न्यूटन को पायलट और गेहूं को धान बताया, ओडिशा की स्कूली किताबों में निकलीं 1678 गलतियां
Odisha Textbook Mistakes: ओडिशा में स्कूल की किताबों में ज्ञान के महान शिल्पकारों ने गेहूं को धान, कांच के गिलास को कप, तापमान को दबाव लिखा है. कुल 1,678 गलतियों में से अकेले 705 गलतियां 8वीं क्लास की किताबों में मिली हैं.

ओडिशा में पहली क्लास से लेकर आठवीं क्लास तक जारी की गई किताबों में हैरान कर देने वाली गलतियां सामने आई हैं. या यूं कह लें कि किताबों में गलतियों का वर्ल्ड कप खेला गया है. क्योंकि एक दो गलतियों को गलती कहा जा सकता है. हम्यून एरर माना जा सकता है. लेकिन यहां तो किताबों में 1678 गलतियां पाई गईं हैं. ये गलतियां तथ्यात्मक, और वैचारिक दोनों हैं. वैज्ञानिक न्यूटन के लिया लिखा है कि वो पायलट थे, जहाज उड़ाते थे. डायरेक्टरेट ऑफ टीचर एजुकेशन के बैनर तले हुए बाकी कारनामे भी जानते हैं.
आजतक से जुड़े अजय कुमार नाथ की रिपोर्ट के मुताबिक किताब में कर्नाटक के प्रसिद्ध हंपी मंदिर परिसर की तस्वीर को 'कोणार्क सूर्य मंदिर' बता दिया गया. इतना ही नहीं कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर को ओडिशा विधानसभा बताकर छाप दिया गया.
गड़बड़ी की लिस्ट और भी लंबी हैगलतियों की लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती. ये काफी लंबी है क्योंकि भूगोल की किताब में ओडिशा की प्रसिद्ध नियमगिरी पहाड़ियों को गलत तरीके से झारखंड में दिखा दिया गया है. इसके अलावा, ब्रह्मपुर जो कि गंजम जिले का एक अहम शहर है, उसे सीधे एक नया जिला घोषित कर दिया गया है. साथ ही ज्ञान के महान शिल्पकारों ने किताबों में गेहूं को धान, कांच के गिलास को कप, तापमान को दबाव लिखा है. कुल 1,678 गलतियों में से अकेले 705 गलतियां 8वीं क्लास की किताबों में मिली हैं.

मतलब स्थिति ऐसी हो गई कि बच्चों की किताबों की जांच के लिए सरकार को वही करना पड़ा जो आमतौर पर बड़े घोटालों या गंभीर प्रशासनिक मामलों में किया जाता है. उनमें से एक चीज है बैठक. इन कारनामों के सामने आते ही सीएम मोहन चरण माझी ने लोक सेवा भवन में एक समीक्षा बैठक की. इस बैठक में स्कूल और जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड, मुख्य सचिव अनु गर्ग और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की जांच के लिए डेवलपमेंट कमिश्नर की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति के गठन का एलान किया है.
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इस कमेटी को ठीक 7 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. सीएम माझी ने अधिकारियों को साफ कह दिया है कि इस गंभीर लापरवाही के पीछे जो भी व्यक्ति या एजेंसी जिम्मेदार है, उसे पहचान कर सख्त से सख्त सजा दी जाए. स्कूल और जनशिक्षा विभाग ने आधिकारिक तौर पर इन गलतियों को स्वीकार कर लिया है. अब संकट यह है कि बच्चों की पढ़ाई बीच में न रुके, इसलिए विभाग ने सभी स्कूलों को एक शुद्धिपत्र जारी किया है. शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों को पढ़ाते समय किताबों की गलतियों को सुधारकर ही पढ़ाएं.
ऐसा करना भी चाहिए क्योंकि जिन किताबों से बच्चे ज्ञान लेने बैठे थे, वो कन्फ्यूजन का पीएचडी कोर्स करा रही थीं. अब अगली किताब में क्या होगा, कोई भरोसा नहीं. हो सकता है कल बच्चे पढ़ें कि अकबर ने चांद पर राज किया था और आर्यभट्ट ने वाई-फाई का आविष्कार किया था. क्योंकि जिस किताब में न्यूटन हवाई जहाज उड़ाने लगें, वहां कुछ भी संभव है.
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