भूख हडताल पर बैठे कांग्रेस सांसद की तबीयत बिगड़ी, केंद्र से फंड की मांग को लेकर है प्रदर्शन
MP Sasikanth Senthil Hospitalised: भूख हड़ताल कर रहे तमिलनाडु के कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने बताया कि उनका उचित इलाज चल रही है. फिलहाल उनकी हालत स्थिर है. हालांकि, इस दौरान उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखने की बात कही.

तमिलनाडु के कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वो समग्र शिक्षा अभियान (SSA) योजना के तहत तमिलनाडु के लिए पैसे जारी करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे थे.
शुक्रवार, 29 अगस्त को शुरू किए गए इस भूख हड़ताल के दूसरे दिन यानी 30 अगस्त की रात अचानक शशिकांत सेंथिल की तबीयत बिगड़ गई. ऐसे में उन्हें तिरुवल्लूर सरकारी मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में भर्ती कराया गया. बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि उनका उचित इलाज चल रहा है. फिलहाल उनकी हालत स्थिर है. हालांकि, इस दौरान उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखने की बात कही.
बाद में शशिकांत सेंथिल का एक और पोस्ट आया. इसमें उन्होंने बताया,
डॉक्टरों की सलाह पर मुझे अब तिरुवल्लूर सरकारी अस्पताल से राजीव गांधी सरकारी सामान्य अस्पताल, चेन्नई ट्रांसफर कर दिया गया है. यहां से भी मैं उसी दृढ़ संकल्प के साथ अपनी भूख हड़ताल जारी रखूंगा. जब तक कि हमारी उचित सर्व शिक्षा अभियान (SSA) निधि जारी नहीं हो जाती.
तमिलनाडु के नेताओं का आरोप है कि सर्व शिक्षा अभियान (SSA) योजना के तहत अलॉटेड लगभग 2,000 करोड़ रुपये के वितरण में केंद्र सरकार देरी कर रही है. इन नेताओं ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू करने से मना करने के कारण पैसे रोके जा रहे हैं.
इंडिया टुडे से जुड़े सगाय राज की खबर के मुताबिक, राज्य के शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी इस मुद्दे को उठाया है. इन नेताओं ने भी शिक्षा की फंडिंग का 'राजनीतिकरण करने' और NEP के खिलाफ तमिलनाडु के रुख के लिए उसे 'सजा देने' के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है.
इससे पहले, तिरुवल्लूर के सांसद शशिकांत सेंथिल ने संसद में भी ये मामला उठाया था. उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेटर लिखकर पेंडिंग फंड्स तत्काल जारी करने का आग्रह किया था. शशिकांत सेंथिल के मुताबिक, इस देरी से राज्य में कई अहम शिक्षा पहलों पर गलत प्रभाव पड़ा है. जिसमें शिक्षा का अधिकार (RTE) फंड्स का वितरण और शिक्षकों को वेतन का भुगतान शामिल है.
सेंथिल ने कहा कि केंद्र सरकार के फैसले से तमिलनाडु में 43 लाख छात्रों और 2.2 लाख शिक्षकों का भविष्य गंभीर अनिश्चितता में पड़ गया है.
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