'इमरजेंसी के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तानाशाही को वैधता दी'- उपराष्ट्रपति धनखड़ का बयान
Jagdeep Dhankhar ने तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति किसी व्यक्ति की सलाह पर काम नहीं करते.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने इमरजेंसी के दौरान दिए गए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले की आलोचना की है. उन्होंने इस आदेश को दुनिया के न्यायिक इतिहास का सबसे ‘स्याह अध्याय’ बताया है. उन्होंने कहा कि नौ उच्च न्यायालयों के फैसले को खारिज करने वाले उस आदेश ने देश में तानाशाही और निरंकुशता को वैधता दी.
20 जून को उपराष्ट्रपति राज्यसभा इंटर्न्स के एक समूह को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति ने इंदिरा गांधी (तत्कालीन प्रधानमंत्री) के कहने पर इमरजेंसी की घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे, उन्होंने पूरे मंत्रिपरिषद की सलाह नहीं जानी. जगदीप धनखड़ ने कहा,
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उन्होंने आगे कहा,
उपराष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में कहा,
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने हर साल 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया है.
25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक देश में आपातकाल लागू रहा था.
वीडियो: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व CJI संजीव खन्ना की तारीफ कर जगदीप धनखड़ ने क्या इशारा किया?

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