रसाद से पांच रुपये मांगे. उन्होंने तल्ख नजरों से देखा और पूछा- ‘क्या करोगे पांच रुपये का?’ अटल जी ने उन्हें अपनी टूटी चप्पल दिखा दी. बस फिर क्या था, रुपये मिल गए. अटल रुपये लेकर वचनेश त्रिपाठी संग चप्पल खरीदने के बजाए चले गए पेट पूजा करने. वहां दबा के भुट्टा खाए गए और लस्सी पी गई. जब खाने-पीने का कार्यक्रम पूरा हुआ तो वचनेश ने पूछा- चप्पल का क्या होगा? तो अटल ने जवाब दिया, इतने दिनों से काम चला रहे हैं, दो-तीन महीने और चला लेंगे.


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