'पटेल की सुनी होती तो...', पहलगाम हमले पर पीएम मोदी बहुत बड़ा दावा कर गए
प्रधानमंत्री मोदी के सरदार पटेल वाले दावे पर कांग्रेस ने कहा कि उनको इतिहास की कोई ‘समझ नहीं’ है. कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तंज कसा कि प्रधानमंत्री को ‘गंभीरता से नहीं लेना’ चाहिए.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 27 मई को गुजरात में आयोजित एक रैली में कहा कि अगर सरदार पटेल की बात मानी गई होती तो पहलगाम हमला नहीं होता. पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद 1947 में भारत के तीन टुकड़े कर दिए गए. गुलामी की जंजीरें कटनी चाहिए थीं लेकिन भुजाएं काट दी गईं. पीएम मोदी ने यह भी दावा किया कि देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल ने कहा था कि जब तक PoK कब्जे में नहीं आता, तब तक सेनाएं नहीं रुकनी चाहिए थीं. लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान रैली में उन्होंने कहा,
पहलगाम हमले को देश के विभाजन से जोड़ते हुए कहा,
पीएम ने आगे कहा,
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादियों का सैन्य प्रशिक्षण होता है और ट्रेनिंग के बाद वे भारत भेजे जाते हैं. आतंकवादियों को जहां मौका मिला वे निर्दोष-निहत्थे लोगों को मारते रहे और हम सहते रहे.
वहीं, प्रधानमंत्री के सरदार पटेल वाले दावे पर कांग्रेस ने कहा कि मोदी को इतिहास की कोई ‘समझ नहीं’ है. कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा,
खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को ‘गंभीरता से नहीं लेना’ चाहिए.
दरअसल, इतिहासकार बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल एकमत नहीं थे. इंडिया टुडे ने ऐतिहासिक स्रोतों के हवाले से बताया कि पटेल ने कश्मीर मुद्दे को यूएन में भेजने और सीजफायर का विरोध किया था.
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