'इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं', सरकार ने वक्फ की जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा किया
SG Tushar Mehta ने 'Waqf-By-User' पर कहा कि केंद्र सरकार को विवादास्पद 'वक्फ-बाय-यूजर' के तहत वक्फ घोषित संपत्तियों को वापस पाने का कानूनी अधिकार है. उन्होंने यह भी दलील दी कि वक्फ Islam का अनिवार्य हिस्सा नहीं है.

केंद्र सरकार ने बुधवार, 21 मई को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वक्फ इस्लाम का ‘अनिवार्य’ हिस्सा नहीं है, बल्कि यह केवल धार्मिक दान (चैरिटी) है. सरकार ने कोर्ट से यह भी कहा कि उसे 'वक्फ-बाय-यूजर' के तहत वक्फ घोषित की गई संपत्तियों को वापस लेने का कानूनी अधिकार है, क्योंकि सरकारी जमीन पर किसी का भी व्यक्तिगत अधिकार नहीं हो सकता.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के चीफ जस्टिस (CJI) बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के सामने दलीलें पेश करते हुए कहा,
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वक्फ बोर्ड कोई धार्मिक काम नहीं करता बल्कि उनका काम पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों का प्रशासन पूरी तरह धार्मिक कार्य है. उन्होंने कोर्ट में कहा,
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, तुषार मेहता ने 'वक्फ-बाय-यूजर' पर कहा कि इस पुराने नियम के तहत वक्फ मानी गई विवादित संपत्तियों को वापस पाने का कानूनी अधिकार केंद्र सरकार को है. उन्होंने दलील दी,
'वक्फ-बाय-यूजर' वो तरीका था जिसमें कोई संपत्ति लंबे समय तक धार्मिक या चैरिटेबल काम के लिए इस्तेमाल हो रही हो, तो उसे वक्फ माना जा सकता था, भले ही उसके पास कोई दस्तावेज ना हो. केंद्र सरकार ने कहा कि नए वक्फ कानून में इस प्रावधान को हटा दिया गया है.
वीडियो: सुप्रीम कोर्ट में वक्फ एक्ट पर लगभग 4 घंटे की बहस, इन कानूनों का हवाला दिया गया

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